कोलकता – एक नज़र  में 

कोलकता – एक नज़र  में

हावड़ा ब्रिज

 

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हाथ रिक्शा जो अब बहुत कम राज्यों में है
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भीड़ भाड़ वाली न्यू मार्किट जहां पटरे की दुकानों से ले कर ब्रांडेड माल के शो रूम भी है. यहीं गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का एक घर जहां  गुरूदेव ने अपनी एक कविता – The awakening of the Fountain – रची थी जो बहुत लोकप्रिय हुई – जिसकी स्मृति में शिला है
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अब यह घर होटल है जहां पर्यटक ठहरते है , इस होटल की बनावट में कुछ डिज़ाइन गुरूदेव के घर जैसा है

 

कोलकता का स्वाद अगले चिट्ठे में …..

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दीघा (दिगाह )

कोलकता से दो सौ किलोमीटर की दूरी पर है – दीघा (दिगाह )

आधिकारिक तौर पर लिखा है  –  दीघा  …. जबकि कई स्थानों पर लिखा है दिगाह

बाई ओर समुद्री तट है और दाहिनी ओर रिहाइशी इलाका है जहां बाज़ार भी है

तीन तरह के तट है – एक तट रेतीला है

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एक पथरीला है

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एक तट पर काले बड़े समुद्री पत्थर है

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तट पर अन्य तटों की तरह ही खाने-पीने और मोती बांस की दुकाने सजी है लेकिन विशेषता यह है कि मछली की दुकाने अधिक है, ज़ाहिर है , कोलकाता  जो है

अच्छा समय बीता यहाँ  …. अगले चिट्ठे में कोलकता पर एक नज़र  ….

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कोलकता – ज़ू

कोलकता के ज़ू में ख़ास है – सफ़ेद मोर

 

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सफ़ेद शेर

 

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और बहुत ख़ास बंगाल की शेरनी जो आराम फरमा रही ही जिसे हम दूर से ही देख पाए
अन्य प्राणी भी है

 

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यहां से निकल कर हम दीघा गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में  ….

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ठाकुरबाड़ी

ठाकुरबाड़ी – कोलकता  में गुरूदेव रविन्द्र नाथ टैगोर का घर,  गुरूदेव का जन्म इसी घर में हुआ था

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अब इसे रविन्द्र भारती विश्व विद्यालय में बदल दिया गया है.

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यहां गुरूदेव द्वारा प्रयोग की गई वस्तुएं जैसे उनका चश्मा, पुस्तके आदि है

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यहां से निकल कर हम ज़ू गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में  ….

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विक्टोरिया मेमोरियल 

वर्ष 1919 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के सामने हुए गोलीकांड जिसे हम जलियांवाला बाग़ काण्ड के नाम से जानते है  … इसी की याद दिलाता है – कोलकाता का – विक्टोरिया मेमोरियल

 

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इस घटना का विरोध करते हुए गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नोबल पुरस्कार लौटा दिया था

 

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माना जाता है की महारानी विक्टोरिया के आदेश से गोलीकांड हुआ था,  यहां  महारानी विक्टोरिया और ब्रिटिश शासकों की मूर्तियां है, विक्टोरिया की मूर्ति बीचो-बीच है जिसके दोनों ओर गोलीकांड के मृतकों की सूची है

 

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इस  गोलीकांड पर चली अदालती कार्यवाही अखबारों में प्रकाशित हुई थी, अखबारों की ये कतराने, इसके आलावा चश्मदीद गवाहों के बयान देखे जा सकते है
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पहले तल पर संग्रहालय है जिसमे आधुनिक पेंटिंग है
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पुराना ग्रमोफोन और रेडियो भी है,  बाहर ख़ूबसूरत लॉन है
इसके बाद हम गए ठाकुरबाड़ी जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में  …

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भारतीय संग्रहालय – कोलकता

कोलकता के भारतीय संग्रहालय … नेशनल म्यूज़ियम …. में बिभिन्न स्थानों पर विभिन्न समय में की गई खुदाई में मिली कलात्मक मूर्तियां ,  स्तम्भ, प्राणियों के जीवाश्म और पुरानी वनस्पतियों का अच्छा संग्रह है –

 

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यहां से निकल कर हम विक्टोरिया मेमोरियल गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में  …

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दक्षिणेश्वर मंदिर

कोलकता में  हुगली नदी के किनारे स्थित है दक्षिणेश्वर मंदिर

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माँ दुर्गा के दर्शन होते है  … गर्भ गृह के सामने लम्बाई में 12 गर्भगृहों में 12 शिवलिंग है जो नदी के तट पर है
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नदी पर बाली ब्रिज है जिस पर रेल दौड़ती है
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तट पर महान हस्तियों की मूर्तियां अनावरण की प्रतीक्षा में है
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यहाँ से निकल कर हम भारतीय संग्रहालय देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में  ….

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