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शिरडी के साईंबाबा

पिछले महीने हम शिरडी गए थे।

महाराष्ट्र के इस शिरडी गाँव को साईंबाबा के मन्दिर परिसर की तरह विकसित किया गया है। पूरे परिसर में दुकानें सजी थी फूल और पूजा सामग्री की। फूल दो तरह के थे - एक हार के रूप में साईंबाबा की मूर्ति के लिए और दूसरे गुच्छे के रूप में बाबा की समाधि पर चढाने के लिए।

परिसर में सबसे पहले द्वारकामाई के दर्शन किए जाते है। यह स्थान वास्तव में एक पुरानी मस्जिद थी। बाबा अधिकतर यहीं बैठा करते थे।

मस्जिद में सामने बरामदे जैसा भाग था जिसमें कोने के थोड़े से भाग में रैलिंग होती थी जिसके पीछे बाबा बैठा करते थे और सामने कुछ सीढियाँ नीचे खुले भाग में गाँववासी बैठते थे और चर्चा-परिचर्चा होती थी। इसीलिए यह जगह अधिक महत्वपूर्ण है और सबसे पहले यहीं दर्शन किए जाते है। यहाँ दर्शन के लिए बाबा की आदमकद मूर्ति है।

चित्र में देखिए द्वारकामाई में दर्शन के लिए भक्तों की कतार -

इसके बिल्कुल पास में है चावड़ी। द्वारकामाई में बाबा के दर्शन के तुरन्त बाद चावड़ी में दर्शन के लिए जाया जाता है। माना जाता है कि बाबा रात के समय चावड़ी में सोते थे। इसीलिए चावड़ी में महिलाओं को जाने की मनाही है लेकिन पास में ही बाबा की मूर्ति स्थापित कर दी गई है ताकि महिलाएँ यहाँ दर्शन कर सके।

चित्र में आप देख सकते है महिलाओं और पुरूष के लिए अलग-अलग स्थान बताए गए है -

आगे का विवरण अगले चिट्ठे में…

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