Archive for मथुरा

यमुना मंदिर

मथुरा में यमुना किनारे केशी धाट से दूसरे घाट तक फैला है यमुना मंदिर –

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लेकिन मंदिर जीवन्त नहीं है। यमुना के जिस तट पर यह मंदिर बसा है वह तट बेहद गन्दा है –

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इसी गंदे तट पर कुछ ऊँचाई पर बने मंदिर के अहाते में हर शाम हवन होता है –

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लम्बे परिसर में दो-तीन स्थानों पर हवन हो रहा था। बहुत कोफ्त हुई इस मंदिर को देख कर। यदि पूरी सफाई की जाए और मंदिर को संवारा जाए तो यह निश्चित रूप से देश के श्रेष्ठ मंदिरों की श्रेणी में होगा और श्रृद्धालु भी यहां श्रृद्धा से शीर्ष नवाएगें।

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अष्टसखि मन्दिर

मथुरा में लोकप्रिय बांके बिहारी मन्दिर के पास है नवनिर्मित अष्टसखि मन्दिर –

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पहले तल पर बङे कक्ष में राधाकृष्ण की सुन्दर मूर्ति है और कदम्ब का वृक्ष आदि की शिल्पकारी राधा की पृष्ठभूमि को साकार करती है –

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गर्भगृह में बीच में राधा की मूर्ति है और दोनों ओर चार-चार सखियों की मूर्तियाँ है,गर्भगृह के पास एक बोर्ड पर आठों सखियों के नामों की क्रमबद्ध सूची है –

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नया होने से अधिक चमकदार है मन्दिर।

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श्री कृष्ण जन्म भूमि मंदिर – मथुरा

कृष्ण की बाल लीलाओं के बाद हम पहुंचे उनके जन्म स्थान मथुरा में और यहाँ देखा श्री कृष्ण जन्म भूमि मंदिर जो कृष्ण जन्म की कथा दर्शाता है –

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मंदिर के सामने कुण्ड है जिसमे पानी नहीं था। मंदिर के भीतर परिसर में सुन्दर उद्यान है और कुंआ भी है। सबसे पहले दर्शन किये उनके केशव रूप के जो कंस वध का रूप है। इसके बाद गिरिराज किशोर का रूप देखा जो वही है जो हमने गोवर्धन मंदिर में देखा था। आगे योगमाया का मंदिर है जिसके आगे है कारागार जिसमे शिला भी है, शिला से कंस ने कृष्ण के अग्रज भाइयों का शिशु रूप में वध किया था। । जेल में –  कारागार में कृष्ण का जन्म हुआ था, यही सामने पीछे की ओर सीढिया नज़र आती है जहां से वासुदेव जन्म के बाद कृष्ण को लेकर नन्द गाँव गए थे और योगमाया को ले आए थे।

इतना भाग पुराना है इसके बाद ऊपरी भाग बिडला घराने ने बनवाया जो एक विशाल कक्ष है। इसमे राधा कृष्ण की बहुत सुन्दर मूर्ती है। इसके अलावा यहाँ विभिन्न कक्षों में दुर्गा, राम सीता की मूर्तियाँ भी है।
 मथुरा के बाद हमने देखा आगरा जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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