Archive for तेलंगाना

मेदक चर्च

दक्षिण भारत के बड़े चर्चो में से एक चर्च तेलंगाना राज्य के मेदक ज़िले में है –
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लम्बी गली पार करने के बाद दाहिनी ओर लम्बे हरियाले संवरे भाग में है चर्च –
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भीतर बङे कक्ष में आगे मंच पर समाधि है जिस पर क्रास है –
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अंधेरा होते ही रोशनी में जगमगाता क्रास और चर्च द्वार –
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इसके बाद सौ किं.मी. की दूरी तय कर हम हैदराबाद लौट आए।

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पोचाराम झील और वाइल्ड लाइफ

पोचाराम झील पानी की कमी से सूखी ही लगी जिससे यहां रौनक भी कम ही रही –

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झील के किनारे पोचाराम वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है। यहां साढ़े चार किलोमीटर में अभयारण्य फैला है –

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दोनो ओर वन है बीच के कच्चे रास्ते से देखते चलना है इसीसे यहां केवल चौपहिया वाहन से ही जा सकते है –

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वैसे यहां रेल की व्यवस्था का प्रावधान है लेकिन रेल अभी शुरू नहीं की गई है। यहाँ संख्या में हिरण अधिक है –

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झुंड के झुंड कुलांचे मारते नज़र आए। हिरण के अलावा मोर और नील गाय भी नज़र आए लेकिन कैमरे में कैद करना कठिन ही रहा, हम इंसानों को देख कर और थोङी सी आहट पा कर वन में भीतर दौङ जाते है।

इसके बाद हम गए चर्च जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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मेदक क़िला

मेदक का क़िला बारहवीं सदी का है.

द्वार पर कलात्मक हाथी से इसके काकतीय शैली में बने होने का पता चलता है –

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वैसे अब सीढ़िया ही बची है जो संख्या में 250 है –

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सबसे उपर बनी दूध बौली ही क़िले का मुख्य आकर्षण है –

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तेलंगाना में बौली का अर्थ है कुँआ। वैसे कुएं जैसी गहराई नहीं है, तालाब जैसा ही है। इसमें कुछ पानी तो हमेशा बना रहता है। कहते है पहले इसमें केवल दूध हुआ करता था जिसका अंदाज़ा पानी के पास के सफेद पत्थरों से लगता है।

इसके बाद हम गए पोचाराम झील और पोचाराम वाइल्ड लाइफ सेंचुरी जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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