Archive for जम्मू

रणवीरेश्वर मंदिर

रघुनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर व्यस्त सड़क पर हैं रणवीरेश्वर मंदिर -

यह शिव मंदिर हैं. मंदिर का प्रांगण बहुत बड़ा हैं. आगे कुछ सीढियां चढ़ने पर ऊंचाई पर मुख्य मंदिर हैं. सामने सफ़ेद झक विशाल हिमलिंग हैं. दोनों ओर चार-चार बड़े शिवलिंग हैं. 

सामने गर्भ गृह में शिव पार्वती वर-वधू के रूप में हैं. यह रूप आमतौर पर मंदिरों में नही होता हैं. मैंने पहली ही बार देखा. 

यहाँ पूजापा में सामान्य फलों केले, अंगूर के साथ काजू के फल भी बहुत देखे गए. 

यहाँ से निकल कर हम दिल्ली लौट आए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में....

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रघुनाथ मंदिर

जम्मू में व्यस्त चौराहे पर हैं रघुनाथ मंदिर.

जम्मू काश्मीर के महाराजा द्वारा तैयार करवाया गया हैं यह मंदिर. बाहर से पांच कलश नज़र आते हैं जो लम्बाई में फैले हैं -

गर्भ गृह में राम सीता लक्ष्मण की विशाल मूर्तियाँ हैं.

इस मंदिर की विशेषता यह हैं कि इसमे रामायण महाभारत काल के कई चरित्रों की मूर्तियाँ विभिन्न कक्षों में हैं. गर्भ गृह के चारो ओर अहाते में विशाल कक्ष बने हैं जिनमे ये मूर्तियाँ हैं.

इसके अलावा एक कक्ष में चारों धाम के दर्शन किए जा सकते हैं. बीच में ऎसी व्यवस्था हैं कि चारों ओर से एक-एक धाम - रामेश्वरम, द्वारकाधीष, बद्रीनाथ, केदारनाथ के दर्शन किए जा सकते हैं.

एक कक्ष में बीच में भगवान सत्यनारायण के दर्शन किए जा सकते. बीचोबीच उकेरा गया सूर्य बहुत सुन्दर हैं. चारों ओर दीवारों पर बारहमासा दर्शनीय हैं, हर महीने चैत्र, वैशाख आदि के लिए उस माह के मुख्य देवता की मूर्ति हैं.

यहाँ से हम आगे बढे और देखा रणवीरेश्वर मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में....

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चारो धाम मंदिर

जम्मू में बाग़-एक-बाहू से निकल कर हम चारो धाम मंदिर देखने गए.

तवी नदी के किनारे स्थित इस मंदिर तक पहुँचने तक बारिश बहुत तेज़ हो चुकी थी. इस मंदिर में चार धाम के दर्शन किए जा सकते हैं -

सबसे पहले नीचे नदी के किनारे रामेश्वरम के दर्शन हम कर सकते हैं. रामेश्वरम की तरह यहाँ बड़ा शिवलिंग हैं और परम्परा के अनुसार राम,सीता, लक्ष्मण तथा हनुमान जी की मूर्तियाँ हैं.

सीढियां चढ़ कर ऊपर जाने पर सबसे पहले द्वारकाधीश का मंदिर हैं. कृष्ण, बलराम और सुभद्रा की पारंपरिक मूर्तियाँ हैं.

इसके बाद बद्रीनाथ के दर्शन होते हैं. इसके आगे केदारनाथ की तरह शिवजी के दर्शन होते हैं.

यहाँ से सीढियां उतर कर नीचे अंडरग्राउंड जाने पर पशुपतिनाथ का मंदिर हैं जो ज़्यादा आकर्षित करता हैं. विशाल नंदी पर बना हैं शिवलिंग.

यहाँ एक विशेष बात देखी. सभी मूर्तियों की पोशाके जम्मू की पारंपरिक पोशाक यानि फिरन थी.

इसके बाद हम रघुनाथ मंदिर देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में....

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बाग़-एक-बाहू

जम्मू में बाग़-एक-बाहू वास्तव में एक किला हैं.

इसमे चार भाग हैं. किला अब किले जैसा नही दीखता, केवल कुछ सीढियां, दीवारे नज़र आती हैं -

दूसरा भाग बाग़ हैं जो आज भी अच्छा ही हैं जिसे देख कर उस दौर के बाग़ का अंदाजा लगाया जा सकता हैं. तीसरा भाग फिश एम्पोरियम हैं जिसमे संग्रह अच्छा हैं, देखने लायक हैं.

काली मंदिर हैं. अन्नपूर्णा मंदिर भी हैं. काली माता की बड़ी पारंपरिक मूर्ति हैं. अन्नपूर्णा मंदिर में जगन्नाथ जी और माँ अन्नपूर्णा की सुन्दर मूर्तियाँ हैं. माँ के हाथ में करछा (बड़ा चम्मच) हैं जिसका मुख्य सिरा जगन्नाथ जी की ओर हैं. मैंने पहली ही बार देखा माँ अन्नपूर्णा का मंदिर.

यहाँ मौसम और भी ठंडा होने लगा था, वैसे भी जम्मू में मौसम ठंडा ही रहा, पर यहाँ बादल छाने लगे, फिर बूँदा-बाँदी फिर तेज़ बारिश होने लगी.

हम आगे बढे चार धाम मंदिर देखने के लिए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में....

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जाम्बवंत गुफा मंदिर

जम्मू की ओर बढ़ते हुए हमने देखा जाम्बवंत गुफा मंदिर.

मंदिर के पास व्यस्त शौपिंग सेंटर होने से प्रवेश द्वार पहचानना कठिन हैं. सामने दाहिने किनारे जो छोटा सा मार्ग नज़र आ रहा हैं वही प्रवेश द्वार हैं -

सीधे सीढियां चढ़ कर ऊपर जाना हैं. ऊपर अहाते में शिव मंदिर हैं. यही से गुफा की ओर जाने का मार्ग हैं. 

सीढियां उतर कर गुफा की ओर जाने पर नीचे रोशनी के बल्ब हैं. यह पहली गुफा हैं जो बाबा अमरनाथ की गुफा कही जाती हैं. यहाँ बर्फानी बाबा हैं. यहाँ शिवलिंग के दर्शन कर हम गुफा में दूसरी ओर बढे.

दूसरी गुफा जाम्बवंत गुफा हैं. यहाँ लगभग बैठ कर चलना हैं. यहाँ जाम्बवंत के दर्शन करने के बाद हम आगे तीसरी गुफा में गए.

तीसरी गुफा नवदुर्गा गुफा हैं. बीच में माँ की बड़ी मूर्ति हैं और दोनों ओर चार-चार मूर्तियाँ हैं. इस तरह माता के सभी आठ रूप हैं. दोनों ओर लगे शीशों में यह मूर्तियाँ दूर तक नज़र आती हैं. 

यहाँ से हम जम्मू पहुंचे जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में.....

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कौल कंडली मंदिर

कटरा से जम्मू आते समय रास्ते में नगरोटा स्थान पर हमने देखा माता कौल कंडली का मंदिर.

वैष्णव देवी की कहानी वास्तव में यही से शुरू होती हैं. प्रथम दर्शन यही किए जाने हैं जिसके लिए वैष्णव देवी की यात्रा जम्मू से शुरू की जानी हैं. लेकिन ज़्यादातर श्रद्धालुओं का ध्यान मुख्य मंदिर की ओर ही होता हैं इसीसे मुख्य दर्शन के बाद लौटते समय कौल कंडली मंदिर जाते हैं.

इस मंदिर के सबंध में मान्यता हैं कि एक बार माता ने अपने भक्त श्रीधर पर प्रसन्न हो उसे दर्शन दिए. दर्शन पाने के बाद श्रीधर ने प्रसन्न हो कर भंडारा किया. इसमे शामिल होने के लिए माता पांच वर्ष की कन्या के रूप में आईं. भंडारे में भैरवनाथ भी अपने शिष्यों के साथ आमंत्रित था. उसने मांस-मदिरा का सेवन करना चाहा. श्रीधर के मना करने पर उत्पात मचाने लगा. जब कन्या रूपी माता ने रोकने की कोशिश की तो भैरवनाथ क्रोधित हो कर उन पर आक्रमण करने उठा. भय से माता पहाडो की ओर दौड़ पड़ी और पहली बार उनके चरण रुके मुड कर भैरवनाथ को देखने के लिए, फिर वही गुफा में वो छिप गई, फिर वही उन्होंने तपस्या की. इस आदिकुमारी मंदिर के बारे में हम पहले बता चुके हैं.

अब चर्चा करते हैं इस मंदिर की. कौल का अर्थ हैं बड़ा कटोरा और कंडली, कुंडल शब्द से बना हैं जिसका अर्थ होता हैं गोलाकार. कन्या रूपी माता ने यहाँ स्थानीय कन्याओं के साथ खेला और सभी कन्याओं को गोलाकार बिठा कर अपने बड़े कटोरे में से भोजन खिलाया. बाद में 11 वर्ष तक माता ने यहाँ तपस्या भी की. माता की इसी जीवन शैली को ध्यान में रख कर यहाँ झूले भी डाले गए हैं जिस पर श्रृद्धालु महिलाएं झूल रही थी.

गुफानुमा गर्भ गृह हैं जिसमे तीनो माताओं की मूर्ति के अलावा पिंडलियाँ भी हैं मुख्य मंदिर की तरह वैष्णव देवी रूप में -

यहाँ दर्शन के लिए गुफा में नीची छत होने के कारण सिर झुका कर जाना पड़ता हैं. इसके अलावा गुफा में जाने से पहले आँचल, दुपट्टे या रूमाल से सिर ढकने का निर्देश हैं.

दूसरी ओर हैं राम मंदिर जहां राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की पारंपरिक मुद्रा में मूर्तियाँ हैं -

यहाँ से हम जम्मू की ओर बढे और देखा जाम्बवंत गुफा मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में....

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कटरा की मार्किट और जम्मू की ओर प्रयाण

कटरा के व्यस्त चौराहे में पूरे क्षेत्र में मार्किट हैं.

जम्मू सरकार की दुकाने भी हैं जहां से कश्मीरी शॉल, साड़ियाँ आदि खरीदे जा सकते हैं. इस राज्य में खरीदने के लिए ख़ास हैं कश्मीरी शॉल, साड़ियाँ और सूखे मेवे. पूरे मार्किट में कतार में सूखे मेवों की दुकाने सजी हैं. सबसे ख़ास हैं अखरोट जिनकी कई किस्मे हैं जिसके दाम 45 रू किलो से लेकर 120 रू किलो तक हैं. यही से प्रसाद की सामग्री के पैकेट भी खरीदे जा सकते हैं जिसमे नारियल के खोल जैसे कटोरे में सूखे मेवे, मुरमुरे और माता के चित्र का चांदीनुमा सिक्का होता हैं.

इसके अलावा एक ख़ास चीज़ यहाँ बिकती हैं - पहाडी लहसुन जो जोड़ों के दर्द के लिए अचूक दवाई मानी जाती हैं. एक्का-दुक्का दुकानों पर हमे लहसुन की तरह ही पहाडी लहसुन नज़र आए. लेकिन दवाई के पहाडी लहसुन सूखे छोटे बीज हैं जो पहाडी लहसुन सुखा कर तैयार किए जाते हैं. इन सख्त बीजों को दो उँगलियों से दबाने से तडाक से छिलका अलग होता हैं. भीतर के छोटे बीज दवाई हैं. सुबह खाली पेट दो बीज बिना चबाए निगल कर गुनगुना पानी पीना चाहिए. माना जाता हैं कि इसे नियमित लेने से जोड़ो का दर्द ख़त्म हो जाता हैं.

यहाँ देश के सभी भागो से पर्यटक आते हैं इसीलिए सभी तरह का भोजन मिलता हैं पर यहाँ का ख़ास हैं राजमा और चावल. यहाँ के चावल बहुत अच्छे हैं छोटे-छोटे बारीक महीन दाने. अन्य शहरों की तरह यहाँ भी फलों की चाट मिलती हैं पर उसमे दो चीज़े ख़ास हैं - पहाडी रतालू और पहाडी मूली, दोनों कुछ ज़्यादा ही लम्बे और मोटे होते हैं पर इनके गोल पतले टुकडे चाट में स्वादिष्ट लगे. सबसे अच्छा लगा यहाँ का पानी जो साफ़ और मीठा हैं. आगे जम्मू में भी खाने-पीने की चीज़े लगभग ऎसी ही थी.

यहाँ से हम निकल कर जम्मू की ओर बढे और राह में देखा माता कौल कंडली का मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में...

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