Archive for चेन्नई

अन्ना स्क्वायर

चेन्नै में अन्ना स्क्वायर से लगभग तीन किलो मीटर का स्थान देखने योग्य है। इस स्थान के एक ओर है अन्ना स्क्वायर और दूसरी ओर है लाइट हाऊज़ जहां से समुद्र के ज़हाज़ो को रोशनी दिखाई जाती है। गुलाबी रंग के इस लाइट हाऊज़ की क्षमता 1000 किलो मीटर की है।  बीच में है मरीना बीच और इसके सामने विभिन्न महत्वपूर्ण स्थल है जिनकी चर्चा हम एक के बाद एक करेंगे। पहले देखते है अन्ना स्क्वायर –

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यहां आगे बढ़ने पर सामने है एम जे आर ( एम जे रामचन्द्रम ) समाधि –

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जिसके बाईं ओर छोटा सा एम जे आर म्यूज़ियम है जिसमें एम जे आर की गतिविधियां दर्शायी  गई है –

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इसके पीछे है तमिलनाङू के इतिहास में सबसे लोकप्रिय नेता ( मुख्यमत्री ) अन्ना दोराई की समाधि जिनके निधन पर पूरा मद्रास ( चेन्नै ) रो पङा था –

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इसके बाद हमने मरीना बीच पर आनन्द लिया जिसके बारे में पुरानी पोस्ट में मैं लिख चुकी जब हम पिछली बार चेन्नै गए थे। बीच के बाद हम विवेकानन्द हाऊज गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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चेन्नै म्यूज़ियम

चेन्नै में म्यूज़ियम ( संग्रहालय ) में मूर्तियां, जन्तुओं के कंकाल और कुछ संरक्षित वनस्पतियां है – पल्लव, काकतीय वंश की मूर्तियां है

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कुछ मूर्तियां विजयनगरम की खुदाई से निकली है।

जन्तुओं के कंकाल में सबसे अधिक आकर्षक है व्हेल ( मछली ) का कंकाल जो कक्ष की छत पर आङा लटकाया गया है। यह विशाल कंकाल पूरी छत को घेरे है। इसके अलावा शुतुरमुर्ग और हथिनि के कंकाल भी आकर्षक है।

वनस्पतियों में विभिन्न बम्बू आकर्षक लगे।

इसके बाद हम अन्ना स्क्वायर गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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क्रोकोडायल बैंक और स्नेक पार्क

चेन्नै में क्रोकोडायल ( मगरमच्छ ) बैंक और स्नेक ( साँप ) पार्क  देखने योग्य है। क्रोकोडायल ( मगरमच्छ ) बैंक में  विश्व की विभिन्न जातियों के मगरमच्छ है –

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चेन्नै में नेशनल पार्क के तीन भाग है – बच्चों के लिए  चिल्डर्न पार्क,  स्नेक ( साँप ) पार्क   और तमिलनाङू के वन विभाग का पार्क। स्नेक ( साँप ) पार्क में विश्व की विभिन्न जातियों के साँप है –

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तांबेल भी है। छोटे तांबेल बहुत आकर्षित करते है –

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इसके अलावा यहाँ कुछ नक़ली जन्तु भी बनाए गए है जैसे दो  साँपों का गले मिलना – साँप मगरमच्छ की लङाई – जो आकर्षक है –

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एक कक्ष में तस्वीरों के साथ विभिन्न जानकारियों से संबंधित बोर्ड लगे है और साथ ही संबंधित वीडियो फिल्में भी दिखाई जाती है।  विशेष बात यह है कि दोनों  जगह इन जन्तुओं से संबंधित जानकारी तमिल, हिन्दी और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में है जिससे पर्यटकों को देखने-समझने में सुविधा होती है –

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इसके बाद हम संग्रहालय देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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गोल्डन बीच – चेन्नै

चेन्नै के गोल्डन बीच के पास निजि सम्पत्ति बनने से यह अलग तरह से विकसित हुआ जिसका उपयोग फिल्म शूटिंग के लिए किया जाता है। यहां मरीना बीच की तरह स्वाभाविक आनन्द नहीं लिया जा सकता लेकिन देखने के लिए यह स्थल बहुत अच्छा है। यह है प्रवेश द्वार –

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भीतर विभिन्न फिल्मी लोकेशन के लिए उपयोगी विभिन्न तरह के स्थल है –

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विभिन्न तरह के झूले –

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पार्क –

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स्तम्भ –

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कलात्मक मूर्तियां –

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कलात्मक ऊंची मूर्तियों का गलियारा –

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अंतिम छोर समुद्र तट है –

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इसके बाद हमने क्रोकोडायल ( मगरमच्छ ) बैंक और स्नेक ( साँप ) पार्क  देखा जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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चेन्नै का अष्ट लक्ष्मी मंदिर

चेन्नै में सबसे पहले हमने देखा समुद्र तट पर स्थित अष्ट लक्ष्मी मंदिर –

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यह है प्रवेश द्वार –

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यहाँ का पूजापा अन्य मंदिरों से अलग है. एक टोकरी में नौ कुछ अधखिले कमल सजा कर रखे मिलते है, लक्ष्मी जी के आठों में से हर रूप के लिए एक कमल और नवां कमल विष्णु जी के लिए –

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इसके साथ दिया-बाती थाली में मिलती है जिसमे नौ दिए होते है –

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सामने मुख्य गर्भ गृह में लक्ष्मी जी की मूर्ति है जिनके पीछे शेष नाग उनकी रक्षा में है. यहाँ से संकरे गलियारे से गुज़रते हुए एक-एक गर्भ गृह में जाना है जिनमे हरेक में एक-एक मूर्ति सभी आठ रूपों वर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी की है –

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हर गर्भ गृह के साथ पूरे मंदिर की कलात्मकता ही इस मंदिर की विशेषता है. इसके बाद हम गोल्डन बीच गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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मदुरै का नयक्कार महल

दक्षिण की पौराणिक नगरी मदुरै में माना जाता है कि नायक वंश का दो सौ वर्षों तक शासन रहा।

यह है नायक वंश के नायको का महल यानि नयक्कार महल -

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यह महल तिरूप्परंकुन्रम मन्दिर से थोड़ी ही दूर पर है। यह महल देखने के लिए 20 रूपए का टिकट है। बताया गया कि यह राशि महल तैयार करने में लगाई जाएगी।

वास्तव में यह मूल भवन नहीं है। मूल भवन तो शत्रुओं के आक्रमणों से नष्ट हो चुका। यहाँ मूल भवन जैसा ही भवन तैयार किया जा रहा है। भीतर हमने देखा काम चल रहा था। कतार में स्तम्भ ही स्तम्भ थे। स्तम्भ तो अच्छे लग रहे थे पर सीमेंट में और पुरानी शिल्पकारी में महाअंतर होता है।

देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कोई शौकीन धनाढ्य अपना आधुनिक महल तैयार कर रहा है। इससे तो अच्छा होता मूल भवन के अवशेष वैसे ही रखते जिसे देखकर कम से कम मूल भवन का अंदाज़ा तो लगता।

यह महल देखने के बाद हम वापस पहुँचे रामेश्वरम बस यात्रा से पामबन पुल से होकर। एक और दिन रामेश्वरम में रूकने के बाद हम हैदराबाद लौट आए।

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मदुरै में कार्तिकेय का तिरूप्परंकुन्रम मन्दिर

मदुरै से 6 मील की दूरी पर है तिरूप्परंकुन्रम मन्दिर।

यह शिव-पार्वती के दूसरे पुत्र यानि गणेश जी के भाई कार्तिक या कार्तिकेय के 6 प्रमुख मन्दिरों में से एक है। इसीलिए यह एक प्रसिद्ध मन्दिर है। कार्तिक को यहाँ सुब्रह्मण्यम या सुब्रह्मण्यम स्वामी कहा जाता है।

यह मन्दिर एक गुफ़ा में है। माना जाता है कि कार्तिक ने शूरपद्मासुर के अस्तित्व को मिटाने के बाद इन्द्र देवता की बेटी देवयानी से यहीं पर विवाह किया था। इसीलिए यहाँ कार्तिकेय नव वर के रूप में दर्शन देते है।

यह है मन्दिर -

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पीछे पहाड़ देखे जा सकते है। प्रवेश पर लम्बा चौड़ा कक्ष है जहाँ 48 स्तम्भ है जो शिल्पकारी का बेजोड़ नमूना है। सामने ही कुछ स्तम्भ नज़र आ रहे है। सामने लगा है पूजा की सामग्री का बाज़ार।

पूजा की सामग्री लेकर हम भीतर पहुँचे। भीड़ बहुत थी। भीड़ के कारण विशेष दर्शन की सुविधा है जिसके लिए प्रति व्यक्ति 50 रूपए देने पड़ते है। हमने भी विशेष दर्शन किए।

गर्भगृह प्रथम माले पर है। शिल्पकारी स्तम्भों को देखते हुए कक्ष के अन्तिम छोर से ऊपर जाने के लिए सीढियाँ है जो पत्थर की बनी है। गर्भगृह में केवल दीपों से उजाला है। सामने शिवजी और पार्वतीजी की अलग-अलग किन्तु पास में मूर्तियाँ है। दाहिने किनारे गणेशजी और बाएँ कार्तिकेय या सुब्रह्मण्यम जी की मूर्ति है। व्यव्स्था ऐसी कि पहले गणेशजी के ही दर्शन हो। सभी मूर्तियाँ विशाल है और पत्थर की बनी है।

यहाँ से दूसरे छोर से बाहर निकलने पर एक और बड़ा कक्ष है। यहाँ मुख्य रूप से विष्णु और दुर्गा की मूर्तियाँ है। इसके अलावा पौराणिक कथाओं पर आधारित चित्र दीवारों पर उकेरे गए है।

यह देखने के बाद हम नयक्कार महल देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में…

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