Archive for चेन्नई

श्री लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर

तमिलनाडू में वेल्लोर ज़िले के श्रीपुरम में है लक्ष्मी जी का एक पुराना मंदिर है –

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इसके सामने है  नया स्वर्ण मन्दिर जिसके बनने के बाद भी इस मन्दिर का प्रभाव कम नहीं हुआ।  यह स्वर्ण मंदिर  विभिन्न नामों से जाना जाता है –

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नारायणी अम्मा मंदिर,  श्री लक्ष्मी नारायणी  स्वर्ण मंदिर, श्रीपुरम गोल्डन टेम्पुल। बाहर बड़ा परिसर है और यहाँ से मंदिर की वास्तविकता का अंदाज़ा भी नही लगाया जा सकता, एक झलक देखिए पीछे दमकता स्वर्ण मन्दिर –

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कैमरा, सेल फोन सभी जमा कर के जांच से गुज़रने के बाद भीतर प्रतीक्षा के तीन कक्ष है जिनसे होते हुए भीतर जाना है. हर कक्ष में अल्पाहार के साथ सभी सुविधाएं है. भीतर भी परिसर बहुत बड़ा है. बीच में हरियाली है और किनारे भी हरे-भरे है और उद्यान बना है. किनारे गलियारों से आगे बढ़ाना है. कलात्मक स्तम्भो से सजे भव्य गलियारे है जिन्हे देख कर दूरदर्शन के रामायण, महाभारत धारावाहिकों के भव्य सेट याद आते है. गलियारों का मार्ग योग शास्त्र में बताए शरीर में स्थित नाड़ियों के मार्ग के अनुसार है इसकी जानकारी एक बोर्ड पर नक्शा बताते हुए दी गई है. ऐसे विभिन्न बोर्ड गलियारों के दोनों ओर है जिन पर सद्विचार लिखे है जो क्रम से तीन भाषाओं में लिखे गए है – तमिल, हिन्दी, अंग्रेज़ी। हर भाषा का अलग बोर्ड है. इनके अलावा लक्ष्मी माँ और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी है. हर गलियारे की समाप्ति पर पौष्टिक बिस्कुट और दूध के स्टॉल सजे है. इन गलियारों से गुज़रते हुए हम बीचों-बीच बने गोलाकार स्वर्ण गर्भ गृह को देख सकते है. बीच से सीधा गर्भ गृह तक एक भव्य मार्ग है जिसमे कलात्मक स्तम्भो पर देवी-देवता के चित्र उकेरे गए है लेकिन इस मार्ग से जाने की मनाही है. गर्भ गृह के निकट पहुँचने पर बाईं ओर एक मंदिर है जिसकी दीवारों पर देवी-देवताओं की कला कृतियाँ है यहीं पर है लक्ष्मी माँ की असली मूर्ती जो सत्तर किलो सोने की बनी है. सामने से स्वर्ण गर्भ गृह की ओर जाना है. यहाँ तक पहुँचने के लिए विकलांगों के लिए एक संक्षिप्त रेलिंग का मार्ग भी है. इस स्वर्णिम गोलाकार गलियारे के चारो ओर चक्कर लगाने के बाद दर्शन के लिए जाना है. मूल गर्भ गृह पानी में है और यह गोलाकार गलियारा किनारे जैसा है. दर्शन होते है लक्ष्मी जी की स्वर्ण भव्य मूर्ती के जो भव्य श्रृंगार से सज्जित है. मूर्ती दूर है लेकिन स्वर्ण पादुका सामने रखी है जिन्हे छू कर आशीर्वाद लिया जा सकता है और चढ़ावे के लिए केवल पैसे ही यहाँ रख सकते है शेष पूजापा पहले ही पुरोहित को दे दिया जाना है. यहाँ दर्शन स्थल पर पुरोहित कुमकुम का पैकेट देते है.  हम शाम के समय गए तब गर्भ गृह का दृश्य बहुत सुन्दर लगा. ढलते सूरज की लाली में दमकते स्वर्ण कलश और स्तम्भ और ढलती शाम के धुंधलके में पानी में झिलमिलाती छवि. यह पूरा गर्भ गृह मूर्ती सहित 1500   टन सोने से बना है. यहाँ संध्या आरती भी हमने देखी। आरती के बाद गर्भ गृह के सामने के मूल मंदिर में गाय को सजा कर तृण खिलाए जा रहे थे. प्रसाद के लड्डू लेकर भव्य गलियारों से बाहरी परिसर में लौटे जहां अन्नपूर्णा गलियारा है. यहाँ मंदिर के कर्मचारी तीरथ देते है, माता के शीर्ष पर रखे गए कलश को श्रृद्धालुओं के शीर्ष पर आशीर्वाद के रूप में रखा जाता है फिर आगे दोने में खिचड़ी का प्रसाद दिया जाता है. इस सुनहरे अवसर का आनद लेकर हम हैदराबाद लौट आए.

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महाबलीपुरम

तमिलनाडू में चेन्नै के बाहर एक छोटा सा गाँव है महाबलीपुरम, जिसका वास्तविक नाम मामलापुरम है –

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जो अपनी कलात्मकता के लिए प्रसिद्द है –

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पहाड़ों को काट कर कलात्मक मंदिर बनाए गए है –

 

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यहाँ का विशेष आकर्षण है कृष्णा बटर बॉल यानि कृष्ण जी का मक्खन का गोला –

 

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यह गोल बड़ा पहाड़ी पत्थर ढलान पर बरसों से टिका है जिसका आधार देखिए बहुत चौड़ा नही है जिसे देख और ढलवा चट्टान को देख कर लगता है यह गुरूत्व केंद्र बल ( ग्रैविटी फ़ोर्स ) का एक अनुपम उदाहरण है.

दो चट्टाने आपस में ऊपर से जुड़ कर गुफा बनाए है, तो कही चट्टानी पत्थर बिखरे पड़े है.

इसका आनंद लेने के बाद हम तमिलनाडू के वेल्लोर ज़िले गए नव निर्मित लोकप्रिय लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर देखने जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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विष्णु कांची मंदिर

कांचीपुरम का विष्णु कांची मंदिर भी प्राचीन मंदिर है –

 

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यहाँ विष्णु बालाजी रूप में है –

 

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विशाल अहाते के एक ओर कुंड है –

 

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जिसके सामने भी एक गर्भगृह है.

इस तरह कांचीपुरम की यात्रा पूरी करने के बाद हम महाबलीपुरम रवाना हुए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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कामाक्षी मंदिर

कांचीपुरम दो ही बातों के लिए मशहूर है – सिल्क की साड़ियां और कांची पीठम शंकराचार्य कामाक्षी  मंदिर।

कामाक्षी मंदिर बहुत पुराना है जो शंकराचार्य द्वारा बनवाया माना जाता है. पार्वती ने कामाक्षी के रूप में जन्म लिया और तपस्या कर इस जन्म में भी शिव को पाया, इसी की स्मृति में है यह मंदिर –
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गोपुरम ( प्रवेश द्वार ) से ही इसके प्राचीन होने का पता चलता है –
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बाहर बाज़ार सजा है जहां पूजापा में ख़ास है माला जो ऊपर की ओर तुलसी बीच में अधखिले कमल और नीचे लाल गुलाब से बनी है. भीतर दाहिनी ओर हाथी है जो गणेश जी के प्रतीक के रूप में श्रृद्धालुओं को आशीर्वाद देता है –
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दाहिनी ओर है स्तम्भ जहां से माता पर चढ़ाया गया कुमकुम लिया जा सकता है और यहाँ दिया भी जलाते है –
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अहाता पार कर गर्भ गृह की ओर जाया जाता है जहां पार्वती की कामाक्षी के रूप में मूर्ती है जो बहुत पीछे है और यहाँ केवल दिये का प्रकाश होता है जिससे बहुत ध्यान से दर्शन करने पड़ते है. अहाते में एक ओर शंकराचार्य का भी मंदिर है.
यहाँ से हम विष्णु कांची मंदिर देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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राजीव गांधी निनावकम

चेन्नै से कांचीपुरम जाते समय रास्ते में है –  राजीव गांधी निनावकम (स्मारक ) . भीतर जाने पर दीवारों पर राजीव गाँधी के जीवन, काम और आदर्शों की जानकारी है. साथ ही उस दुर्घटना का पूरा विवरण है –

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भीतर मैदान हरियाला है.  जिस स्थान पर घटी दुर्घटना में उनके प्राण गए वहीं स्मारक बनाया गया है जिसमे सात स्तम्भ है जो – न्याय, विज्ञान. त्याग, शक्ति, सन्निधि, धर्म, सत्य के प्रतीक है –

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इन स्तम्भों के शीर्ष पर इन आदर्शों के सुनहरे प्रतीक है –

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इन स्तम्भों को बनाने में दुर्घटना स्थल की मिट्टी का उपयोग किया गया जिसमे इस दुर्घटना का शिकार बने नागरिकों का रक्त भी है. बीच में राजीव गांधी की तस्वीर है जो फूलों की पंखुड़ियों और रक्त बिंदुओं को दर्शाती है और यही रखी है वह शिला जिस पर उनका रक्त बहा था –

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पीछे बाहर निकलने के मार्ग पर दीवार पर जल प्लावन है और कलाकृतियों में चेन्नै की कला झलकती है.

यहाँ से हम काँचीपुरम गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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कपालेश्वर मंदिर

चेन्नै का बड़ा मंदिर है कपालेश्वर मंदिर –

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जिस समय हम गए उस समय विदेशी बहुत नज़र आए – इस मंदिर में शिव जी के परिवार के सभी के लिए अलग-अलग गर्भ गृह है. हर गर्भ गृह वास्तव में मंदिर जैसा ही है –

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सबसे पहले सामने ही गणेश मंदिर है –

 

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बीच में कार्तिकेय, फिर गोलाई में पार्वती और शिव मंदिर है. गलियारे में शिव जी के विभिन्न रूपों की मूर्तियां है. मंदिर चिर परिचित दक्षिण भारतीय शैली में ही बना है.

यहाँ से हम कांचीपुरम गए और रास्ते में देखा राजीव गाँधी स्मारक जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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विवेकानन्द हाऊज़

चेन्नै में मरीना बीच के सामने है विवेकानन्द हाऊज़ –

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वर्ष 1897  में इस स्थान पर विवेकानन्द जी 6 से 15 फरवरी तक रूके थे यह जानकारी सामने स्थित विवेकानन्द जी की मूर्ति पर है –

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इस दौर में उनके व्याख्यानों का आयोजन किया गया था। यहां उनके जीवन के महत्वपूर्ण चित्रों की प्रदर्शिनी है जिसमें उनकी विदेश यात्राओं के भी चित्र है –

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एक थ्री डी थियेटर है जिसमें उनके शिकागो के सर्व धर्म सम्मेलन का व्याख्यान है, इस वृत्त चित्र की अवधि 15 मिनट है। इसके पास ही है प्रेसीडेन्सी कॉलेज जहां देश की कई बङी हस्तियों ने शिक्षा पाई जिनमें से एक है पूर्व राष्ट्रपति वी वी गिरि – इसके बाद हमने कपालेश्वर मन्दिर देखा जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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