Archive for गुजरात

स्वामी नारायण मंदिर – द्वारिका

द्वारिका के स्वामी नारायण मंदिर में विष्णु के सभी अवतारों की मूर्तियां है –

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भीतर से बहुत कलात्मक यह मंदिर –

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यहां दर्शन करने के बाद हम गए समुद्र तट और देखा गोमती नदी का समुद्र में विलय। सोमनाथ से जिस गोमती नदी को बहते देखा था जिसके किनारे श्राद्ध तर्पण किए जा रहे थे वही गोमती बहती हुई द्वारिका में आ कर समुद्र में मिलती है.

यह है बहती गोमती, पीछे किनारा देखा जा सकता है जो आगे बढ़ कर पतला होता जा रहा है, यहां पतला होकर किनारा समाप्त हो रहा है और समुद्र में नदी मिल रही है –

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इसके बाद हम गए इस्कॉन स्वामी नारायण मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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गायत्री शक्ति पीठ

गायत्री शक्ति पीठ भी समुद्र तट पर है –

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गर्भगृह में तीन मूर्तियां है – पंचमुखी सावित्री, बीच में मोर पर माँ गायत्री और दाहिनी ओर कुण्डलिनी
अन्य गर्भगृहों में पंचमुखी हनुमान और महादेव भी है.

बाहर तट पर सैर के लिए और कुछ देर बैठने के लिए अच्छी व्यवस्था है.

इसके बाद हम गए गोमती समुद्र संगम और स्वामीनारायण मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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भड़केश्वर महादेव मंदिर

द्वारिका में समुद्र तट पर है – भड़केश्वर महादेव मंदिर

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भीतर गर्भगृह में स्थित शिवलिंग की ही पूजा की जाती है लेकिन बाहरी भाग में भी एक शिवलिंग है जो खुले में समुद्र तट पर मंदिर के आकर्षण को बढ़ाता है –

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इसके बाद हम गए गायत्री शक्ति पीठ जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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गीता मंदिर और सिद्धेश्वर महादेव मंदिर

द्वारका में गीता मंदिर में रथ में कृष्ण की अर्जुन को उपदेश देती छवि है.

इसके बाद हमने देखा सिद्धेश्वर महादेव मंदिर –

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जिसमे गोमुख शिवलिंग के दर्शन होते है.

इसके बाद हम गए भड़केश्वर महादेव मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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गोपी तालाब

पौराणिक कहानियों के अनुसार गोपियाँ तालाब में स्नान और जलक्रीड़ा किया करती थी तब कृष्ण उनके वस्त्र लेकर किनारे कदम्ब के पेड़ पर चढ़ जाया करते थे …. इसी की स्मृति में है – गोपी तालाब –

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यहां छोटा सा तालाब है, किनारे कदम्ब का पेड़ है

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एक छोटा सा मंदिर है जिसमे कृष्ण की मूरत है. यहां छोटा सा बाज़ार सजा है.

यहां से निकल कर हमें जाना था बेट द्वारका जिसे भेंट द्वारका भी कहा जाता है लेकिन हम वहां तक गए नहीं. वहां तक नाव से ही पहुंचना है, वैसे रास्ता 15 – 20 मिनट का ही है लेकिन भीड बहुत थी, तेज़ धूप और खुली नावे थी जिससे हम जा नही पाए, बताया गया कि कृष्ण और सुदामा का एक मंदिर है जहां शासक बनने के बाद कृष्ण से भेट करने आए बाल सखा सुदामा, और सुदामा द्वारा कृष्ण के लिए भेट रूप में लाई गई सत्तू की पोटली और प्रेम से हुए कृष्ण – सुदामा मिलन की झांकी है.

फिर हम द्वारका शहर लौट आए और देखा गीता मंदिर और सिद्धेश्वर महादेव मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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ज्योतिर्लिंग नागेश्वर

गुजरात राज्य में दो ज्योतिर्लिंग है . प्रथम ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ और दूसरा ज्योतिर्लिंग नागेश्वर जो दसवां ज्योतिर्लिंग है

द्वारिका मुख्य शहर से कुछ दूरी पर है – नागेश्वर मंदिर

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यहां गर्भगृह निचले खुले भाग में है और ऊपर से ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने है लेकिन श्रृद्धालु अभिषेक करना चाहे तो नीचे जा कर स्वयं कर सकते है, यहां भी स्वयं पूजा करने की सुविधा श्रृद्धालुओं को दी गई है.
मंदिर परिसर में शिव जी की 85 फीट की प्रतिमा है जो आकर्षण का केंद्र है.

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इसके बाद हम गए गोपी तालाब जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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भालका तीर्थ

सोमनाथ परिसर में समुद्र से कुछ दूरी पर – भालका तीर्थ

पौराणिक मान्यता के अनुसार कृष्ण जी एक पेड़ तले विश्राम कर रहे थे. दूर से कृष्ण जी के केवल चरण दिखाई दे रहे थे, चरण लालिमा से लगा एक पक्षी है और शिकारी ने तीर छोड़ा, तीर सीधे चरण में आ लगा और कारण बना कृष्ण जी के शरीर त्यागने का.
यहां मूर्ति यही कथा कहती है –

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चरण के सामने भील की भी मूर्ति है जो हाथ जोड़े प्रभु से क्षमा याचना कर रहा है.

कहते है कृष्ण जी के शरीर का अंतिम संस्कार हिरण, कपिला और सरस्वती के संगम स्थल पर किया गया जिससे इस संगम को महासंगम कहा जाता है और यह स्थान यानि सोमनाथ परिसर श्राद्ध तर्पण के लिए उचित माना जाता है

इसके बाद हम गए द्वारिका जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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