Archive for कुरूक्षेत्र

कल्पना चावला तारामंडल

कल्पना चावला तारामंडल मे कोई खास बात नज़र नहीं आई –

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20-25 मिनट के शो चलते है। प्रेक्षागृह के चारों ओर तारामंडल, विभिन्न गृहों, आकाशगंगा आदि की तस्वीरे है और विवरण लिखा है।

सिर्फ एक बात खास है, वज़न की मशीन पर चढ़ कर हम इस दुनिया के साथ विभिन्न गृहों में अपना वज़न देख सकते है। अधिकतर लोगों ने और हमने भी यहाँ के साथ-साथ मंगल गृह पर अपना वज़न देखा जो पचास प्रतिशत से भी बहुत कम रहा।

इसके बाद हम देखने गए विज्ञान और कला का संग्रहालय जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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ज्योतिसार तीर्थ

गीता उपदेश की स्मृति में है – ज्योतिसार तीर्थ। यह सरोवर के किनारे है –

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यहाँ बङे वृक्ष की छाँह में छोटा प्राचीन शिव मन्दिर है जिसका ऐतिहासिक महत्व है। इसे विभिन्न आक्रमणों का गवाह माना जाता है और इसमें इसकी क्षति भी हुई। आगे विभिन्न कक्षों में विभिन्न पौराणिक घटनाओं की झलकियाँ है जिसमें कृष्ण, अर्जुन, भीष्म, नारद, दुर्योधन, द्रोणाचार्य, बाल गोपाल आदि की सुन्दर मूर्तियाँ है –

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इसके पीछे समाधि स्थल है। पहली तस्वीर में दिखाई देने वाला सरोवर तट ही है प्रमुख स्थल है। यहाँ विष्णु, दुर्गा, व्यास, गणेश जी के छोटे-छोटे मन्दिर है –

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प्राचीन पेङ है जहाँ लिखा है – गीता उपदेश स्थल –

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यहाँ रथ में अर्जुन और सारथी बने कृष्ण की उपदेश देती झांकी है। यही दृश्य पीछे सुन्दर शिल्पकारी में है-

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पीछे का बङा भाग खुला और हरियाला है।
इसके बाद हमने देखा कल्पना चावला तारामंडल जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ..

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बाण शैय्या मन्दिर

महाभारत युद्ध का एक महत्वपूर्ण बिन्दू है भीष्म पितामह की तीर शैय्या और अर्जुन का तीर मार कर पितामह के लिए पानी निकालना, इसी की स्मृति में है यह बाण शैय्या मन्दिर –
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सामने कुंड है जिसे भीष्म कुंड कहते है –

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गर्भगृह में पांडव, उनके एक ओर कृष्ण और दूसरी ओर द्रौपदी की मूर्तियाँ है और सामने तीर शैय्या पर भीष्म।
एक अन्य गर्भगृह में कृष्ण जी का विराट रूप है। कुंड के दूसरी ओर हनुमान जी की विशाल मूर्ति है।
इसके बाद हमने देखा ज्योतिसार तीर्थ जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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शेख चेहली की मज़ार

कुरुक्षेत्र में दारा शिकोह द्वारा बनवाई गई सूफी संत शेख चेहली की मज़ार –

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यहाँ है मज़ार –

 

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ऊपर बङी छत पर 12 छतरियाँ चारों ओर लगी है –

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और बीच में है यह गुम्बद –

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नीचे गलियारों के पीछे बने कक्षों में पुरातत्व संग्रहालय है जिसमें खुदाईयों से प्राप्त छठी से बारहवीं सदी तक की मूर्तियाँ है –

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जिस तरह से नीचे हरियाली फैली है वैसे ही पीछे का भाग भी हरियाला है –

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इसके बाद हमने देखा बाण गंगा मन्दिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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स्थाण्वीश्वर मंदिर

स्थान है स्थाणेश्वर जिसे थानेसार भी कहते है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार युद्ध से पहले कृष्ण के साथ पांडवों ने शिवपूजन किया था जिसकी स्मृति में है यह स्थाण्वीश्वर मंदिर –
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सामने कुंड है जिसमे शिवजी की मूर्ति है। कुंड के सामने नंदी विराजमान है –
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विभिन्न गर्भगृहों में विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ है। तीन गर्भगृह ऐसे है जो कम मन्दिरों में होते है – संतोषी माता, कृष्ण विराट रूप और अन्नपूर्णा मन्दिर।
इसके बाद हम शेख चेहली की मज़ार पर गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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देवीकूप शक्तिपीठ

कुरूक्षेत्र का देवीकूप भद्रकाली मन्दिर एक शक्तिपीठ है –

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पौराणिक मान्यता के अनुसार सती के शरीर के अंग जहाँ-जहाँ गिरे वहाँ शक्ति पीठ बना। माना जाता है यहाँ सती का दाहिना टखना गिरा था। द्वार में भीतर जाते ही सामने कमल की शिल्पकारी दिखाई देती है –

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जिसके बीचों-बीच दाहिने टखने का शिल्प है –

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सामने गर्भगृह में देवी माँ के दर्शन होते है। कमल से बाईं ओर सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर जाने पर गुफा में शिव लिंग के दर्शन होते है जिसके लिए गुफा के छोटे द्वार से बैठे-बैठे भीतर जाना है, भीतर छत ऊँची है, दर्शन के बाद बाहर आने का द्वार माता की सवारी शेर के मुँह जैसा है  –

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बाहर विभिन्न पौराणिक झलकियाँ है –

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खुले में ध्वज लहराते है –

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मन्दिर के अहाते में एक विशेष बात देखी, कन्या भ्रूण हत्या रोको जैसे सामाजिक संदेश के पोस्टर लगे थे, आमतौर पर मन्दिरों में ऐसे पोस्टर नहीं होते है।

यहाँ से हम गए स्थाण्वीश्वर मन्दिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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श्रीनाथ मन्दिर

कुरूक्षेत्र में सबसे पहले हमने देखा श्रीनाथ मन्दिर दरगाह मुखङ जो हनुमान जी का मन्दिर है जिसमें पंचमुखी हनुमान है –
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विभिन्न देवी-देवताओं की पारम्परिक मुद्रा में मूर्तियाँ भी विभिन्न गर्भों में है। इसके अलावा साईंबाबा की मूर्ति भी है जिसमें बाबा का बङे बर्तन में खिचङी तैयार करता रूप है।
इसके बाद हमने देखा शक्तिपीठ देवीकूप मन्दिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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