Archive for कुरूक्षेत्र

सूर्य कुंड

महाभारत की कथा के अनुसार युद्ध में भाइयों के एक के बाद एक वीर गति को प्राप्त होने के बाद दुर्योधन पानी में छिप गया था जिसकी स्मृति में बना है यह कुंड जिसे सूर्य कुंड कहते है और दुर्योधन की यह मुद्धा, लोप मुद्रा कहलाती है

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इस कुंड के किनारे है लक्ष्मीनारायण मन्दिर –

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जिसमें लक्ष्मीनारायण के अलावा विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी है। यहाँ श्रृाद्ध कर्म भी करवाए जाते है। इसके बाद हम गए अमृतसर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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कर्ण मन्दिर

पौराणिक कथा के अनुसार ब्राह्मण वेश में कृष्ण ने कर्ण से स्वर्ण दंत मांगा, इसी की स्मृति में है यह – कर्ण मन्दिर
लेकिन यह पौराणिक दृश्य शिल्पकारी से दिखाया गया है जो मन्दिर के प्रांगण में है, बहुत सुन्दर मूर्तियाँ है। गर्भगृह में राधाकृष्ण, हनुमान की मूर्तियाँ है।
प्रांगण में दूसरी ओर गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, वैष्णोदेवी गुफा के सुन्दर मॉडल है –

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इसके बाद हमने देखा सूर्य कुंड जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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ब्रह्म सरोवर

ब्रह्म सरोवर जो वास्तव में यमुना नदी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार और कुछ ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर माना जाता है कि यहाँ सरस्वती नदी थी जो लुप्त हो गई –

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महाभारत के युद्ध के पश्चात पांडवों ने पवित्र स्नान किया था जिसकी स्मृति में इस पुल पर बना है कात्यायनी मन्दिर –

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जिसमें हनुमान, राधा कृष्ण, पार्थ सारथी जैसे विभिन्न देवी-देवताओं के विभिन्न स्वरूपों की मूर्तियाँ है. पीछे बङे भूभाग में पार्थ सारथी का सुन्दर शिल्प बना है –

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आगे है द्रौपदी मन्दिर –

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यहाँ गर्भगृह में मुख्य मूर्ति खाटू श्याम ( बरबराक ) की है जिसके एक ओर माँ दुर्गा की मूर्ति है दूसरी ओर दाहिने हाथ मे सुदर्शन चक्र लिए कृष्ण है जिनके बाएं पार्श्व में अंगवस्त्र थामे द्रौपदी है, द्रौपदी का बायाँ हाथ आगे है जिस पर श्रृद्धालु साङी रखते है। श्रृद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई साङियों का ढ़ेर लगा था। यहाँ पुरोहित महिला है।

गर्भ गृह के पास सीढ़ियों से उतर कर नीचे जाने पर है द्रौपदी कूप. दुःशासन की छाती का लहू भीम से लेकर द्रौपदी ने अपने केश धोए थे जिसकी स्मृति में कुएँ के पास पत्थर कुछ लालीपन लिए है –

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कुआँ सूखा है जिसमें श्रृद्धालु सिक्के डलते है.

इसके बाद हमने देखा कर्ण मन्दिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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बिरला मन्दिर – कुरूक्षेत्र

कुरूक्षेत्र का बिरला मन्दिर कुछ खास नहीं है। मन्दिर भी छोटा सा ही है –

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गर्भगृह मेंं सुदर्शन चक्र लिए कृष्ण की मूर्ति है। बाहर हरियाले भाग में कुछ ऊँचाई पर है पार्थ सारथी शिल्प –

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इसके बाद हम पहुँचे ब्रह्म सरोवर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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कौरव पांडव मंदिर

कौरव पांडव मंदिर नाम से लोकप्रिय है – डेरा बाबा श्रवण नाथ जी लक्ष्मीनारायण कौरव पांडव मंदिर जो कौरव-पांडव परिवार की स्मृति में है –

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यहां का मुख्य आकर्षण है पुराना बङा तवा जिस पर एक से अधिक रोटियाँ सेकी जा सकती है –

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मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी की मूर्ति है। अन्य दो गर्भगृह कौरवों पांडवों के है जिनमें से एक में द्रौपदी के साथ पांडव और दूसरे गर्भगृह में दुृःशासन, दुर्योधन, द्रोणाचार्य, कर्ण, शकुनी की मूर्तियाँ है।

इसके बाद हमने देखा बिरला मन्दिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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संग्रहालय

कुरूक्षेत्र के संग्रहालय में सबसे अधिक आकर्षक है पहले तल पर स्थित पैनोरमा जिसमें गोलाई में घूम कर थ्री डी तकनीक से तैयार महाभारत युद्ध की झलकियाँ देखी जा सकती है। हर झलकी के सामने विवरण लिखा है –

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अगली इमारत कृष्ण संग्रहालय है –

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यहाँ मॉडल, चित्रकारी, शिल्पकारी से कृष्ण के जीवन की महत्वपूर्ण झलकियाँ दिखाई गई है। बहुत बङी वासुदेव की मूर्ति भी है जहाँ सीडी चलाकर आगंतुको को गीता का संदेश सुनाया जाता है। यह मूर्ति निचले तल से दूसरे तल तक है।

इसके अलावा एक विशिष्ट बङे हाल में बेहतरीन तकनीक का प्रयोग करते हुए नायक कृष्ण की विभिन्न झलकियाँ है जिसका आनन्द लेते हुए अंतिम छोर पर पहुँच कर भूलभूलैया से बाहर निकला जाता है जिसकी दीवारों पर भी संदेश है।

आधुनिक तकनीक से पौराणिक काल को जीवन्त देखने का अद् भुत अनुभव लेकर हम वहाँ से निकले जिसके बाद हमने देखा कौरव पांडव मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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कुरूक्षेत्र का संग्रहालय

कुरूक्षेत्र का संग्रहालय वाकई विज्ञान, खासकर तकनीक और कला का बेजोङ उदाहरण है।

एक ईमारत विज्ञान और तकनीक की है। निचले तल पर रसायन और भौतिकी के पुराने मॉडल है जैसे रसशाला में विभिन्न द्रव्य तैयार करना। विभिन्न तराज़ू, विभिन्न दर्पण जिसमें मोटे, नाटे, लम्बे, एक साथ अधिक अक्स दिखाई देते है –

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पुराने ज़माने में की जाने वाली खुली शल्य चिकित्सा की भी झलक है।

इसके बाद पहले तल पर हमने देखा पैनोरमा जिसमें आधुनिक तकनीक से महाभारत युद्ध की जीवन्त झलकियाँ देखी जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….

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