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नव वर्ष का स्वागत कड़वे घूँट से

नव वर्ष संवत 2065 का स्वागत है !

नव वर्ष का आरंभ यानि चैत्र मास का पहला दिन - उगादी या युगादी। यह दिन हमारे देश में अलग-अलग संस्कृतियों में भिन्न-भिन्न ढंगों से मनाया जाता है।

हमारे यहाँ इस दिन का स्वागत कड़वे घूँट से किया जाता है। सबसे पहले नीम का रस पिया जाता है। इस मौसम में नीम में फूल भी आते है और कोमल पत्ते भी आते है। कुछ लोग इसके कोमल पत्ते चबाते भी है।

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यह तो सभी जानते है कि नीम एक अच्छी औषधि है। नीम की पत्तियों और फूलों का रस पीने से रक्त शुद्ध होता है और त्वचा के रोग नहीं होते।

इसका वैज्ञानिक नाम एज़ाडिरैक्टा इन्डिका है। पेड़ के सभी भागों तना, पत्ते, फूल सभी में एज़ाडिरेसिटिन नामक पदार्थ होता है जो एक जटिल यौगिक है जिससे इसका स्वाद कड़वा होता है।

पहले ही दिन कड़वा घूँट पीने का अर्थ है कि जीवन सिर्फ़ मीठा ही नहीं है अनेक कड़वे अनुभव भी होते है जिन्हें झेलने के लिए हमें तैयार रहना है। इस तरह हम मानसिक रूप से दुःखों का सामना करने के लिए तैयार रहेंगें और नीम का रस पीकर हम निरोग भी रहेंगें।

यह बात तो बहुतों को पता होगी कि नीम की पत्तियों का ढेर जलाने से मच्छर दूर भागते है। खेतों में कीटों को दूर भगाने के लिए नीम के पत्तों को जलाया जाता है। हमारे घर से भी कीट दूर रहे और घर में सबका स्वास्थ्य अच्छा रहे इसीलिए घर के मुख्य द्वार पर दोनों किनारों पर नीम की डालियां लगाई जाती है।

इस दिन का दूसरा महत्वपूर्ण फल है आम विशेषकर कच्चा आम जिसे कैरी कहते है। इस समय पेड़ों पर कैरियां लदी होती है।

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100 ग्राम आम में लवण 05 विटामिन ए 11 विटामिन सी 37 मिली ग्राम होता है। इसमें रेशा बहुत होता है। शक्कर भी अधिक होती है जिससे मीठापन और कुछ अम्ल होता है जिससे थोड़ा सा खट्टापन रहता है।

आम का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। कच्चे आम यानि कैरी में खट्टापन अधिक होता है और साथ ही कुछ फीकापन भी होता है। जैसे जीवन में खट्टे अनुभव भी होते है और कभी-कभी जीवन में फीकापन भी आता है। लेकिन जीवन में हमें मिठास घोलनी है। इसीलिए इस दिन की मिठाई भी कुछ ऐसी ही होती है।

कैरी के टुकड़ों को सूजी (रवा) के साथ भून कर पकाया जाता है फिर इसमें शक्कर मिलायी जाती है। यह मिठाई तो है पर इसमें खट्टा और फीकापन भी है जिसे खा कर हमें साल भर यह याद रखना है कि जीवन सिर्फ़ मीठा नहीं है।

आम का वृक्ष हमारी संस्कृति में भी महत्वपूर्ण है। इस दिन घर की सजावट के लिए द्वार पर आम के पत्तों के वन्दनवार लगाए जाते है।

इस दिन की तीसरी महत्वपूर्ण चीज़ है इमली। इमली का वैज्ञानिक नाम टैमरिन्डस इन्डिका है। 100 ग्राम इमली में कैल्शियम 101 आयरन 030 और विटामिन सी 3 मिली ग्राम तथा कैरोटीन 250 म्यूग्राम होता है। इसमें अम्ल अधिक होने से अधिक खट्टापन होता है।

इस मौसम में पेड़ों से लटकती इमलियों को तोड़ कर सुखाया जाता है। यह नई ईमली खट्टी मीठी होती है।

ईमली को पानी में भिगो कर कुछ देर बाद मसल कर छान लिया जाता है। इस रस में नीम के फूल, कैरी के बारीक टुकड़े और गुड़ मिलाया जाता है जिसे कहते है पछड़ी या पछड़म। इसका स्वाद मिश्रित होता है जैसे कि हमारा जीवन है खट्टा, मीठा, फीका और कड़वा

आप सबको नव वर्ष की शुभकामनाएं

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शिव और नन्दी

हे नटराज ! गंगाधर शंभो भोलेनाथ जय हो !

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जय-जय-जय विश्वनाथ जय-जय कैलाशनाथ
हे शिव शंकर तुम्हारी जय हो !

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हे दयानिधान ! गौरीनाथ चन्द्रभान अंगभस्म ज्ञानमाल
मैं रहूं सदा शरण तुम्हारी जय हो !

यह शिव स्तुति गान महेन्द्र कपूर और कमल बारोट ने फ़िल्म संगीत सम्राट तानसेन के लिए किया है।

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