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गणेश पूजन व्रत के आहार में तोम्मी कूरा

कूरा तेलुगु भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है – सब्जी।

यह हरी पत्तेदार सब्जी हैं जिसे यहाँ हैदराबाद में तोम्मी कूरा कहते हैं। अन्य शहरों में क्या कहते हैं, मुझे पता नहीं हैं। वनस्पति विज्ञान के अंतर्गत इसकी जानकारी भी मुझे नही मिली। यह तस्वीर देखिए शायद आप पहचान जाए –

 

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डंठल पर पत्ते लगे होते हैं, कही-कहीं छोटे सफ़ेद फूल भी नजर आते हैं –

 

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सब्जी पत्तों की बनती हैं –

 

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यह सब्जी सिर्फ गणेश चतुर्थी के समय ही मिलती हैं।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि इस समय बारिश के मौसम के कारण विभिन्न तरह के जंगली फूल-पत्ते उग आते हैं। इनमे कागज़ के फूल भी होते हैं, ऑक के फूल और फल भी होते हैं, इसके अलावा और भी तरह के पत्ते होते हैं जिन्हें हम जंगली पत्ते कहते हैं पर उनके नाम नही जानते। इन्ही सब पत्ते फूलो को गणपति की मूर्ति पर पूजा के समय चढ़ाया जाता हैं।

इस तरह के तरह-तरह के पत्ते-फूल केवल इस पूजा के समय ही नजर आते हैं। साल भर में केवल एक ही बार। अन्य किसी भी समय गणेश जी की पूजा सामान्य फूलो से ही होती हैं।

इससे यह स्पष्ट होता हैं कि यह बारिश का मौसम होता हैं। ऐसे में गीली मिट्टी में तरह-तरह की घास उग आती हैं। यह पत्ते ज्यादा बारिश के बाद उग आने वाली घास के होने से केवल इसी समय मिलते हैं।

आमतौर पर घास के पत्तो को मानव आहार के लिए अपोषकीय माना जाता हैं और यह पशुओं का चारा होता हैं। ऐसे में तोम्मी कूरा ऎसी घास हैं जो मानव के लिए आहार हैं।

जिस तरह पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन गणेश पूजा जंगली फूल पत्तो से करने का प्रावधान हैं उसी तरह भोजन के लिए भी जंगली घास का प्रावधान हैं, तोम्मी कूरा ऎसी ही घास होने से गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी के व्रत के भोजन में खाई जाती हैं। चूंकि यह सामान्य पत्तेदार सब्जी नही हैं, इसीलिए इसे बनाने की विधि भी अलग हैं।

सामग्री हैं – एक किलो तोम्मी कूरा (यह डंठल के साथ होती हैं इसीसे एक किलो में अधिक मात्रा होती हैं पर पत्तियाँ निकालने पर मात्रा बहुत कम हो जाती हैं), 250 ग्राम कच्ची इमली, 10-12 हरी मिर्चे, थोड़ा सा घी, एक-चौथाई चम्मच जीरे के दाने, स्वाद के अनुसार नमक। वैसे बाजार में तोम्मी कूरा, कच्ची इमली और हरी मिर्च एक साथ बिकती हैं।

विधि – इसे बनाना बहुत आसान हैं। कच्ची इमली को पानी में उबाल ले। फिर छान ले। इस खट्टे पानी में बारीक कटे पत्तों को हरी मिर्च के साथ पका ले। जब पक जाए तब छौंक लगा दे जिसके लिए घी गरम कर उसमे जीरा डाले। छौंकने के बाद नमक मिला दे। सब्जी तैयार हैं।

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दुर्गा पूजा पंडाल

दुर्गा पूजा पंडाल में सजी है पांच मूर्तियाँ – बीच में शेरां वाली दुर्गा जिनके दाहिनी ओर हंस पर सरस्वती, बाई ओर अपने वाहन उलूक के साथ लक्ष्मी जिनके पार्श्व में मूषक के साथ गणेश और सरस्वती के पार्श्व में अपने वाहन मोर के साथ कार्तिकेय –

माँ दुर्गा –

पांचो मूर्तियों के नीचे सामने कलश –

आप सबको नवरात्री की शुभकामनाएं !

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नव वर्ष उगादी पर मुँह मीठा कीजिए गल्बाना से

आप सबको उगादी की शुभकामनाएँ !

नव वर्ष संवत 2066 का स्वागत है !

नव वर्ष उगादी के अवसर पर हमारे यहाँ मिष्ठान्न में गल्बाना बनाया जाता है। शायद बहुतों ने गल्बाना शब्द सुना भी नहीं होगा और शायद इसके स्वाद का भी अंदाज़ा नहीं होगा। तो चलिए, हम बताते है गल्बाना बनाना।

सामग्री - एक मध्यम आकार का कच्चा आम या कैरी, 100 ग्राम रवा या सूजी, 25 ग्राम शक्कर, एक बड़ा चम्मच घी, एक-एक छोटा चम्मच इलाइची पाउडर, चिरौंजी और किशमिश

बनाने की विधि - कैरी के छिलके के साथ लम्बे पतले टुकड़े काट लीजिए। इन टुकड़ों को रवा यानि सूजी के साथ घी में भून लीजिए। भूनते समय लगातार चम्मच चलाते रहिए। सुनहरा होने तक भूने। फिर 4 गिलास पानी मिलाकर पकने रखिए। इसमें शक्कर भी मिला दीजिए। कैरी के टुकड़े अच्छी तरह गलने और सूजी और शक्कर के साथ अच्छी तरह घुलने मिलने तक पकाइए। कुछ टुकड़े पूरी तरह नहीं गलते और लच्छे जैसे रह जाते है, इन्हें ऐसे ही रहने दीजिए। इस तरह क्रीम रंग का गाढा रस तैयार हो जाएगा। अब आँच से उतार लीजिए और इलाइची पाउडर, चिरौंजी और किशमिश ऊपर से बिखरा दीजिए। लीजिए तैयार है गल्बाना -

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इसे चाहे तो गरमागरम पूरियों के साथ खाइए -

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या कटोरी में लेकर ऐसे ही भी खाया जा सकता है। इसे गरमागरम भी खाया जा सकता है और ठण्डा भी खाया जा सकता है, दोनों ही तरह से स्वादिष्ट रहेगा। हाँ इसका स्वाद खटमिठ होता है पर इसे मिष्ठान्न ही मानते है।

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