भक्त कवि तुलसीदास

आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी है. आज ही के दिन पन्द्रहवीं शताब्दी में तुलसीदास जी का जन्म हुआ था.

तुलसीदास मूल रूप से राम भक्त है. राम की कथा को ही अपनी बोली अवधि में विभिन्न ढंग से ढाला, एक भक्त के रूप में अपने आराध्य राम का गुणगान किया. इन सभी रचनाओं के माध्यम से राम की महिमा जन-जन तक पहुँची जिनमे सर्वाधिक लोकप्रिय है रामचरित मानस जिसमे राम की पूरी कथा है. वैसे तुलसी के भजन भी बहुत लोकप्रिय है.

वाल्मिकी रचित रामायण भाषा के कारण सर्वसाधारण तक नही पहुँच पाई, यह काम रामचरित मानस ने किया। यह स्पष्ट हो गया कि भक्त तुलसी अपने ईष्ट देव राम की महिमा के बखान के लिए ग्रन्थ रचते रहे. जनता अपनी बोली में पढ़ती रही और ये ग्रन्थ साहित्य की श्रेणी में आ गए यानि एक भक्त के भाव शब्दों में ढले और पाठकों ने भक्त को कवि बना दिया।

महाकाव्य रामचरित मानस और दोहो चौपाइयों की संख्या और इनकी लोकप्रियता के कारण ही अवधि बोली को भाषा का दर्जा मिला। साहित्य के क्षेत्र में यह अक्सर चर्चा का विषय रहा कि अवधि बोली है या भाषा और उत्तर यही रहा कि अन्य रचयिताओं से परे केवल तुलसी की ही रचनाएँ अवधि को बोली से भाषा का दर्जा दिलाने के लिए पर्याप्त है. 

रामचरित मानस में राम की कथा को इस तरह से प्रस्तुत किया कि राम का चरित्र मर्यादा पुरूषोत्तम बन कर उभरा यानि जो पुरूषों में सर्वोत्तम है और हर क्षेत्र में मर्यादा बनाए रखते है अर्थात जिसके चरित्र में कोई नकारात्मक गुण नही, ऐसा चरित्र प्रस्तुत कर समाज के सामने ऊँचे आदर्श ऊँचे जीवन मूल्य रखे और साहित्य में एक बोली को भाषा के स्तर तक ले गए, इन दो अनुपम योगदानों से समाज और साहित्य में विशिष्ट स्थान रखने वाले तुलसी को शत-शत नमन !

तुलसी ने अपनी देह त्यागी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को सोलहवीं शताब्दी में लेकिन अपने योगदानों से तुलसी चिरंजीवी है.

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