गोपी तालाब

पौराणिक कहानियों के अनुसार गोपियाँ तालाब में स्नान और जलक्रीड़ा किया करती थी तब कृष्ण उनके वस्त्र लेकर किनारे कदम्ब के पेड़ पर चढ़ जाया करते थे …. इसी की स्मृति में है – गोपी तालाब –

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यहां छोटा सा तालाब है, किनारे कदम्ब का पेड़ है

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एक छोटा सा मंदिर है जिसमे कृष्ण की मूरत है. यहां छोटा सा बाज़ार सजा है.

यहां से निकल कर हमें जाना था बेट द्वारका जिसे भेंट द्वारका भी कहा जाता है लेकिन हम वहां तक गए नहीं. वहां तक नाव से ही पहुंचना है, वैसे रास्ता 15 – 20 मिनट का ही है लेकिन भीड बहुत थी, तेज़ धूप और खुली नावे थी जिससे हम जा नही पाए, बताया गया कि कृष्ण और सुदामा का एक मंदिर है जहां शासक बनने के बाद कृष्ण से भेट करने आए बाल सखा सुदामा, और सुदामा द्वारा कृष्ण के लिए भेट रूप में लाई गई सत्तू की पोटली और प्रेम से हुए कृष्ण – सुदामा मिलन की झांकी है.

फिर हम द्वारका शहर लौट आए और देखा गीता मंदिर और सिद्धेश्वर महादेव मंदिर जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में …

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