गुलशन नन्दा की फिल्में – पत्थर के सनम

निर्मोही – उपन्यास पर बनी है फिल्म – पत्थर के सनम

बहुत लोकप्रिय रही यह फिल्म हालांकि इसमें अंत बदल दिया गया। स्टेट मैनेजर की नौकरी पर आए राजेश ( मनोज कुमार ) से शहर से पढ़ कर आई स्टेट के मालिक की बेटी मीना ( मुमताज़) और उसकी गांव की सहेली तरूणा ( वहीदा रहमान ) को प्यार का मज़ाक करते-करते वास्तव में प्यार हो जाता है. मीना का चरित्र उपन्यास में नकारात्मक है वह अमीरी के बल पर अपना प्यार पाना चाहती है. मैनेजर प्यार की परीक्षा लेने अंधेपन का ढोंग करता है और तरूणा परीक्षा में खरी उतरती है, उसे अंधा पति भी स्वीकार है. लेकिन फिल्म में मीना के चरित्र को बाद में अच्छा बताया है। समानान्तर कहानियां भी है और ऐसी ही घटना के चलते मीना को गोली लगती है और उसकी मृत्यु हो जाती है। यह बदलाव भी अच्छा लगा।

फिल्म और उपन्यास दोनों लोकप्रिय रहे। इसके सभी गीत लोकप्रिय है।

अगले चिट्ठे में एक और फिल्म की चर्चा …..

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1 टिप्पणी »

  1. बहुत बढ़िया AchhiBaatein.com – Hindi blog for Famous Quotes and thoughts, Motivational & Inspirational Hindi Stories, Chanakya Niti, Samanya Gyan, Health Tips, Jokes and Personality Development Tips

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