स्मृति शेष – शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय

आज जाने-माने साहित्यकार शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय  का जन्मदिवस हैं।

आज ही के दिन 1876 में उनका जन्म हुआ था। शरत बाबू नाम से लोकप्रिय  बंगला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय  की रचनाओं का लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद होने से उन्हें केवल बंगला भाषा का साहित्यकार न मान कर भारतीय साहित्यकार ही माना जाता हैं।

उंनकी कहानियों उपन्यासों पर विभिन्न भाषाओं में फिल्मे भी बनी। उनका सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यास हैं – देवदास – जिसका विषय ही अलग हैं, आमतौर पर विरह पीड़ा नायिकाओं की बताई जाती हैं पर देवदास में नायक की पीड़ा चित्रित हैं। हिन्दी में देवदास पर फिल्म तीन बार अलग-अलग दौर में बनी – पहली बार कुंदनलाल ( के एल ) सहगल, दूसरी बार दिलीप कुमार और तीसरी बार शाहरूख खान ने देवदास की भूमिका निभाई जिससे लगभग हर पीढ़ी ने देवदास को जाना।

देवदास की तरह ही उनकी रचना परिणीता पर भी तीन बार अलग-अलग दौर में फिल्मे बनी लेकिन एक बार भी इसे देवदास की तरह सफलता नही मिली। लेकिन परिणीता का रेडियो नाट्य रूपांतर भी तैयार किया गया जो बहुत लोकप्रिय रहा पर देवदास पर रेडियो नाटक मैंने कभी नहीं सुना। परिणीता से मेरा परिचय रेडियो नाट्य रूपांतर से ही हुआ जिसे मैंने विविध भारती से हवामहल में धारावाहिक के रूप में सुना। पहली बार सुना तो बहुत अच्छा लगा था, इसके बाद दो-तीन बार प्रसारण सुना और हर बार पहली बार की तरह ही अच्छा लगा। बाद में पता चला परिणीता शरत चन्द्र की लम्बी कहानी है या इसे लघु उपन्यास भी कह सकते हैं जिसे मैंने एम ए की पढाई के दौरान पढ़ा।  परिणीता फिल्म बंगला में बहुत लोकप्रिय हुई थी, मौसमी चटर्जी के करिअर की यह दूसरी फिल्म थी,  पहली फिल्म बालिका वधू की अपार सफलता के बाद यह उनकी दूसरी लोकप्रिय फिल्म रही। लेकिन हिन्दी में  इन फिल्मो को लोकप्रियता नहीं मिली जिसका कारण शायद नायिकाओं की उमर रही हो।

अपने मामा के यहाँ पली-बढ़ी अनाथ लड़की ललिता और ज़मींदार के बेटे शेखर दा की प्रेम कहानी हैं परिणीता जिसमे शरत बाबू की नायिका ललिता कच्ची उमर की हैं। मौसमी चटर्जी ने अपना करिअर कच्ची उमर से ही शुरू किया था। लेकिन हिन्दी की तीनो नायिकाएं कच्ची उमर की नही थी …. पहली बार यह फिल्म बनी थी परिणीता नाम से जिसमे मीनाकुमारी और अशोक कुमार हैं, दूसरी बार फिल्म संकोच नाम से सत्तर के दशक में बनी जिसमे सुलक्षणा पंडित और जितेन्द्र हैं, तीसरी बार कुछ ही वर्षो पहले परिणीता नाम से ही फिल्म बनी लेकिन इस बार कहानी वही रखी गई पर परिवेश आधुनिक रखा गया जिसमे सैफ अली खान और विद्या बालन हैं। शायद इन्ही बदलाओं से फिल्मे नही चली।

शरतचंद्र के साहित्य पर, फिल्मो पर कुछ और चर्चा फिर कभी ….. हमारे देश के गौरवशाली साहित्यकार को सादर नमन !

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