कुछ लोकप्रिय फिल्मे …. और शख्सियत एक – गुलशन नंदा

पिछली पोस्ट में मैंने चर्चा की थी कि जिनकी अधिकाँश फिल्मे बहुत लोकप्रिय रही, वह शख्सियत न निर्माता-निर्देशक है न ही संगीत पक्ष से उनका सम्बन्ध है और न ही अभिनय क्षेत्र से  …  आप है लेखक – गुलशन नंदा

जो मूल रूप से उपन्यासकार है जिनके उपन्यासों पर लोकप्रिय फिल्मे बनी. युवा वर्ग के चहेते सामाजिक रोमांटिक उपन्यास लिखने वाले गुलशन नंदा के बारे में मैंने जितना पढा – सुना वही जानकारी यहां दे रही हूँ

निवास स्थान की जानकारी नही है, यह जानकारी है कि यह कोई बड़ा शहर नही है. बचपन से ही क़िस्से-कहानियां अच्छी लगती थी. युवावस्था में पैर रखते ही एक कहानी लिखी जो समाप्त होते-होते सौ पृष्ठों का उपन्यास बन गई. यह अच्छी है या नही इस पर दूसरों की राय लेनी थी जिसके लिए इन सौ पृष्ठों के उपन्यास की तीन-चार प्रतियां हाथ से लिख कर तैयार की और दोस्तों को दी. शहर छोटा सा था, रात में जल्द ही सुनसान हो जाता था. नौ बजे साइकिल लेकर चल पड़े. एक दोस्त के घर के पास जाकर देखा, ऊपर उसके कमरे में रोशनी थी, लगा वह उपन्यास पढ़ रहा है. ऎसी ही रोशनी अन्य दोस्तों के घरों में देख अंदाज़ा लगा लिया और अगले दिन सबने कहा बहुत रोचक उपन्यास है.

चल पड़ा सिलसिला लिखने का. प्रकाशन में पहले कठिनाइयाँ आई लेकिन आगे पॉकेट बुक्स के रूप में छपने लगे. पहला ही उपन्यास सामाजिक-रोमांटिक था जो कौन सा है, छपा या नही इसकी जानकारी भी नही है आगे के भी सभी उपन्यास सामाजिक-रोमांटिक रहे. वैसे इन सभी उपन्यासों को रोमांटिक ही माना गया. एक के बाद एक उपन्यास लोकप्रिय होते गए. फिर शुरू हुआ फिल्मी सफर.

लोकप्रिय उपन्यासों पर फिल्मे बनने लगी. यह महत्वपूर्ण बात रही कि उपन्यास पढने के बाद दर्शक उस पर बनी फिल्म भी देखना पसंद करने लगे.  लेकिन इस लोकप्रिय उपन्यासकार को साहित्य जगत में स्थान नही मिला। साहित्यकार कहते – कौन है यह गुलशन नंदा  …. यह पॉकेट बुक्स युवा पीढी को बिगाड़ रहे है. कहा जाता है एक बार एक महानगर में साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों की एक पार्टी थी जहां शीर्ष साहित्यकार पधारे थे. इस पार्टी के लिए कही से निमंत्रण गुलशन नंदा को भी मिला था. साहित्य के क्षेत्र में उन्हें पसंद नही किया जाता, यह जानते हुए भी गुलशन नंदा उस पार्टी में गए. जैसा कि अनुमान था सब के चेहरों पर नापसंदगी की झलक नज़र आ रही थी और तभी उनको लेकर हो रही खुसर-फुसर सीधे छीटाकशी पर आ गई. उनकी उपस्थिति पर पार्टी में बहुत हंगामा हुआ, बहुत अपमान हुआ, युवा पीढी को बिगाड़ने का दोष लगा. अब गुलशन नंदा भी चुप नही रह सके, कहा कि जिस साहित्य का आप लोग दम भरते है वो साहित्यिक पुस्तके पढ़ते कितने लोग है  जबकि  कॉलेज जाने वाले युवा लङके-लङकियों की पुस्तके देख लीजिए उनमे मेरा कोई न कोई नॉवेल ज़रूर निकल आएगा  ….  जिस समाज को बिगाड़ने का आरोप मुझ पर लगाया जा रहा है उसी समाज में मेरे पाठको का बहुत बड़ा वर्ग है  …. और गुलशन नंदा पार्टी से बाहर आ गए लेकिन इस कड़वी सच्चाई को साहित्य प्रेमी समाज कभी स्वीकार नही कर पाया।

उनके लोकप्रिय उपन्यासों पर फिल्मे बनती रही और लोकप्रिय भी होती रही पर उनकी लोकप्रियता उपन्यासकार के रूप में ही रही और इस क्षेत्र में उनका एकछत्र राज रहा.  लेकिन तभी एक और नाम उभर कर आया – राजवंश

अब प्रतिस्पर्धा होती लगी. राजवंश के उपन्यास भी सामाजिक – रोमांटिक रहे पर भावुकता भी रही. राजवंश भी लोकप्रिय होने लगे लेकिन गुलशन नंदा की लोकप्रियता में कमी नही आई. उनके उपन्यास लोकप्रिय हो रहे थे. उन पर बनी फिल्मे भी लोकप्रिय हो रही थी. फिल्मो की लोकप्रियता देखते हुए अब गुलशन नंदा सीधे फिल्म के लिए लिखते और बाद में वह उपन्यास के रूप में प्रकाशित होता था. तभी एक और लेखक उभरा – रानू  …. जिनके उपन्यास भी सामाजिक – रोमांटिक रहे पर भावुकता राजवंश से अधिक रही.

रानू को भी बहुत लोकप्रियता मिली जिसके बाद रानू की पत्नी लेखिका के रूप में उभरी जिनके उपन्यासों का स्वरूप भी वही रहा – सामाजिक रोमांटिक लेकिन भावुकता बहुत अधिक हो गई. कही-कही पाठक रो पड़ते थे. पहली बार पॉकेट बुक्स की दुनिया में एक महिला लेखिका बहुत लोकप्रिय हुई. लेकिन फिल्में केवल गुलशन नन्दा के उपन्यासों पर ही बनती रही.

यह सब अधिक दिन नही चला. जल्द ही रानू की पत्नी के निधन का समाचार मिला। कुछ समय बाद रानू के निधन की खबरें आई. राजवंश के बारे में पता नही चला. और इन रोमांटिक  उपन्यासों का दौर अस्सी का दशक आते-आते समाप्त हो गया. जिस तरह हर शुरूवात का अंत होता है उसी तरह गुलशन नंदा के उपन्यासों और फिल्मो का दौर भी थम गया…..

यह मेरी जानकारी है गुलशन नंदा के बारे में जो पढ़ी-सुनी है  … अगर आप इनमे कुछ सही गलत बताना चाहते है,  कुछ और जानकारी देना चाहते है तो स्वागतं है …  गुलशन नंदा की फिल्मो की श्रृंखला हम अगले चिट्ठे  से शुरू  करेंगे …

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