सब्जी और फल से रंगाई

कपड़ों की रंगाई पर बात करने से पहले हम थोड़ा सा फ़ैशन की बात कर लें।

पचास के दशक या साठ के दशक की शुरूवाती फ़िल्मों में नायिकाओं का पहरावा साड़ी ही हुआ करता था पर शलवार-कमीज़-दुपट्टा भी पहना जाता था। पर यह आजकल के सूट की तरह नहीं होता था। शलवार या सलवार ज्यादातर सफ़ेद ही होती थी अलबत्ता दुपट्टे कभी-कभार रंगीन हुआ करते थे। लेकिन बाजार में रंगीन दुपट्टे कम ही मिला करते थे। ऐसे में हैदराबाद की नजाकत-नफासत की लड़कियों महिलाओं ने घर पर दुपट्टे रंगने शुरू किए। दुपट्टे को हैदराबाद में आमतौर पर ओढनी कहा जाता हैं।

जब घर पर रंगने लगे तो कुछ प्रयोग भी हुए। जामुनी रंग के लिए फल जामुन और लाल रंग के लिए एक सब्जी का उपयोग किया जाने लगा। इस सब्जी को शायद बहुत कम लोग जानते हैं पर हैदराबाद और आस-पास के क्षेत्रो में यह बहुत मिलती हैं। यह पत्तेदार सब्जी हैं - अम्बाडा जिसके लाल फूलो को कहते हैं - बोण्डा। इसकी वैज्ञानिक जानकारी यानि वनस्पति विज्ञान की जानकारी हम दे दे ताकि इस पौधे को पहचाना जा सके, यह पौधा मालवेसी वर्ग का हैं, इसकी प्रजाति का नाम हैं - हाइबिसकस कैनाबिनस।

आज भी अम्बाड़े की पत्तियों की सब्जी और चटनी बनाई जाती हैं और इसके फूल बोण्डो की भी सब्जी बनती हैं। खैर... यहाँ रंगाई की बात कर रहे हैं।

सफ़ेद ओढनी को पानी में अच्छी तरह डुबो कर लाल रंग रंगना हो तो बोण्डे और जामुनी रंग रंगना हो तो जामुन और थोड़ा सोडा डाल कर उबाला जाता था। फिर ओढनी को छाया में सुखाया जाता था क्योंकि माना जाता था की धूप में रंग उड़ जाते है ...

इन रंगीन दुपट्टों को नाज़ से लहरा कर पहना जाता था ...

 

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: