स्मृति शेष – चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

आज हिन्दी के लोकप्रिय कहानीकार चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी का जन्मदिन हैं। गुलेरी जी का जन्म आज ही के दिन 1883 में हिमाचल प्रदेश के गुलेर गाँव में हुआ था। गुलेरी जी एक ही कहानी से हिन्दी साहित्य जगत में अमर हो गए … यह कहानी है – उसने कहा था
पाठ्यक्रम में शामिल होने से साहित्य प्रेमियों के अलावा अन्य हिन्दी पढ़ने वाले भी इस कहानी और गुलेरी जी से परिचित हैं। मैंने यह कहानी इंटरमीडियट  (प्लस टू ) में पढी थी। इस कहानी के कथानक को लोग भूल नहीं पाते, खासकर यह दृश्य  –
  ” सौदा लेकर दोनों साथ-साथ चले। कुछ दूर जाकर लडके ने मुस्कुरा कर पूछा – तेरी कुडमाई हो गई ?  इस पर लड़की कुछ आँखे चढ़ा कर ‘धत’  कहकर दौड़ गई और लड़का मुंह देखता रह गया।
दूसरे तीसरे दिन सब्जी वाले के यहाँ या दूध वाले के यहाँ अकस्मात् दोनों मिल जाते। महीना भर यही हाल रहा। दो-तीन बार लडके ने फिर पूछा – तेरी कुडमाई हो गई ?  और उत्तर में वही ‘धत’  मिला। एक दिन जब फिर लडके ने वैसी ही हंसी में चिढाने के लिए पूछा तो लड़की लडके की संभावना के विरूद्ध बोली – हाँ, हो गई।
कब ?
कल, देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू।
लड़की भाग गई।
लडके ने घर की सीध ली। रास्ते में एक लडके को मोरी में ढकेल दिया, एक छाबड़ी वाले की दिन भर की कमाई खोई, एक कुत्ते को पत्थर मारा और गोभी वाले के ठेले में दूध उंडेल दिया। सामने नहा कर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अंधे की उपाधि पाई। तब कही घर पहुंचा।”
इस दृश्य में भी विशेष कर यह संवाद तो बहुत लोकप्रिय है और साहित्य प्रेमियों की जुबां पर है –  ” तेरी कुडमाई हो गई ? “
यहाँ हम बता दे, कुडमाई का अर्थ हैं सगाई और सालू का अर्थ है ओड़नी या दुपट्टा
इस प्रेम प्रसंग की रोचकता के बाद कहानी में देशभक्ति भी हैं जहां यही लड़का बड़ा होकर  सेना में भर्ती होता है। लडकी का पति भी सेना में है।  लड़की का कहा याद रख कर ही  ( उसने कहा था )  बैरक में घुस आए दुश्मन से चतुराई से निपटता हैं और लडकी के पति को बचाता है।
कहानी की लोकप्रियता को देखते हुए इसकी मंचीय प्रस्तुतियां भी दी गई और इसी शीर्षक से फिल्म भी बनाई गई। कहानी वही रही पर प्रस्तुति सिनेमाई ढंग की ही रही।  उसने कहा था फिल्म में नंदा और सुनील दत्त प्रमुख भूमिकाओं में हैं पर फिल्म नही चली। कहानी पढ़ना सबको अच्छा लगा,  मंचीय प्रस्तुतियां  भी पसंद की गई  लेकिन उसे फिल्म के रूप में देखना किसी को न भाया पर इसके गीत पसंद किए गए।
हिन्दी के गौरवशाली साहित्यकार को सादर नमन !
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