ताज – भीतरी परिसर

खुला अहाता पार कर भीतरी परिसर में जाने के लिए लगभग 20 सीढियां है। संगमरमर की सीढियों पर चढने का अवसर अब नही है, इन पर लकड़ी की सीढियां लगा दी गई है। चढ कर जाने के बाद फिर से चारो ओर खुला भाग है उसके भीतर बीचो-बीच मुख्य स्थल है। यहाँ प्रवेश करते ही ज़मीन पर जाली से ढका भाग दिखाई देता है। पहले यह भाग खुला था और यहाँ से नीचे उतरा जाता था जहां मुमताज़ महल का वास्तविक मकबरा था। अब यह बंद कर दिया गया है।

सामने मुमताज़ महल का मकबरा है जिसके चारो ओर नक्काशीदार जाली लगी है। केवल सामने के खुले भाग से ही साफ़ देख सकते है, वैसे चारो ओर घूम कर जाली में से भी देखा जा सकता है। दीवारों और छत पर बेहद ख़ूबसूरत नक्काशीदार बेल-बूटे बने हुए है। जिस द्वार से भीतर आते है उसके दोनों ओर कुरान की आयते इतने कलात्मक रूप से लिखी गई है कि बेल-बूटों की तरह नज़र आती है। चारो ओर कक्ष जैसा घेरा है जहां से भी जगह-जगह से जाली में से मकबरा धुंधला सा देख सकते है। यहाँ की दीवारों और छत पर भी सुन्दर नक्काशी है –
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बाहर चारो ओर चार मीनारे है जो अब बंद है। पहले इन तीन मंजिली मीनारों पर चढ कर इसमे से ताज के मुख्य भाग की कारीगरी को पास से निहारा जाता था। –
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ताज परिसर में रेस्तरां भी है और चाय काफी की दुकाने भी सजी है।
ताज देखने के बाद हमने सिकंदरा  देखा जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….
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1 टिप्पणी »

  1. ताज महल दो बार देखा है। अंतिम बार करीब दस बरस पहले। फोटोग्राफी के शौकीन तो आजकल यमुना पर से भी शाम की छटा के साथ इस इमारत को कैमरे में क़ैद करना नहीं भूलते।

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