वृन्दावन

बरसाना देखने के बाद हम वृन्दावन देखने गए। वृन्दावन में छोटी संकरी गलियाँ है जिन्हें कुञ्ज गलियाँ कहते हैं –

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यहाँ बन्दर भी बहुत है और मंदिरों के पास उत्पात भी बहुत करते है। हाथ से सामान झटक ले जाते है पर वहां तैनात कर्मचारी डण्डे से पकड कर श्रृद्धालुओं का सामान लौटाते रहते है
सबसे पहले देखा गोविन्द देव मंदिर। यहाँ कृष्ण गोविन्द देव के रूप में विराजमान है –
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आगे कुञ्ज गलियों को पार करते हुए बीच में रास चौक है यहीं  वट वृक्ष है यहाँ छोटा सा मंदिर है इस स्मृति में कि कृष्ण और सखा सभी गायों को वट वृक्ष के नीचे इकट्ठा कर फिर उन्हें चराने ले जाते थे –
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पास ही की कुञ्ज गली में इसके बाद हमने देखा यहाँ का सबसे प्राचीन मंदिर वृन्दावन का बांके  बिहारी का मंदिर, यहाँ नन्द यशोदा मैय्या और माखन चोर कृष्ण की सुन्दर मूर्ति है।
इन कुञ्ज गलियों में छोटी – छोटी दुकाने सजाए मीठा दही और मक्खानदार लस्सी बेचने वाले बहुत है।
इन्ही गलियों से होकर हम पहुंचे कुञ्ज जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में ….
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