भद्राचलम का राम मंदिर

आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले का शहर हैं भद्राचलम जो तेलंगाना क्षेत्र में हैं.

भद्राचलम राम कथा का महत्वपूर्ण स्थान हैं. राम कथा से जुड़े होने से ही यहाँ राम मंदिर बनवाया गया हैं जिसे रामालय कहते हैं.

शहर के बस अड्डे से एक किलोमीटर के भीतर हैं रामालय जो गोदावरी नदी के तट पर बसा हैं. गोदावरी नदी का एक छोर महाराष्ट्र में नासिक में हैं जहां पंचवटी हैं, यही से कथा भी भद्राचलम तक जुड़ी हैं.

यह हैं गोदावरी नदी पर बना पुल -

नीचे देख सकते हैं नदी का किनारा जहां श्रद्धालु मंदिर में जाने से पहले पवित्र स्नान करते हैं. संकरे पुल के दूसरी ओर नीचे मंदिर की ओर जाने के लिए जगह-जगह सीढिया बनी हैं और बीच के स्थान में रामायण के प्रसंग मूर्तियों से बताए गए हैं. हलके पीले रंग के पत्थर से बढ़िया शिल्पकारी हैं.

लम्बे पुल के नीचे क्रम से इन प्रसंगों से रामकथा कही गई हैं जैसे केवट का प्रसंग, हिरण की ओर इंगित करती सीता और अंत में रावण वध, राम का राज्याभिषेक और समापन राजा राम की मूरत से. हर प्रसंग के लिए आवश्यकता के अनुसार चार-पांच मूर्तियाँ भी बनाई गई हैं. ऊपर ये शिल्पकारी और नीचे तक ढलान में उद्यान सजा हैं -

नीचे बड़ा बाजार सजा हैं जहां पूजापा और खाने-पीने की दुकाने सजी हैं. यहाँ से रास्ता हैं ऊपर मंदिर की ओर जाने का. तीन सौ सीढिया हैं. अगर सीढियों से न जाना चाहे तो ऊपर तक गाड़ी से जाने के लिए पक्की सड़क हैं जो पुल के लगभग आधा किलोमीटर पहले ही हैं. इस तरह गाड़ी से जाने पर पुल का सौन्दर्य नही देख सकते. इसीलिए पुल का सौन्दर्य देख कर फिर गाड़ी से पिछले रास्ते से जा सकते हैं.

मंदिर की चर्चा अगले चिट्ठे में...

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2 टिप्पणियाँ »

  1. पहाडों से कुछ फ़ुर्सत मिलेगी तो इसको भी देख लेगें।

  2. Alpana said

    bahut hi sundar jagah hai..aur vivran bhii pasand aaya..agli post ka intzaar rahega.

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