सालारजंग म्यूजियम – पहला तल

पहले तल में बाई ओर चार कलादीर्घाएं हैं - चीन, जापान और सुदूर पूर्व की कला कृतियाँ हैं।

कांच के कलात्मक बर्तन और कांच पर कला कृतियाँ हैं। जापान की प्रसिद्ध कला नीले कांच पर कलाकारी के सुन्दर नमूने हैं। बड़े कलात्मक फूलदान भी हैं। सामने की ओर 18 नंबर की गैलरी खिलौनों की हैं। यहाँ लकड़ी और मिटटी से बने सुन्दर खिलौने हैं। अपने विजयवाड़ा के चिट्ठो में मैंने कोंडापल्ली गाँव में बसे राजा कृष्ण देव राय के महल की चर्चा की थी और यह भी बताया था कि कोंडा का अर्थ हैं लकड़ी के खिलौने और पल्ली का अर्थ हैं शहर। यहाँ कोंडापल्ली की कला के सुन्दर नमूनों का संकलन हैं।

इसके बाद तीन गैलरियों में बाल विभाग हैं जिसमे बच्चो से जुड़ी कई चीजे हैं। शतरंज के बोर्ड और मोहरे बहुत आकर्षक हैं। तरह-तरह की शतरंज हैं। एक बोर्ड बहुत बड़ा हैं और उसके मोहरे कीमती पत्थरो से बने और आकार में बड़े हैं। कही-कहीं ऊंट (कैमल) की जगह मोर हैं। एक शतरंज बहुत छोटी, लगभग 3-4 साल के बच्चे की हथेली जितनी हैं, मोहरे भी उतने ही छोटे हैं।

इसके बाद 23 नंबर की गैलरी बहुत दिलचस्प हैं। यहाँ अरबी फारसी की पांडुलिपियाँ हैं। बच्चो की किताबो से लेकर कुरान तक हैं। बच्चो की अंकगणित की किताब हैं जिसमे पहाड़े (टेबुल्स) भी हैं। यह किताबे खुली हैं। लोककथाओं की पुस्तक भी हैं। फ़ौजी वर्दी पर कुरान की आयते हैं। 24 नंबर की गैलरी भारतीय चांदी की गैलरी हैं जिसमे चांदी के बर्तन, कपड़ो के बटन, फ़ौजी वर्दियों के चांदी के बेल्ट हैं। कलात्मक पानदान, सुपारी आदि रखने के डिब्बे आदि भी हैं। सुन्दर हुक्के भी हैं। सबसे अधिक आकर्षक हैं हाथी घोड़े के चांदी के जेवर। इनके भारी-भरकम नेकलस, पीठ पर रखे जाने वाले जेवर आकर्षक हैं।

25 नंबर की गैलरी में गलीचे (कालीन - कार्पेट) हैं। कश्मीर, ईरान के बेहतरीन गलीचे हैं। बहुत बड़े गलीचे भी हैं। देख कर लगा इतने पुराने होने पर इतने आकर्षक हैं, जब नए थे तब कितने लाजवाब रहे होंगे। इसके बाद की गैलरी में मिस्त्र की धातु से बनी मूर्तियाँ आदि हैं। इसके बाद हैं यहाँ के प्रसिद्ध बिदरी के काम की गैलरी। बहुत बारीक काम की कलात्मक वस्तुएं हैं। आगे हैं कश्मीरी गैलरी जिसमे कशमीरी शाल और अन्य कलात्मक पोषाके हैं। अंत में 33 नंबर की गैलरी पाश्चात्य फर्नीचर की हैं। सुन्दर कलात्मक फर्नीचर हैं। कहीं-कहीं कुर्सियों पर जहां पीठ टिकाते हैं वहां भी सुन्दर चित्रकारी बनी हैं।

दाहिनी ओर 5 गैलरियां हैं जिनमे से पहली गैलरी यूरोपियन पेंटिंग की हैं। दूसरी गैलरी में यूरोपियन कांच की कलात्मक वस्तुएं हैं। तीसरी गैलरी में फ्रांस की कलात्मक मूर्तियाँ हैं। यह गैलरी दिलचस्प हैं। इसमे एक दुहरी मूर्ति हैं। सामने से देखने पर एक खुशहाल बूढ़े व्यक्ति की मूर्ति हैं जिसके हंसते हुए मुखड़े के साथ सिर ऊपर उठा हैं। इसके पीछे बड़ा आइना रखा हैं। आईने में पीछे की मूर्ति दिखाई देती हैं, यह मूर्ति एक भद्र महिला की हैं जो सिर थोड़ा झुकाए खडी हैं। इसकी तस्वीर बाहर लगी हैं जहां से हमने भी कैमरे में क़ैद करने की कोशिश की, तस्वीर उतनी साफ़ नही आ पाई हैं -

इसके बाद यूरोपियन घड़ियों की गैलरी हैं। तरह-तरह की दिलचस्प घड़ियाँ हैं, बड़ी-छोटी विभिन्न आकार प्रकार की। एक घड़ी सूरज की तरह हैं। एक घड़ी हास्यप्रद हैं, एक पेटू व्यक्ति हैं और उसके बाहर निकले गोल पेट पर घड़ी हैं जिसे उसने दोनों हाथो से पकड़ रखा हैं। एक तोप घड़ी हैं जिसमे सिपाही तोप के पास खड़े हैं और तोप जिस पर रखी हैं वहां घड़ी हैं। एक पौधे पर भी घड़ी हैं।

बाहर लॉन बड़ा नही हैं पर अच्छा हैं। यहाँ एक पुराना फायर इंजन हैं -

सालारजंग III की मूर्ति लगी हैं -

इस तरह एक व्यक्ति की परिष्कृत रुचि का सुन्दर उदाहरण हैं यह संग्रहालय।

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