पैन्ठन की रेशमी साड़ियाँ

हर शहर की अपनी कुछ विशेषता होती हैं। कुछ ख़ास चीजे तैयार होती हैं।

औरंगाबाद में दो ख़ास चीजो के बारे में बताया गया - चांदी के वर्क और पैन्ठन की साड़ियाँ

चांदी के वर्क हैदराबाद के भी ख़ास होते हैं इसीलिए हम पैन्ठन गए। पैन्ठन एक स्थान हैं जो एक तरह की कलाकारी के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ कोई शौपिंग सेंटर या शौपिंग मॉल नही हैं। बुनकरों के केंद्र हैं और एकाध दुकाने हैं।

बुनकर केन्द्रों से साड़ियाँ तैयार हो कर इन एक्का-दुक्का दुकानों पर आती हैं। दो तरह की साड़ियाँ हैं - एक सिंथेटिक जिसका दाम 1500-1700 हैं और दूसरी रेशमी (प्यूर सिल्क) की साड़ियाँ जिनका दाम 5000 से शुरू हैं। दोनों में बुनाई एक जैसी हैं, कपडे में अंतर से दाम में अंतर हैं।

यह बुनाई ही यहाँ की विशेषता हैं। यह 2000 साल पुरानी कला हैं। बार्डर और पल्लू पर अलग रंग के रेशमी धागों से बुना जाता हैं। पल्लू पर पारंपरिक चित्र जैसी बुनाई हैं जैसे आकार में नारियल या कलश जैसा हैं। बार्डर की चौडाई और पल्लू में बुनाई जैसे-जैसे बढ़ती जाती हैं दाम भी बढ़ता जाता हैं। यह शुद्ध भारतीय पारंपरिक साड़ियाँ हैं। बताया गया कि पहले चांदी और सोने के तारो से बुनाई हुआ करती थी।

अगले चिट्ठे में औरंगाबाद के मंदिरों की चर्चा...

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1 टिप्पणी »

  1. In saadiyon ka chitra bhi yaha rahta to hum apke vivran ko us se relate kar sakte the.

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