दौलताबाद किला

अजन्ता एलोरा देखने के बाद हम ऐतिहासिक स्थल देखने निकले।

औरंगजेब के शहर औरंगाबाद में सबसे पहले हमने देखा दौलताबाद किला। दौलताबाद के नाम से सभी परिचित हैं, इतिहास में हम पढ़ चुके हैं की दिल्ली से दौलताबाद और दौलताबाद से दिल्ली कई बार राजधानी बदली गई।

12 वी सदी में बना 1200 हैक्टर क्षेत्र में फैला यह किला शहर की चहल-पहल में ही हैं -

इस चित्र को बड़ा करके देखने से संक्षिप्त में इस किले की जानकारी मिल जाएगी।

भीतर जाने पर बाई ओर सबसे पहले नजर आती हैं पानी की विशाल टंकी जिसके बाद हैं भारत माता का मंदिर। इन दोनों का निर्माण बाद में किया गया जब स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया जा रहा था इसी से ये स्थान किले के परिसर में हैं।

भारतमाता के मंदिर में भारत माता की विशाल मूर्ति हैं जहां पुरोहित विधि-विधान से पूजा कर रहे थे -

विभिन्न कतारों में एक ही सीध में कई स्तम्भ हैं।

बीचो-बीच विशाल प्रांगन हैं जहां सभाएं हुआ करती थी। मंदिर देख कर हम बाई ओर से बीच में आए। रास्ता उबड़-खाबड़ हैं, सामने हैं किले का प्रवेश द्वार -

पत्थर की सीढियां हैं जिस पर संभल कर चलना हैं। किले में सबसे पहले हैं तोपखाना जहां रखी तोपे उस समय की सैन्य शक्ति का आभास कराती हैं -

इसके बाद हैं चाँद मीनार जिसका निर्माण गुजरात विजय की स्मृति में करवाया गया था, चित्र में जो गुलाबी रंग की नजर आ रही हैं -

इसमे सीढिया हैं लेकिन अब ऊपर जाने के लिए रास्ता बंद हैं। इस तीन मंजिला मीनार में पहले उपरी छोर से अजान हुआ करती थी और नमाज अदा की जाती थी। अब यहाँ भीतर जा नही सकते केवल बाहर की जाली से भीतर देखा जा सकता हैं।

कुछ और जानकारी अगले चिट्ठे में...

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3 टिप्पणियाँ »

  1. jandunia said

    जानकारीपरक पोस्ट

  2. bhaskar said

    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

  3. nadeem said

    mu aurangabad ke sare historycal place ki information mil sakti hai ?

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