हैदराबादी चूड़ियाँ – सादा जोड़ा

सादा जोड़ा - जैसा कि नाम से ही पता चलता है यह सादा जोड़ा है।

इसमें सोनाबाई चूड़ियों की जगह सादी चूड़ियाँ होती है। इन चूड़ियों को काफ़ी चूड़ियाँ कहते है। यह सभी रंगों में मिलती है -

लकदक नगों के गोटों की जगह इसमें मोटी चूड़ियाँ होती है। यह भी वास्तव में काफ़ी चूड़ियाँ ही है पर कुछ मोटी होती है जिस पर सुनहरा काम होता है, काम क्या… कुछ बिन्दिया और लकीरें जैसी होती है। इसे तिलेकाम चूड़ियाँ कहते है -

तिलेकाम का मतलब है तेलंगाना का काम। यह तिलेकाम चूड़ियाँ तेलंगाना क्षेत्र की है जो भागमती का शहर है। भागमती और तेलंगाना क्षेत्र के बारे में हम पिछले चिट्ठों में बता चुके है। इस क्षेत्र की महिलाएँ केवल तिलेकाम चूड़ियाँ ही पहनती है।

इन चूड़ियों में नज़ाकत नहीं होती। नज़ाकत और नफ़ासत के शहर हैदराबाद की महिलाओं ने इन चूड़ियों के बीच में सादी काफ़ी रखकर इसे सादे जोड़े का रूप दे दिया। यह आम दिनों में पहना जाने लगा और नगों का जोड़ा ख़ास मौक़ों पर।

सबसे छोटे सादे जोड़े में दो तिलेकाम चूड़ियों के बीच दो काफ़ी चूड़ियाँ होती है। बड़ा जोड़ा (अधिक चूड़ियाँ) बनाने के लिए आगे और दो काफ़ी चूड़ियाँ फिर अंत में एक तिलेकाम चूड़ी जोड़ी जाती है -

जितना चाहो उतना बड़ा जोड़ा बनाया जा सकता है, आगे दो काफ़ी चूड़ियाँ और एक तिलेकाम चूड़ी जोड़ते जाए -

कलाई भर कर जोड़ा अच्छा लगता है, ख़ासकर लाल और हरे रंग में। अगर इसे विवाहित महिलाएँ पहने तो कालीपोत (मंगलसूत्र) के साथ इसकी शोभा देखते बनती है।

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2 टिप्पणियाँ »

  1. bhawna said

    badhiya jaankaari!

  2. ओम भया

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