हैदराबाद में बारकस का जाम

आज चर्चा करेंगे बारकस के जाम की। जी नहीं बारकस किसी व्यक्ति का नाम नहीं है यह एक स्थान का नाम है और जाम… न ट्रैफ़िक जाम है और न ही शराब का जाम, हैदराबाद में अमरूद को जाम कहते है।

हैदराबाद की मिट्टी अमरूद फल के लिए अधिक उपयुक्त है। मिट्टी जिन चीज़ों की पैदावार के लिए अधिक उचित होगी उसी की पैदावार अधिक होती है न, इस तरह यहाँ जाम (हम यहाँ अमरूद नहीं जाम ही कहेंगे) अधिक होता है।

पूरे हैदराबाद शहर में घर-घर में जाम के पेड़ देखे जा सकते है जिन्हें यहाँ जाम का झाड़ कहते है। बारकस के पूरे इलाके में जाम के झाड़ थे। यहाँ का जाम आकार में बड़ा होता था और कुछ झाड़ों के जाम भीतर से लाल होते थे। वैसे अक्सर हैदराबाद के जाम भीतर से सफ़ेद होते है -

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बारकस पुराने शहर के अंतिम छोर पर है। अब जो नया अंतर्राष्ट्रीय राजीव गाँधी हवाई अड्डा बना है, वहाँ जाने का एक रास्ता बारकस के पास से भी गुज़रता है। अब बारकस में जाम के झाड़ एक्का दुक्का ही रह गए है और बस्ती ही रह गई है।

पहले बारकस में एक विशेष समुदाय के लोग ही रहते थे जिन्हें चाउश कहते है, ये तुर्की लोग है। बरसों पहले तुर्क से आकर ये लोग हैदराबाद में बस गए। इनका काम फलों का व्यापार है, विशेषकर जाम। इस समुदाय की संस्कृति मुस्लिम संस्कृति है पर बहुत बारीक सा फ़र्क है इसीलिए इनकी मस्जिद अलग होती है।

इनके पुरूषों का पहरावा बहुत सादा होता है, लुंगी और कुर्ता पहनते है। लुंगी आमतौर पर लाल, हरी और नीले रंग की होती है और चौकड़ियों (चेक्स) की होती है। कुर्ता मोटे कपड़े का बना होता है और गले पर धागों की कढाई होती है जो घर पर महिलाओं द्वारा की जाती है। महिलाएँ सलवार कमीज़ पहनती है और बड़ा दुपट्टा सिर पर से ओढती है।

इनका काम पहले केवल जाम बेचना ही था। अब अन्य व्यापार भी करने लगे है। पहले सुबह-सवेरे पेड़ों से जाम तोड़ना, उन्हें टोकरों में भरकर छोटे व्यापारियों को बेचना और खुद ठेलों पर जाम लेकर बेचने निकलना था। ठेले को हैदराबाद में बण्डी कहते है इसीलिए यहाँ हम भी बण्डी ही लिखेंग़ें। वह नज़ारा ही कुछ अलग था - सुबह होते ही जाम की बण्डियाँ लेकर चाउश निकल पड़ते थे। पहले केवल चाउश ही जाम का कारोबार करते थे अब बहुत ही कम चाउश इस व्यापार में है, अधिकतर दूसरे लोग ही यह कारोबार कर रहे है।

पूरे शहर में जाम की बण्डियाँ जगह-जगह पर हमेशा देखी जा सकती है। पहले एक जाम कुछ पैसों में बिकता था फिर दाम बढने लगे, एक और दो रूपए में एक जाम बिकने लगा फिर किलो से बिकना शुरू हुआ। आजकल 10-12 रूपए में एक किलो मिलता है।

यहाँ स्कूलों ख़ासकर लड़कियों के स्कूल के पास जाम बहुत बिकते है। हमने भी स्कूल के दिनों में बहुत जाम खाए है। एक और ख़ास बात… हैदराबाद में पूजा के बाद अर्क देने के लिए भी जाम का प्रयोग किया जाता है। अर्क खजूर या मौसंबी से भी देते है पर यहाँ जाम को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यहाँ की मिट्टी का फल यही है।

अब एक नज़र जाम के पोषक तत्वों पर -

100 ग्राम जाम में विटामिन सी 212 मिली ग्राम, लवण 0.7 मिली ग्राम, थायामिन 0.03 मिली ग्राम, रिबोफ़्लेविन 0.03 मिली ग्राम, निकोफ़ेरिक 0.3 मिली ग्राम होता है।

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