हैदराबाद की शाकभाजी

देश के अन्य भागों की तुलना में हैदराबाद में सब्जियाँ अधिक होती है।

यहाँ मांसाहारी बहुत है लेकिन उतने ही शाकाहारी भी है। सब्जियों के अधिक उगने का कारण यहाँ की मध्यम जलवायु और मौसम है।

हैदराबाद की जलवायु देश के कई शहरों से अच्छी है, न ज्यादा गर्मी न ज्यादा सर्दी और न ही अधिक बारिश। पिछले कुछ सालों से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से यहाँ का तापमान 40 के आस-पास पहुँच रहा है नहीं तो पहले 38 से नीचे ही रहा था और 11 से नीचे तो अब भी अक्सर नहीं जाता है।

इस चिट्ठे में हम बता रहे है उन तमाम सब्जियों के नाम जो हैदराबाद और आस-पास के क्षेत्रों में उगाई जाती है और धड़ल्ले से बिकती है। दाम भी अन्य राज्यों की तुलना में कम ही होते है। यह सभी सब्जियाँ हैदराबादियों के रोज़ के खाने में शामिल है।

यहाँ सब्जियों को शाकभाजी कहा जाता है। हरी पत्तेदार सब्जी को भाजी कहते है जिसका बहुवचन है भाजियाँ, कन्दमूल जैसे आलू, अरवी, सूरन को गड्डे कहते है और बाकी सभी सब्जियों को शाक कहते है।

वैसे हैदराबाद में शाकभाजी (सब्जियाँ) बहुत मिलती है। देश के अन्य भागों की तरह यहाँ भी आलू, अरवी, गोभी, फूल गोभी, मटर, गाजर, खीरा आदि बहुत मिलता और खाया जाता है पर हैदराबाद की कुछ खास शाकभाजी है जो अन्य स्थानों पर बहुत कम मिलती है या मिलती ही नहीं।

यहाँ भाजियाँ बहुत ज्यादा मिलती है पर सरसो जो भारत की लोकप्रिय पत्तेदार सब्जी है यहाँ नहीं मिलती बल्कि बहुत से हैदराबादी ऐसे भी है जो यह भी नहीं जानते कि सरसो की सब्जी भी होती है (सरसों का साग) लेकिन हाँ यहाँ सरसों के तेल का मालिश के लिए बहुत प्रयोग होता है जिसे राई का तेल भी कहते है।

यहाँ हरी पत्तेदार सब्जियों की गड्डियों को कट्टे कहते है। एक गड्डी को एक कट्टा कहते है। पाँच रूपए में पाँच कट्टे सामान्य दाम है, मँहगे होने पर दो कट्टे मिलते है, इन्हें भाजी के कट्टे कहते है। भाजियों के सिर्फ़ नाम ही नहीं लिए जाते बल्कि नाम के साथ भाजी शब्द भी बोला जाता है जैसे पालक की भाजी, मेथी की भाजी।

हैदराबादी भाजियाँ जो अन्य स्थानों पर शायद नहीं मिलती - अम्बाड़ा, चुक्का, माट, कुल्फ़ा और सोया। कुल्फ़ा को गोल की भाजी भी कहते है।

अन्य सब्जियाँ है चिगुर, बोण्डे, मोगरे

इमली के पत्तों को चिगुर कहते है जो बहुत छोटे- छोटे होते है और किलो से बेचे जाते है इसीलिए इन्हें भाजी नहीं कहते।

अम्बाड़े की भाजी के फूलों को बोण्डे कहते है। यहाँ हम एक बात बता दे कि आजकल डाक्टर हृदय रोगियों को बोण्डे खाने की सलाह दे रहे है।

मूली की फलियों को मोगरे कहते है।

इनके वैज्ञानिक नाम और 100 ग्राम साग में पोषक तत्व हम बता दें -

सामान्य नाम - वैज्ञानिक नाम -कैल्शियम (मिली ग्राम) - आयरन (मिली ग्राम) - विटामिन सी (मिली ग्राम) - कैरोटीन (म्यू ग्राम)

अम्बाड़ा - हाईबिस्कस कैनाबिनस - 172 - 2 -20 - 2898 - बीटा कैरोटीन अधिक मात्रा में होता है

माट (चौलाई या राजगिरा) - एमरैन्थस गैनजेटिकस या एमरैन्थस पैनिक्यूलेटस - 397 - 25 - 99 - 5520 राजगिरा में कैरोटीन 14190 म्यू ग्राम, बीटा कैरोटीन अधिक मात्रा में होता है

कुल्फ़ा (गोल की भाजी) - पोरच्यूलाका आँलेरेसिया - 111 - 15 - 29 - 2292

चुक्का - रियूमैक्स वैसीकेरियस - 63 - 1 - 12 - 3660

चिगुर - टैमरिन्डस इन्डिका - 101 - 1 - 3 - 250

इनमें से माट की भाजी आन्ध्रा के लोगों के साथ हैदराबाद में आई है, पहले यहाँ नहीं थी। इसी तरह सब्जी गिलोरे जो हरे रंग के होते है और एक ऊंगली की तरह लम्बे और थोड़े मोटे होते है, यह भी आन्ध्र संस्कृति के है।

खास हैदराबादी शाकभाजी है - बैंगन, कद्दू, अम्बाड़ा, बोण्डे, लम्बी मोटी मिर्ची, मोगरे, चिगुर, कोथमीर (हरा धनिया), करयापाक (करी पत्ता)

इन सबका प्रयोग आज भी उतना ही होता है जितना उन दिनों हुआ करता था जब हैदराबाद रियासत थी।

इस शाकभाजी के बारे में विस्तार से जानकारी अगले किन्ही चिट्ठों में…

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