मृगशिरा कार्तिक पर दमा रोग का इलाज मछली से

माना जाता है कि रोहिणी जितना तपती है मिरग उतना ही बरसता है।

मिरग यानि मृगशिरा या मृगशिरा कार्तिक। इस दिन मछ्ली खाना अच्छा माना जाता है। इसके अन्य कारणों के अलावा एक कारण यह भी है कि मछली का उपयोग दवाई में भी किया जाता है।

मछली के तेल की गोलियों को आँखों के लिए अच्छा माना जाता है तो कई दवाइयाँ बनाने में मछली का प्रयोग किया जाता है। हैदराबाद में दमा या अस्थमा रोग ठीक करने के लिए मछली का प्रयोग किया जाता है।

दमा रोग के इलाज के लिए यह दवा साल में केवल एक दिन मृगशिरा कार्तिक के दिन ही दी जाती है। मृगशिरा कार्तिक 5 से 9 जून तक किसी भी दिन होती है और हैदराबाद में मानसून के आने की निर्धारित तारीख़ 5 जून है। दवा देने का यह सिलसिला 150 सालों से चला आ रहा है। हम बचपन से ही देख रहे है। हैदराबाद के पुराने शहर में चारमीनार से कुछ ही दूरी पर एक स्थान है दूध बाउली। यहाँ मैं एक बात बता दूँ कि हैदराबादी भाषा में कुएँ को बाउली कहा जाता है। बचपन में हमारा घर भी इससे थोड़ी ही दूरी पर था।

दूध बाउली में बत्तिनी गौड़ परिवार रहता है। यह ब्राह्मण परिवार है। इसी परिवार में यह दवा तैयार की जाती है और वितरित की जाती है जिसे मछली प्रसाद का वितरण कहते है।

वास्तव में दवाई कुछ जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है। यह कौन सी जड़ी-बूटियाँ है और दवाई कैसे बनाई जाती है यह सब राज़ है और इस परिवार के अलावा इसे कोई नहीं जानता। इस दवा की छोटी-छोटी गोलियाँ बनाई जाती है। इस गोली को छोटी मरल जाति की जीवित मछली के मुख में रखा जाता है फिर इस मछली को रोगी का मुहँ खोलकर उसमें भीतर डाला जाता है फिर रोगी का मुहँ बन्द कर मुँह को थोड़ा पीछे करते है जिससे रोगी मछली को साबुत निगल लें।

यह दवाई लेने के तीन-चार घण्टे पहले से रोगी कुछ नहीं खाता है यानि खाली पेट रहता है। माना जाता है कि मछली रोगी के खाली पेट में चक्कर लगाती है। मछली और उस दवा की रासायनिक क्रियाओं से दमा रोग ठीक होता है। यह दवाई लेने के पन्द्रह दिन बाद तक कुछ फल और सब्जियाँ खाने की मनाही होती है और कुछ विशेष रूप से खाए जाते है। ऐसा लगातार चार साल तक करने पर दमा रोग पूरी तरह से ठीक होता है।

पहले यह दवाई दूध बाउली स्थित घर में ही दी जाती थी। फिर रोगियों की संख्या बढने लगी और मुहल्ले के मैदान में इसे दिया जाने लगा। पर इधर कुछ सालों से रोगियों की संख्या बहुत बढ गई है। देश के कोने-कोने से रोगी आ रहे है। इसीलिए शहर के सबसे बड़े मैदानों जैसे नुमाइश मैदान और निज़ाम काँलेज मैदान में मछली प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जा रही है।

राज्य प्रशासन इसमें पूरी मदद करता है। भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बन्दोबस्त होता है। कई स्वयंसेवी संघटन भी मदद करते है। रोगियों की संख्या बहुत होती है इसीलिए पाँच दिन पहले से ही टोकन जारी किए जाते है। इस तरह बाहर से आए रोगी और साथ आए रिश्तेदारों को लगभग एक सप्ताह तक ठहरना पड़ता है। यह संघठन उनके ठहरने की व्यवस्था करते है। विभिन्न रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों से उनकी सुविधा के लिए राज्य परिवहन विशेष बसें चलाता है। दवाई देने यानि मछली प्रसाद वितरण के स्थान पर पानी और छाँछ वितरण की व्यवस्था भी यह संघठन करते है।

मृगशिरा कार्तिक के दिन सुबह तड़के से ही दवाई दी जाती है जो लगातार चौबीस घण्टे और नक्षत्र के आधार पर कुछ घण्टे और भी जारी रहती है। दवाई मुफ़्त दी जाती है पर मछली रोगी को खुद खरीदनी होती है जिसके लिए लगभग 50 काउंटर खोले जाते है। टोकन के अनुसार जब बारी आने वाली होती है तभी मछाली खरीदनी होती है ताकि मछली जीवित रह सके।

दवाई की रासायनिक जाँच करवाने और इसे अवैध ठहराने की बहुत कोशिश की गई। डाँक्टरों की एसोसिएशन ने इसे अदालत में चुनौती भी दी पर फ़ैसला गौड़ परिवार के हक़ में हुआ और रोगियों की बढती संख्या को देखकर इसे जारी रखने को कहा गया।

इस वर्ष यह दवा आज यानि 8 जून को दी जा रही है और कल तक दवा देना जारी रहेगा। यह नुमाइश मैदान में दी जा रही है जो नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास है। दवा देने के लिए 40 काउंटर खोले गए है और डेढ लाख मछलियाँ उपलब्ध कराई गई है।

अब एक नई समस्या खड़ी हो रही है। लग रहा है जैसे मरल जाति की मछली की नस्ल समाप्त हो रही है। वैसे मछलियों को प्रजनन के बाद ही मार्किट में भेजा जाता है जिससे नस्ल बढती रहती है। मगर इस दवाई में छोटी मछली का प्रयोग किया जाता है यानि प्रजनन के पहले ही मछली समाप्त हो रही है।

रोगियों की संख्या बढने से मछलियाँ भी हज़ारों की संख्या में प्रयोग में आ रही है। देखे आगे क्या होता है…

Advertisements

9 टिप्पणियाँ »

  1. arvind mishra said

    There must be a thorouh investigation of the whole process including medical and theuraptical aspects and vested commercial intrests involved in the whole matter ! it seems to be yet another case of superstition only ! And some fish seed produsers are also minting the money !

  2. bhanu pratap vishwakarma said

    dear sir
    i have problem in ashthama can you please advice me what i need to do i can not breath very well and some time pen my chest please reply me my email what i need to d.
    thank you
    best regard,s
    bhanu pratap vishwakarma uttar pradesh

  3. dear sir
    i have problem in ashthama can you please advice me what i need to do i can not breath very well and some time pen my chest please reply me my email what i need to d. pls.give me your address at my mail address

    thank you
    best regard,s

  4. charandas vaishnav said

    muze ana hai pata do

  5. dear sir
    i have problem in ashthama can you please advice me what i need to do i can not breath very well and some time pen my chest please reply me my email what i need to d.
    and plzzz send me this place adress also
    thank you
    best regard’s
    Hardeep kumar kalal
    Rajasthan
    mobile number 9772547789

  6. http://www.C s .Com

  7. giriraj suthar said

    मुझे भी अस्थमा हे क्रपया आप मेरी मद्त करोगे

  8. प्रवीन डाबर said

    सर
    मेरे मामा को अस्थमा है। बहुत ज्यादा तकलीफ में हैं। शरीर पर चर्बी बहुत बढ़ ग‌ई है। मुंह ऒर पैरों पर सूजन कुछ ज्यादा ही हो ग‌ई है। सांस उठता है तो जल्दी से जुड़ता नही।
    प्लीज सर जल्दी कोई उपाय बताईए हम हस्पतालों के चक्कर लगा लगा कर थक चुके हैं। लेकिन मेरे मामा को आराम की बजाय तकलीफ ज्यादा हूई है। अगर आप इसमें हमारी मदद करेंगे तो आप का बहुत आभार होगा।

  9. प्रवीन डाबर said

    सर
    क्या मोबाइल नम्बर मिल सकता है? अगर आप इसे सोशल नहीं करना चाहते तो ये मेरे नम्बर हैं (8816094368, 9671678803)
    प्लीज एक बार जरूर फोन करें ।

RSS feed for comments on this post · TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s