रामेश्वरम की ख़ूबसूरत सुबह – समुद्र किनारे सूर्योदय

रामेश्वरम में जिस होटल में हम ठहरे थे वहाँ की बालकनी से देखा लहराता समुद्र।

सूर्योदय देखने हम सवेरे पाँच बजे से बालकनी में टहलने लगे। इस समय भी सुरमई होता काला अँधेरा कम सुन्दर नहीं लग रहा था। अब किनारे से निकल कर एक नाव धीरे-धीरे आगे बढती दिखाई दी। उसके पीछे रस्सी से बँधी दूसरी नाव फिर उसके पीछे एक-दो नावे फिर संख्या बढती गई -

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धीरे-धीरे कालिमा छँटती गई और आकाश सुरमई हो गया -

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फिर आकाश सुरमई से सुनहरा होता गया और नावों का काफ़िला समुद्र में आगे बढता गया -

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धीरे-धीरे जाल नाव से निकल कर समुद्र में छाने लगे मछलियाँ पकड़ने -

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फिर सुनहरापन बढता गया और पौ फटने लगी और समुद्र के कुछ ऊपर आकाश में सूर्यदेवता प्रकट हुए -

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फिर लालिमा छाने लगी और एक पतली लाल रेखा समुद्र के पानी में खिंच आई -

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यह है अरूण -

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फिर सूर्य बढने लगा -

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आकाश में एक्का-दुक्का बादल भी थे। कभी सूर्य बादल की ओट में रहा फिर बाहर निकल आया -

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यह है समुद्र का किनारा जहाँ नावों का काफ़िला है जो समुद्र में आगे बढ रहा है, किनारे श्रृद्धालु पवित्र स्नान कर रहे है। यह वही स्थल है - अग्नि तीर्थम जिसकी शुरूवाती चिट्ठे में हमने चर्चा की थी -

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अगले चिट्ठे में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का पैतृक निवास, पामबन पुल और कुछ बातें खाने-पीने की…

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4 टिप्पणियाँ »

  1. neeraj1950 said

    गज़ब के चित्र लिए हैं आपने सूर्योदय के…बिना रामेश्वरम गए हमें आपने वहां के सूर्योदय के दर्शन करवा दिए…बहुत बहुत धन्यवाद.
    नीरज

  2. Zabardast bahut sundar laga suryoday ki vibhinn avasthaon ka ye chitran

  3. आप कि कहानि ठिक लगी

  4. अनाम said

    काशमीर

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