गन्धमादन पर्वत और शबरी के बेर

रामेश्वरम में रामसेतु के पत्थर देखने के बाद हम पहुँचे गन्धमादन पर्वत।

रास्ते में आरंभ में ही बाईं ओर छोटा सा हनुमान मन्दिर है जिसमें स्थापित हनुमान जी की मूर्ति बाहर से ही दिखाई देती है, इसे साक्षी हनुमान का मन्दिर कहा जाता है।

माना जाता है कि राम लंका जाने के लिए निकटतम स्थल रामेश्वरम द्वीप पहुँचे और यहाँ स्थित गन्धमादन पर्वत पर चढ कर उन्होनें पहली बार लंका को देखा और इस पल के साक्षी रहे हनुमान। इसीलिए यह मन्दिर साक्षी हनुमान का मन्दिर कहलाता है और इस पल की स्मृति के लिए पर्वत पर बनाया गया मन्दिर पादुका मन्दिर कहलाता है।

हनुमान जी के दर्शन के बाद गन्धमादन पर्वत की चढाई सड़क मार्ग से बढती जाती है लेकिन गाड़ी चलाने में अधिक कठिनाई नहीं होती। बताया गया कि गन्धमादन पर्वत पर स्थित यह पादुका मन्दिर 24 फीट की ऊँचाई पर है लेकिन कुछ लोगों ने ऊँचाई 18 फीट बताई। ऊपर मन्दिर तक जाने के लिए सीढियाँ है।

यह पूरा क्षेत्र शबरी का है और आज भी वह वर्चस्व कायम है। मन्दिर की सीढियों पर शबरी के बेर बेचे जाते है। इस तस्वीर में देखिए पादुका मन्दिर जो पर्वत की ऊँचाई पर है और सीढियों पर बेचे जा रहे है बेर -

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मन्दिर में काले पत्थर से बने पादुका की एक जोड़ी है जिसके दर्शन किए जाते है और जिन्हें प्रणाम किया जाता है। चारों ओर अहाता है जहाँ से नीचे शहर नज़र आता है।

दर्शन कर हम नीचे आने लगे। सीढियों पर टोकरों में बेर भर कर उसे काग़ज़ की पुड़िया में डालकर बेचा जा रहा था। साथ में अमरूद, तोतापरी कैरी (कच्चे आम) भी बेचे जा रहे थे। इसे श्रृद्धा कहे या आसक्ति लगभग हर आने जाने वाले एक पुड़िया बेर तो खरीद ही रहे थे। हमने भी खरीदे। बेर बिल्कुल खट्टे थे हालांकि शबरी के बेर मीठे थे। बताया गया कि यहाँ हमेशा बेर बेचे जाते है जबकि हर मौसम में बेर नहीं मिलते। हो सकता है यहाँ बेर की झाड़ियाँ हो और कच्चे पक्के बेर हमेशा मिलते हो वैसे यहाँ झाड़-झंखाड़ तो नज़र आए।

यहाँ से नीचे लौटने के बाद हमें थोड़ी दूर पर एक झरना नज़र आया जिसे सीता झरना कहते है। माना जाता है कि जब सीताजी को प्यास लगी तब रामजी ने धरती पर एक तीर छोड़ा जिससे मीठे पानी का झरना फूट पड़ा था।

सीता झरने से आगे एक स्थल है जहाँ भी पवित्र स्नान किया जाता है। इस स्थल में पानी में गणेशजी की मूर्ति है, शिवलिंग है और नवग्रह की मूर्तियाँ है। सभी मूर्तियाँ पानी में है पर ऊपर से दिखाई देती है। यहीं प्लेटफार्म जैसा है जहाँ स्नान किया जाता है। हो सकता है यह पहले मन्दिर रहा हो और बाद में जलस्तर बढने से पानी में चला गया हो।

इसी के साथ यहाँ के पुण्य स्थलों की यात्रा समाप्त हुई। इस तरह रामेश्वरम एक ऐसा पवित्र शहर है जहाँ से राम ने लंका पर चढाई की और सीता को साथ लेकर लंका विजय के बाद अपनी धरती पर पहला पग यहीं रखा। उसके बाद कुछ समय तक राम सबके साथ यहाँ रहे यानि रामकथा का महत्वपूर्ण भाग है रामेश्वरम।

लेकिन रामेश्वरम में देखने योग्य अन्य स्थल और दृश्य भी है, एक ऐसा ही मनोरम दृश्य है समुद्र के किनारे सूर्योदय का जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में…

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