रामसेतु और विभीषण मन्दिर

छोटा सा शहर रामेश्वरम, पूरा का पूरा एक पुण्य स्थली है।

यहाँ के विभिन्न पुण्य स्थानों पर घूमने के लिए मुख्य मन्दिर रामालय के पास से ही आटो मिल जाते है। आटो के अलावा एकाध जीप और दो-चार ताँगे भी है। इनके चालक सभी पुण्य स्थलों के बारे में जानते है इसीलिए गाइड की आवश्यकता नहीं पड़ती और यहाँ कोई गाइड नज़र भी नहीं आए। ताँगे और आटो वाले 10-12 किलोमीटर तक घुमाने के लिए प्रति व्यक्ति 10 रूपए लेते है। एक चक्कर में सभी स्थान नहीं देख सकते है क्योंकि यह विभिन्न दिशाओं में है। जीप में प्रति व्यक्ति 150 रूपए लेकर पूरे स्थान एक साथ दिखाते है। लेकिन जीप बहुत कम है, हमें भी नहीं मिली इसीलिए हमने भी आटो से ही सैर की।

सबसे पहला स्थान हमनें देखा रामसेतु। यह वही सेतु है जिस पर चलकर राम ने अपनी सेना के साथ लंका पर चढाई की थी। सेतु तो अब दिखाई नही देता है। बताया गया कि वर्ष 1964 में रामेश्वरम में भयंकर तूफ़ान आया था जिससे सेतु टूट गया है और समुद्र में समा गया है। यह है सेतु तक पहुँचने का रास्ता -

179500202

यह पक्की सड़क है। इसके दोनों ओर समुद्र लहरा रहा है। दाहिनी ओर का समुद्र श्रीलंका की ओर है और बाईं ओर का तमिलनाड़ु का।

और यहाँ दोनों समुद्र मिलते है। यहीं से सेतु बनाया गया। कहते है सेतु के इस आरंभिक बिन्दु पर यानि समुद्र के किनारे समुद्र के कुछ भीतर एक मन्दिर भी था जहाँ सीढियों से उतर कर जाते थे। ये भी तूफ़ान में जलमग्न हो गया -

17950016

यहीं किनारे पर दाहिनी ओर यानि श्रीलंका जाते समुद्र की ओर है विभीषण मन्दिर। माना जाता है कि यहीं पर जहाँ दोनों समुद्र मिलते है वहाँ के पानी से राम ने विभीषण का अभिषेक किया था। छोटा सा मन्दिर है -

179500182

इसमें सामने पत्थर का कलश जैसा दिखाई दे रहा है जिसके पीछे दीवार दिखाई दे रही है, इसीके पीछे राम सीता लक्ष्मण और हनुमान की पारम्परिक मुद्रा में मूर्तियाँ है और हनुमान के पास हाथ जोड़े विभीषण खड़े है। शायद हमारे देश में मन्दिर में विभीषण की मूर्ति इसके अलावा कहीं और नहीं है।

यहाँ से कुछ ही दूरी पर एक खंडहर सा स्थान है। यह एक गाँव था। बताया गया कि यहाँ के लोगों से अंग्रेज़ बँधुआ मज़दूरी करवाते थे। बाद में गाँव उजड़ गया और पत्थरों से बनी इमारतें रह गई थी फिर तूफ़ान में सब नष्ट हो गया और रह गया खंडहर। इस पूरे स्थान को धनुषकोटि कहते है, इस नाम के पीछे पौराणिक कथा है -

राम समुद्र के किनारे बैठे लंका तक पहुँचने के लिए विचार कर रहे थे। समय बीत रहा था और समुद्र देवता उन्हें रास्ता नहीं दे रहे थे। तब राम ने समुद्र को चीरने के लिए धनुष पर बाण चढाया तब घबराए समुद्र देवता प्रकट हुए। तब तक बाण धनुष पर चढ चुका था और बाण छोड़ना अनिवार्य था क्योंकि प्रत्यंचा पर चढने के बाद बाण उतारा नहीं जा सकता था। ऐसे में समुद्र देवता ने कहा कि सामने की चट्टान पर बाण छोड़ने से चट्टान टुकड़े-टुकड़े हो जाएगी और इन्हीं पत्थरों से सेतु बन सकेगा। वही किया गया। इन पत्थरों पर राम नाम लिखा गया जिससे यह पत्थर या शिलाएँ पानी में तैरने लगी और नल और नील के मार्गदर्शन में पुल बनाया गया।

बताया जाता है कि आगे भी रामेश्वरम के धनुषकोटी से श्रीलंका तक बने पुल पर पैदल भी यात्री जाया करते थे। यह दूरी 20 किलोमीटर की मानी जाती थी।

इन शिलाओं की जानकारी और साथ में राम सीता लक्ष्मण हनुमान कुंड की जानकारी अगले चिट्ठे में…

Advertisements

10 टिप्पणियाँ »

  1. बहुत ही सुन्दर वर्णन. चित्र भी सुन्दर लगे. आभार

  2. sachi said

    अगली किश्त की प्रतीक्षा रहेगी |
    सुन्दर लेख….

  3. dr.sharad kr maheshwari said

    sarakar apni aakh khole nastikta ka khel band kare isase adhik sabuto ki jarurat nahi hai…….jai shree ram

  4. Dhawan said

    Jaankari dene ke liye thanks. Bahut achha varnan kiya aapne apni yatra ka. thanks keep it up. Jai shree ram

  5. Ateet said

    Dear sir,
    Apka dhanyabad
    Iswar kare Tamilnadu Sarkar ko Gyan prapt ho,Aur ke Astha per chot karna band kare.
    TN.ke CM ke baap ne bahut kiya jo uska nam karunanidhi rakha uska nam to jems hona chaiye

  6. Shashi kant kumar said

    Very very good, bhut hi achha, Lakh bar sukriya.

  7. RAJESH GUPTA said

    pl give mind to governemnt to do something for this place development

  8. chandrapal said

    shri ram is very poular king

  9. chandrapal said

    ram setu ko bchane ke lia sbi des vacio ko apni purm takth deni chha tbe ram setu ko bchaia ja sktha h

    shekhawat

  10. nandni said

    Bahut acha lekh hai

RSS feed for comments on this post · TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s