मरीना बीच – चेन्नै का समुद्री तट

पिछले सप्ताह हम रामेश्वरम की यात्रा पर गए.

हैदराबाद से सीधे रामेश्वरम के लिए रेल नही है. चेन्नै जाकर वहाँ से दूसरी रेल में यात्रा करनी पड़ती है. इस तरह हम पहले चेन्नै पहुंचे. सवेरे एगमोर (जिसे क्षेत्रीय भाषा में एशुन्मोर कहते है) रेलवे स्टेशन पहुँच गए थे और रामेश्वरम के लिए गाडी शाम में थी सो हम चल पड़े समुद्री तट की ओर.

रेलवे स्टेशन से मरीना बीच लगभग 6 कि.मी दूर है. लंबा रेतीला मैदान पार करने के बाद है समुद्री किनारा. बाई और रास्ता जैसा है जहां दोनों ओर कतार में दुकाने सजी है जिसमे समुद्री संपदा यानी सीप, शंख और मोती की वस्तुएं बिक रही थी जैसे शंख की चूडिया, गले के माले और सीपियों से बने कान में पहने जाने वाले टाप्स, चूडिया, गले के माले, बालो के पिन से लेकर कुमकुम, सिन्दूर की डिबिया तक और सजावट के लैंप शेड, दरवाजे की झालरे. इनमे से सीपियों से तैयार चीजे ज्यादा नाजुक और अच्छी लगी. दाम दस-बीस रूपए से शुरू होकर दो-तीन सौ तक है.

आगे बढ़ने पर है समुद्री तट. यहाँ पर खाने-पीने की चीजे बिक रही थी.

बहुत लंबा है समुद्र तट. बाएँ किनारे काले पत्थरो का ढेर है जिस पर चढ़ कर देखने पर दूसरी ओर भी समुद्र नजर आता है.

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समुद्र में इक्का-दुक्का नावे भी नजर आई. लम्बे समय तक हम यहाँ टहलते रहे. किनारे पर सीपियों के ढेर नजर आए पर सब एक तरफ के खोल थे. एक भी साबुत सीपी नही मिली पर एक सफ़ेद झक मोती मिला लेकिन छेद वाला मोती था. माना जाता है मोती में छेद होने पर उसकी महत्ता कम हो जाती है.

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ख़ैर... एक अच्छा समय बिताने के बाद हम चल पड़े पार्थ सारथी मंदिर की ओर.

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