शिल्पकला का भारत का पहला पौराणिक संग्रहालय – कलाधाम

हैदराबाद से जुड़े नलगोण्डा ज़िले में शिल्प कला का उत्कृष्ट नमूना देखा जा सकता है।

यह पौराणिक संग्रहालय है और भारत का पहला ऐसा स्थान है जहाँ शिल्प कला में पौराणिक संग्रह है। इसे कलाधाम नाम दिया गया है और इसका उदघाटन पिछले दिनों 8 फ़रवरी को आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी ने किया है।

हैदराबाद से यह दो घण्टे की दूरी पर है। भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार के विख्यात मन्दिर यादगीर गुट्टा के रास्ते में है। पिछली जून में यादगीर गुट्टा से लौटते समय हमने यह कलाधाम देखा था पर उस समय यहाँ निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था लेकिन यहाँ के मन्दिर खुले थे। इस पूरे परिसर को सुरेन्द्रपुरी नाम दिया गया था जिससे संबंधित 5 चिट्टे मैं लिख चुकी हूँ।

अब इसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसे कलाधाम नाम दिया गया है और इस परिसर से जुड़े क्षेत्र का नाम सुरेन्द्रपुरी रखा गया है। इसे वास्तव में पौराणिक संग्रहालय का रूप दिया गया है। विभिन्न देवी-देवताओं के मन्दिर भी है। मूर्तियाँ और अन्य रचनाएँ जैसे कैलाश पर्वत, युद्ध की व्यूह रचना आदि शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है। इस पूरे संग्रहालय को देखने में लगभग तीन घण्टे का समय लगता है।

उदघाटन के अगले ही दिन से 200 रूपए प्रवेश शुल्क लगा दिया है। जब पिछले वर्ष हमने देखा था तब निर्माण कार्य अंतिम चरण में था इसीसे प्रवेश शुल्क नहीं था और तस्वीरे लेने की भी रोक नहीं थी। अब तस्वीरें नहीं ली जा सकती। मेरे ऊपर बताए गए चिट्ठों में तस्वीरें देखी जा सकती है।

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3 टिप्पणियाँ »

  1. sameer lal said

    लिंक तो दिजिये, जहाँ तस्वीरें देखें. जानकारी का आभार.

  2. यह तो सचमुच एक अच्छा कदम है। अपनी धरोहर को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी संस्कार है।

  3. Annapurna said

    समीर जी, साइडबार में सूची में कला पर क्लिक करने से चिट्ठे मिल जाएगें।

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