सरस्वती के चरणों में अक्षर अभ्यास

बसन्त पंचमी के दिन बासर के इस सरस्वती मन्दिर का दृश्य निराला होता है।

बाहर बाज़ार में पाटी (स्लेट) कलम तथा पीले और सफ़ेद फूलों का अंबार लगा होता है। केले के पत्तों और फूलों से सजे छोटे-छोटे मंडप भी बिकते है।

मुख्य मन्दिर आँगन में बीचों-बीच है और सामने की ओर यानि प्रवेश द्वार के दाहिने बाएँ दीवार से सटे चबूतरे है। इन्हीं चबूतरों पर नन्हें-मुन्नों से सरस्वती वन्दना करवाई जाती है।

परिवारजन पाटी पर कलम से वर्णमाला के प्रथम चार अक्षर बड़े आकार में ऊपर दो और नीचे दो, हिन्दी या तेलुगु में अ आ इ ई या అ ఆ ఐ ఈ लिखते है और बच्चे इन अक्षरों पर कलम फेरते हुए अक्षर अभ्यास करते है।

कहीं केले के पत्तों और फूलों से सजे छोटे मंडप में सरस्वती की मूर्ति रखकर बच्चों से पूजा की सामग्री चढवा कर फिर अक्षर अभ्यास करवाया जाता है।

इन दोनों ही तरह के अक्षर अभ्यास के लिए टिकट खरीदना पड़ता है जिसमें मंडप पूजा का टिकट कुछ अधिक होता है। इसके अलावा तीसरा और सबसे महंगा टिकट लेने पर पंडित जी मंत्रोच्चार के साथ पूजा करवा कर अक्षर अभ्यास करवाते है।

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1 टिप्पणी »

  1. bahut badhiya janakaripoorn aalekh. abhaar

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