साईंबाबा मन्दिर परिसर में शिरडी गाँव की झलक

शिरडी गाँव में ही साईंबाबा का समाधि मन्दिर है पर इस मन्दिर के निर्माण में शिरडी गाँव अपने मूल रूप में नज़र नहीं आता है।

मन्दिर परिसर में लगे बाज़ार में घूमते-घूमते हम आगे निकल गए और एक किनारे हमारी नज़र पड़ी एक कुएँ पर जिसे आप यहाँ चित्र में देख सकते है -

माना जाता है कि यहाँ बाबा ने लक्ष्मीबाई शिंदे के सहयोग से कुँआ खुदवाया था।

कुएँ के पीछे छोटा पीला घर जो नज़र आ रहा है जिसमें लाल छोटी सी खिड़की है, यही लक्ष्मी बाई शिंदे का घर है। बिल्कुल उसी तरह है जैसा कि उस ज़माने में हुआ करता था। छोटा सा घर दो कमरों का। छ्त इतनी नीची कि हाथ ऊपर करो तो लगता है हाथ छत से लग जाएगें। लम्बाई चौड़ाई भी बहुत ही कम। चार लोग भीतर जाने से पूरा कमरा भर जाए। कमरों में लक्ष्मी बाई और साईंबाबा की तस्वीरें लगी है जिन पर फूलों के हार चढे है।

लक्ष्मी बाई के घर के बाद आगे बढते जाने पर क्रम से उन सबके घर है जो शिरडी में बाबा के साथ थे - बाईजा माँ, उस्मान और यहाँ विशेष रूप से दिखाया जाता है कुलकर्णी का घर क्योंकि पहले वो बाबा के विरोधी रहे थे।

बस बाज़ार के पीछे स्थित यह एक गली कहे या छोटी सी सड़क, यही एक स्थान है जो मूल रूप से शिरडी गाँव की तस्वीर दिखाता है।

आगे के चिट्ठे में प्रसाद की चर्चा…

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3 टिप्पणियाँ »

  1. शिरडी की सैर अच्छी लगी।बहुत सी बातों का पता लगा।

  2. Annapurna said

    धन्यवाद दिनेशराय जी !

  3. tarendra singh said

    wakai sirdi jannat hai

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