साईंबाबा की निजि वस्तुओं का संग्रह और चढावे की बिक्री

शिरडी के साईंबाबा मन्दिर परिसर में साईंबाबा की निजि वस्तुओं का संग्रहालय भी है।

संग्रह की गई इन वस्तुओं में है -

बाबा का भिक्षा पात्र जिसमें वो शिरडी गाँव के घर-घर जाकर भिक्षा लिया करते थे।

वो बड़ा ताँबे का बर्तन जिसमें बाबा खिचड़ी बनाया करते थे। बताया जाता है कि इसे हाँडी कहा जाता था। बाबा भिक्षा में प्राप्त चावल और दाल इस हाँडी में डालकर लकड़ी के चूल्हे पर चढाते थे और खिचड़ी पक गई है या नहीं यह देखने के लिए चूल्हे पर चढी हाँडी में ही हाथ डालते थे और हाथ हाँडी में चलाया करते थे। बाबा की कई तस्वीरों में ऐसी तस्वीर भी बहुत जगह देखने को मिलेगी। जब खिचड़ी पक जाती थी तब सभी को पंगत (पंक्ति) में बिठा कर परोस कर खिलाया करते थे।

बाबा का चोला जो वो रोज़ पहना करते थे।

पंखा जिसे भक्त बाबा के पास झला करते थे।

खड़ाऊ जिसे बाबा कभी-कभार पहना करते थे।

चिलम भी है पर बाबा हुक्का पीते थे ऐसा शायद मैनें नहीं सुना।

संग्रहालय के कक्ष में बीचों-बीच वो पालकी भी रखी है जिसमें बाद के समय में बाबा की शोभायात्रा निकला करती थी। यहीं पर एक सिंहासन भी है जिसे महाराष्ट्र के किसी राजघराने से भेजा गया था जिस पर बाबा कभी नहीं बैठे।

संग्रहालय के पास पुस्तकालय भी है जहाँ बाबा के जीवन चरित्र और आरती, पूजा से संबंधित पुस्तकें, भजनों के आडियो-वीडियो कैसेट और बाबा की तस्वीरें बिक्री के लिए है।

यहाँ एक और कक्ष है जिसमें रोज़ बाबा को चढाई जाने वाली वस्तुएँ आती है जिसमें शाल, कपड़े और रत्न होते है। सरकार की ओर से एक समिति है जो इन चीज़ों का मूल्य तय करती है और इसी मूल्य पर भक्त इन वस्तुओं को प्रसाद की तरह खरीदते है। रत्न खरीदे जाने पर उन रत्नों की शुद्धता का प्रमाणपत्र भी दिया जाता है।

परिसर का कुछ और विवरण अगले चिट्ठे में…

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2 टिप्पणियाँ »

  1. sameerlal said

    बहुत बढ़िया जानकारी, आभार!

  2. Annapurna said

    धन्यवाद समीर जी !

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