अल्ला साईं मौला साईं

पिछले चिट्ठे में हमने द्वारकामाई और उसके पास चावड़ी के बारे में बताया था।

चावड़ी के ठीक सामने है अब्दुल्ला की झोपड़ी -

अब्दुल्ला साईं बाबा के भक्तों में से एक है। यह चावड़ी के सामने रहने वाले ग़रीब अब्दुल्ला की झोपड़ी है जिसे छोटे से कमरे की तरह बना दिया गया है। भीतर अब्दुल्ला की तस्वीर के साथ मक्का-मदीना और क़ुरान की आयतें लिखी तस्वीरें भी लगी है।

मन्दिर के प्राँगण में अब्दुल्ला की समाधि भी है। यहाँ एक सूफ़ी फ़कीर भी बैठते है जो यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के सिर पर झाड़न फेरते है। यहाँ श्रद्धालु समाधि पर चादर भी चढाते है। एक पट्टिका पर उनके निधन की तारिख़ लिखी है। यह मन्दिर का मुख्य भाग है इसीलिए यहाँ फोटो लेने की मनाही है।

चौथे प्रवेश द्वार यानि गेट नं 4 के पास चाँद खाँ की समाधि है -

चाँद खाँ भी बाबा के भक्त है पर वो शिरडी गाँव के नहीं है शायद इसीलिए इनकी समाधि प्रवेश द्वार पर है। इनकी घोड़ी खो गई थी जिसे बाबा ने ढूँढ कर दिया था जिसके बाद से वो भक्त हो गए। बाबा के भक्तों की कहानियों में शायद पहली कहानी चाँद की ही है।

आगे का विवरण अगले चिट्ठे में…

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4 टिप्पणियाँ »

  1. bahut achchi jaankari di hai…shukriya
    is kram ko jaari rakhe

  2. sameerlal said

    आभार जानकारी के लिए.

  3. Annapurna said

    धन्यवाद मनविन्दर जी समीर जी !

  4. "रज़िया" said

    यही तो हमारी आस्था है। यही हमारा हिंदुस्तान है। आभार जानकारी के लिये।

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