श्रीशैलम

पिछले सावन में हमने श्रीशैलम की यात्रा की।

हमने तभी ब्लोगिंग की दुनिया में क़दम रखा था इसीलिए चिट्ठा लिख नहीं पाए थे। अब तो हम रोज़ चिट्ठा लिख लेते है तो सोचा कि क्यों न इस सावन में प्रस्तुत किया जाए उस यात्रा का वर्णन।

आन्ध्र प्रदेश के कर्नूल ज़िले में है श्रीशैलम। वास्तव में देश की पूर्वी घाटियों से समुद्र के कारण पर्वत मालाएं दक्षिण की ओर खिसक आई है। इसमें सात पर्वत है जिनका आकार शेषनाग की तरह माना जाता है जिसका पुच्छ पर्वत यानि की सबसे पीछे नीचे की ओर यानि दक्षिण का पर्वत श्री शैल पर्वत कहलाता है। इसे ही दक्षिण की भाषा में श्रीशैलम कहते है।

श्रीशैलम पर्वत पर बने मन्दिर में स्थापित शिवलिंग मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है जिसका बारह ज्योतिर्लिंगों में चौथा स्थान है। इसे मल्लिकार्जुन स्वामी कहते है। सावन या श्रावण मास में शिवजी की पूजा की जाती है इसीलिए इस महीने में श्रीशैलम की यात्रा की जाती है।

हैदराबाद से श्रीशैलम की यात्रा छह घण्टे में पूरी होती है। हैदराबाद के पुराने शहर बारकस की तंग गलियों को पार करने के बाद जैसे ही शहर और गाँव छूट जाते है आगे का रास्ता अच्छा है। सड़क अच्छी है और दोनों ओर बड़े-बड़े पत्थर देख कर यह अंदाज़ा हो जाता है कि हम पहाड़ी क्षेत्र में बढ रहे है।

अब यह सीधा रास्ता श्रीशैलम ही जाता है। सावन के महीने में श्रीशैलम की यात्रा अच्छी मानी जाती है। इसीलिए इस महीने में बहुत से लोग यात्रा करते है। सड़क पर लगभग सभी तरह के वाहन नज़र आ रहे थे।

रास्ता सिर्फ़ रास्ता ही है, खाने-पीने की कोई दुकान या ढाबा कुछ नहीं है। मगर इसका भी अपना एक सुखद अनुभव रहा। लग रहा था सभी की गाड़ियों में खाने-पीने का सामान है। वैसे भी छह घण्टे तक लगातार गाड़ी नहीं चलाई जा सकती।

रास्ते भर हमने देखा सभी गाड़ियाँ कुछ दूरी के बाद रूकती और किनारे पत्थरों और कुछ बिखरी हरियाली पर कुछ देर बैठते कुछ खाने-पीने का आनन्द लेते और फिर आगे बढ जाते। पूरा रास्ता चढाव है पर असली चढाई तो श्रीशैलम क्षेत्र में प्रवेश के बाद ही शुरू होती है।

जैसे ही प्रवेश करते है सड़क संकरी हो जाती है और दोनों ओर घने जंगल नज़र आते है -

कुछ दूर आगे जाने के बाद दाहिनी ओर वन क्षेत्र है जहाँ शेर है -

इस क्षेत्र में केवल वन विभाग में काम करने वाले और विभाग की ही गाड़ियाँ भीतर जा सकती है। भीतर क्षेत्र कितना बड़ा है कितने शेर है इसकी जानकारी वहाँ के बोर्ड पर नहीं लिखी गई है और पूछने पर भी नहीं बताई गई।

कुछ दूर आगे बढे तो पहली झलक मिली कृष्णा नदी की -

आगे का विवरण अगले चिट्ठे में…

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2 टिप्पणियाँ »

  1. Sameer Lal said

    कृष्णा नदी वाली तस्वीर का दृष्य बड़ा ही मनोहारी है. आगे इन्तजार है..

  2. Annapurna said

    धन्यवाद समीर जी !

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