<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"
		>
<channel>
	<title>Comments for पुरवाई</title>
	<atom:link href="http://purvaai.wordpress.com/comments/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://purvaai.wordpress.com</link>
	<description>कला, संस्कृति, काव्य और सैर-सपाटा</description>
	<lastBuildDate>Tue, 10 Nov 2009 04:03:43 +0000</lastBuildDate>
	<generator>http://wordpress.com/</generator>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
		<item>
		<title>Comment on मौलाली &#8211; उर्स-ए-शरीफ़ का महत्वपूर्ण स्थान by anug</title>
		<link>http://purvaai.wordpress.com/2009/11/09/%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%8f-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a5%9e-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d/#comment-514</link>
		<dc:creator>anug</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Nov 2009 04:03:43 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://purvaai.wordpress.com/?p=3565#comment-514</guid>
		<description>शुक्रिया ज़ैदी साहब इस जानकारी के लिए, वरना मुझ जैसे कितने को ही वहाँ जाकर भी सही जानकारी नहीं मिल पाई।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शुक्रिया ज़ैदी साहब इस जानकारी के लिए, वरना मुझ जैसे कितने को ही वहाँ जाकर भी सही जानकारी नहीं मिल पाई।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on मौलाली &#8211; उर्स-ए-शरीफ़ का महत्वपूर्ण स्थान by Zeashan Zaidi</title>
		<link>http://purvaai.wordpress.com/2009/11/09/%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%8f-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a5%9e-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d/#comment-513</link>
		<dc:creator>Zeashan Zaidi</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Nov 2009 11:01:28 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://purvaai.wordpress.com/?p=3565#comment-513</guid>
		<description>जी हाँ. आपने सही कहा की मुहर्रम का सम्बन्ध कर्बला की लड़ाई से ही है. जिसमें मोहम्मद साहब के नवासे और मौला अली के बेटे हज़रत इमाम हुसैन यजीद के साथ जंग में सच्चाई के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए थे. उन्हीं की याद में ताजिया और अलम निकाला जाता है. 
अब  बात आती है मौला अली के पहाड़ की. उसके बारे में ये कथा है की सोलहवीं शताब्दी के सुलतान इब्राहीम कुली का दरबारी याकूब जो मौला अली का भक्त था, एक दिन उस पहाडी पर गया तो उसने सपने में मौला अली को वहाँ बैठे देखा. जब वह जागा तो उसे वहाँ मौला अली के पैरों का निशान दिखाई दिया. उसके बाद उसने वहाँ मस्जिद बनवाई. उसके बाद वहाँ उर्स मनाने का सिलसिला शुरू हो गया.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जी हाँ. आपने सही कहा की मुहर्रम का सम्बन्ध कर्बला की लड़ाई से ही है. जिसमें मोहम्मद साहब के नवासे और मौला अली के बेटे हज़रत इमाम हुसैन यजीद के साथ जंग में सच्चाई के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए थे. उन्हीं की याद में ताजिया और अलम निकाला जाता है.<br />
अब  बात आती है मौला अली के पहाड़ की. उसके बारे में ये कथा है की सोलहवीं शताब्दी के सुलतान इब्राहीम कुली का दरबारी याकूब जो मौला अली का भक्त था, एक दिन उस पहाडी पर गया तो उसने सपने में मौला अली को वहाँ बैठे देखा. जब वह जागा तो उसे वहाँ मौला अली के पैरों का निशान दिखाई दिया. उसके बाद उसने वहाँ मस्जिद बनवाई. उसके बाद वहाँ उर्स मनाने का सिलसिला शुरू हो गया.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on मौलाली &#8211; उर्स-ए-शरीफ़ का महत्वपूर्ण स्थान by annpurna</title>
		<link>http://purvaai.wordpress.com/2009/11/09/%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%8f-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a5%9e-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d/#comment-512</link>
		<dc:creator>annpurna</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Nov 2009 09:26:48 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://purvaai.wordpress.com/?p=3565#comment-512</guid>
		<description>ज़ैदी साहब, हमें वहाँ जो कथा बताई गई, वही मैनें यहाँ लिखी। इबारत की जगह बताई गई कथा ग़लत हो सकती है, इसका मुझे अंदाज़ा भी नहीं था। वैसे इस तरह की कहानियाँ इतनी आ नहीं होती है कि सबको पता हो।

यहाँ एक और बात बता दीजिए कि मुहर्रम का संबंध भी तो इसी लड़ाई से है जिसमें इमाम हुसैन के ताजिये और (फ़ातिमा) बी का अलम निकाला जाता है। साथ ही उर्स के बारे में संक्षिप्त में बता दीजिए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ज़ैदी साहब, हमें वहाँ जो कथा बताई गई, वही मैनें यहाँ लिखी। इबारत की जगह बताई गई कथा ग़लत हो सकती है, इसका मुझे अंदाज़ा भी नहीं था। वैसे इस तरह की कहानियाँ इतनी आ नहीं होती है कि सबको पता हो।</p>
<p>यहाँ एक और बात बता दीजिए कि मुहर्रम का संबंध भी तो इसी लड़ाई से है जिसमें इमाम हुसैन के ताजिये और (फ़ातिमा) बी का अलम निकाला जाता है। साथ ही उर्स के बारे में संक्षिप्त में बता दीजिए।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>
