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पुरवाई के दो साल

दो साल पहले आज ही के दिन पुरवाई की शुरूवात हुई थी एक बरखा गीत से।

शुरू में मेरी साहित्यिक रूचि बहुत उभर कर आई और चिट्ठों में हिन्दी साहित्य से काव्य की भरमार होने लगी। यहाँ तक कि अंताक्षरी भी रखी गई। साथ में मेरा घूमने फिरने का शौक भी सामने आया। जिन-जिन स्थानों का मैनें भ्रमण किया, जहाँ जैसा देखा वैसा ही लिख दिया चित्रों सहित। यह पर्यटन संबंधी चिट्ठे बन गए।

धीरे-धीरे इन पर्यटन संबंधी चिट्ठों की संख्या बढती जा रही है। इन दो सालों में पुरवाई को तेरह हजार से अधिक बार पढा गया। अब पुरवाई पर साहित्यिक रचनाएँ प्रस्तुत करना विषयांतर लग रहा है। इसीलिए मैनें सोचा कि अपनी साहित्यिक रूचि को मैं अलग ब्लोग में क्यों न रखूँ…

यही सोच कर पुरवाई के दो साल पूरे होने के अवसर पर मैं साहित्य के साथ एक नया ब्लोग शुरू कर रही - अंताक्षरी

इसमें हिन्दी साहित्य से काव्य रचनाएँ अंताक्षरी के क्रम में होगी। वैसे तो अंताक्षरी में आरंभि 4 पंक्तियाँ ही होती है पर यहाँ तो रूचि की बात है इसीलिए रचनाएँ पूरी रहेगी ताकि साहित्य का पूरा आनन्द लिया जा सकें।

तो कल निकलेगा ब्लोग - अंताक्षरी

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शिल्पकला का भारत का पहला पौराणिक संग्रहालय – कलाधाम

हैदराबाद से जुड़े नलगोण्डा ज़िले में शिल्प कला का उत्कृष्ट नमूना देखा जा सकता है।

यह पौराणिक संग्रहालय है और भारत का पहला ऐसा स्थान है जहाँ शिल्प कला में पौराणिक संग्रह है। इसे कलाधाम नाम दिया गया है और इसका उदघाटन पिछले दिनों 8 फ़रवरी को आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी ने किया है।

हैदराबाद से यह दो घण्टे की दूरी पर है। भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार के विख्यात मन्दिर यादगीर गुट्टा के रास्ते में है। पिछली जून में यादगीर गुट्टा से लौटते समय हमने यह कलाधाम देखा था पर उस समय यहाँ निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था लेकिन यहाँ के मन्दिर खुले थे। इस पूरे परिसर को सुरेन्द्रपुरी नाम दिया गया था जिससे संबंधित 5 चिट्टे मैं लिख चुकी हूँ।

अब इसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसे कलाधाम नाम दिया गया है और इस परिसर से जुड़े क्षेत्र का नाम सुरेन्द्रपुरी रखा गया है। इसे वास्तव में पौराणिक संग्रहालय का रूप दिया गया है। विभिन्न देवी-देवताओं के मन्दिर भी है। मूर्तियाँ और अन्य रचनाएँ जैसे कैलाश पर्वत, युद्ध की व्यूह रचना आदि शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है। इस पूरे संग्रहालय को देखने में लगभग तीन घण्टे का समय लगता है।

उदघाटन के अगले ही दिन से 200 रूपए प्रवेश शुल्क लगा दिया है। जब पिछले वर्ष हमने देखा था तब निर्माण कार्य अंतिम चरण में था इसीसे प्रवेश शुल्क नहीं था और तस्वीरे लेने की भी रोक नहीं थी। अब तस्वीरें नहीं ली जा सकती। मेरे ऊपर बताए गए चिट्ठों में तस्वीरें देखी जा सकती है।

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वैद्य अमीर खुसरो

अमीर खुसरो जी को साहित्यकार, राजनीतिज्ञ और सूफी संत के बारे में सभी जानते है. आज प्रस्तुत है अमीर खुसरो का वैद्य रूप.

गीत, पहेलियाँ, मुकरिया तो उनके प्रसिद्द है ही, आज प्रस्तुत है चंद ऐसे दोहे जिसमें घरेलु नुस्के है -

त्रि कटा त्रिफला, पांचो नमक पतंग
दांत बंजर हो जात है मांज लो फल के संग

हरडा बहेडा आंवला तीनो नॉन पतंग
दांत बंजर सो होत है मांजू फल के संग

प्रात काल खाट से उठ के तुरत पीए जो पानी
वा घर वैद्य कबहू न जावे बात खुसरो ने जानी

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