दो साल पहले आज ही के दिन पुरवाई की शुरूवात हुई थी एक बरखा गीत से।
शुरू में मेरी साहित्यिक रूचि बहुत उभर कर आई और चिट्ठों में हिन्दी साहित्य से काव्य की भरमार होने लगी। यहाँ तक कि अंताक्षरी भी रखी गई। साथ में मेरा घूमने फिरने का शौक भी सामने आया। जिन-जिन स्थानों का मैनें भ्रमण किया, जहाँ जैसा देखा वैसा ही लिख दिया चित्रों सहित। यह पर्यटन संबंधी चिट्ठे बन गए।
धीरे-धीरे इन पर्यटन संबंधी चिट्ठों की संख्या बढती जा रही है। इन दो सालों में पुरवाई को तेरह हजार से अधिक बार पढा गया। अब पुरवाई पर साहित्यिक रचनाएँ प्रस्तुत करना विषयांतर लग रहा है। इसीलिए मैनें सोचा कि अपनी साहित्यिक रूचि को मैं अलग ब्लोग में क्यों न रखूँ…
यही सोच कर पुरवाई के दो साल पूरे होने के अवसर पर मैं साहित्य के साथ एक नया ब्लोग शुरू कर रही - अंताक्षरी
इसमें हिन्दी साहित्य से काव्य रचनाएँ अंताक्षरी के क्रम में होगी। वैसे तो अंताक्षरी में आरंभि 4 पंक्तियाँ ही होती है पर यहाँ तो रूचि की बात है इसीलिए रचनाएँ पूरी रहेगी ताकि साहित्य का पूरा आनन्द लिया जा सकें।
तो कल निकलेगा ब्लोग - अंताक्षरी