Archive for साहित्य से फ़िल्मी

काहे को ब्याहे बिदेस

साहित्य से जिन रचनाओं को फ़िल्मों में लिया गया है उनमें से आज प्रस्तुत है अमीर ख़ुसरो की रचना।

इसे उमराव जान फ़िल्म में रखा गया और इसे गायिका जगजीत कौर ने अपनी आवाज़ दी है। कुछ पंक्तियों में बदलाव है। फ़िल्मी गीत की इन बदली पंक्तियों को कोष्ठक में दिया गया है। -

काहे को ब्याहे बिदेस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियाँ
घर-घर माँगे हैं जैहें
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

हम तो हैं बाबुल तोरे पिंजरे की चिड़ियाँ
भोर भये उड़ जैहें (अरे कुहुक कुहुक रह जाए)
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

कोठे तले से पलकिया जो निकली (महलां तले से डोला जो निकला)
बीरन में छाए पछाड़
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

भैया को दियो बाबुल महले दो-महले
हमको दियो परदेस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

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प्रेम दीवानी मीरा

साहित्य के पदों को फ़िल्मों में गीत की तरह रखने की शुरूवात मीरा के पदों से हुई।

मीरा के पद गेय तो थे ही साथ में इसका विषय प्रेम फ़िल्मों के लिए अधिक उपयुक्त रहा। लता मंगेशकर, वाणी जयराम के साथ-साथ अन्य कलाकारों ने भी मीरा की अलग-अलग भक्ति रचनाओं को अपना स्वर दिया जिनमें से गुलज़ार की फ़िल्म मीरा में वाणी जयराम का गाया यह भक्ति गीत भी बहुत लोकप्रिय हुआ -

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।

घायल की गति घायल जाणै, जो कोई घायल होय।
जौहरि की गति जौहरी जाणै, की जिन जौहर होय।
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।

सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस बिध होय।
गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिध मिलणा होय।
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।

दरद की मारी बन-बन डोलूँ बैद मिल्या नहिं कोय।
मीरा की प्रभु पीर मिटेगी, जद बैद सांवरिया होय।
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।

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कोई गाता मैं सो जाता

गीतों की पुरवाई में आज डा हरिवंश राय बच्चन का लिखा एक गीत मैं प्रस्तुत कर रही हूं जो मुझे बहुत पसन्द है।

ये गीत पढना बहुत अच्छा लगता है, उससे भी ज्यादा अच्छा लगता है इस गीत को यसुदास की आवाज़ में सुनना और सबसे अच्छा लगता है इस गीत को आलाप फ़िल्म में सुनना।

आप भी इस गीत का आनन्द लीजिए -

कोई गाता मैं सो जाता

संसृति के विस्तृत सागर में
सपनों की नौका के अंदर
दुःख सुख की लहरों में उठ गिर
बहता जाता, मैं सो जाता ।

आँखों में भर कर प्यार अमर
आशीष हथेली में भर कर
कोई मेरा सिर गोदी में रख
सहलाता, मैं सो जाता ।

मेरे जीवन का खारा जल
मेरे जीवन का हालाहल
कोई अपने स्वर में मधुमय कर
बरसाता, मैं सो जाता ।

कोई गाता मैं सो जाता
मैं सो जाता
मैं सो जाता ।

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