Archive for मन्दिर

केसरगुट्टा मन्दिर के दामन में उद्यान

पिछले चिट्ठे में मैनें बताया आन्ध्र प्रदेश के केसरगुट्टा के शिव मन्दिर के बारे में जहाँ श्रावण मास में पूजा का महत्व है।

श्रावण की पूजा के बाद सावन का आनन्द लेने के लिए मन्दिर की पहाड़ी के दामन है ख़ूबसूरत उद्यान जिसके ऊपर पहाड़ी से दिखते कमल सरोवर की तस्वीर भी हम पिछले चिट्ठे में दिखा चुके।

पूजा समाप्त करने के बाद हम पहाड़ी से नीचे आए और उद्यान में प्रवेश कर गए। प्रवेश करते ही सामने है शिव पार्वती गणेश और कार्तिकेय यानि पूरे परिवार की सुन्दर मूर्तियाँ -

03310028

और इन मूर्तियों के सामने बड़ी मूर्ति नन्दी की भी है। पूरे उद्यान में हरियाली फैली है -

03310024

सुन्दर रंगबिरंगे फूलों और बिना फूलों के ऊँचे घने वृक्ष और पौधे थोड़ी-थोड़ी दूर पर उद्यान की शोभा बढा रहे है। -

03310026

बाईं ओर एक रेस्तराँ भी है। दाहिनी ओर से आगे झूलें लगे है -

03310034

यहीं आगे है कमल सरोवर जो ऊपर मन्दिर से दिख रहा था जिसमें बहुत से गुलाबी और सफ़ेद कमल खिले थे। सरोवर के पास तक जाने की मनाही है, पर वहाँ के चौकीदार सुन्दर कमल अनुरोध पर सबको दे रहे थे।

सामने ऊपर देखने पर नज़र आया पहाड़ और चोटी पर मन्दिर -

03310022

यहाँ एक बात बहुत अच्छी लगी। कुछ परिवारों के लोग मिलकर आए थे जो ऊपर पूजा करने के बाद नीचे उद्यान में अपने-अपने घरों से लाया भोजन सब मिलकर नीचे पंक्ति में बैठकर खा रहे थे। बहुत बड़ा समूह था। आजकल भारतीय परम्परा के ऐसे नज़ारे बहुत कम ही देखने को मिलते है।

एक अच्छा समय यहाँ बिताने के बाद और श्रावण की पूजा तथा सावन का आनन्द लेकर हम लौट आए।

Comments (1)

केसरगुट्टा का शिव मन्दिर

आन्ध्रप्रदेश में केसरगुट्टा के शिव मन्दिर की बहुत मान्यता है। श्रावण मास में यहाँ बहुत श्रृद्धालु आते है। इस श्रावण में हम भी पहुँच गए।

यह नलगोण्डा ज़िले में है और हैदराबाद से डेढ घण्टे की दूरी पर है। ऊँचे पहाड़ पर स्थित है यह मन्दिर जैसा कि नाम से ही पता चलता है, तेलुगु भाषा में गुट्टा पहाड़ को कहते है और केसर नाम हनुमानजी के लिए है। पहाड़ की चोटी पर हनुनानजी की ऊँची मूर्ति है जो बहुत दूर से नज़र आती है। हनुमानजी और शिव मन्दिर के पीछे क्या पौराणिक कथा है, इसकी हमें जानकारी नहीं है।

मन्दिर तक पहुँचने के लिए लगभग दो किलोमीटर की बहुत चढाई है। मन्दिर की पहाड़ी भी बहुत ऊँची है, एक ओर गाड़ियों के लिए रास्ता है और दूसरी ओर सीढियाँ है।

यह है मन्दिर का द्वार -

03310008

चूँकि इस मन्दिर का संबंध हनुमानजी से है इसीलिए यहाँ बन्दर बहुत है। मन्दिर परिसर के भीतर और मुख्य मन्दिर के बाहर पूजापा बिकता है। पूजापा लेकर संभल कर मन्दिर में जाना पड़ता है क्योंकि ज़रा सी चूक हुई और हाथ से पूजापा बन्दर छीन ले जाते है।

मुख्य मन्दिर में प्रवेश करते है, यह है हाल जिसकी दीवारों पर पौराणिक चरित्रों की उम्दा कलाकृतियाँ बनी है -

03310004

सामने गर्भगृह में है शिवलिंग। बाएं दाएं गणेश जी और कार्तिकेय के छोटे मन्दिर है जिससे पहले प्रथम देवता गणेशजी के दर्शन कर शिवजी के दर्शन कर सके। हाल में दाहिनी ओर बीच में गर्भगृह में पार्वतीजी की प्रतिमा है। यहाँ पूजा अर्चना करने के लिए हाल के द्वार पर लगे काउंटर से टिकट लेना पड़ता है। मुख्य हाल से बाहर निकलने के बाद पीछे की ओर अन्य देवी देवताओं के मन्दिर है।

पीछे दाहिनी ओर दुर्गा माँ का मन्दिर है। यहाँ मूर्ति के अलावा बाहर एक झूला है जिस पर दुर्गा माँ की तस्वीर है इसके चारों ओर काँच लगे है जिनमें विभिन्न कोणों से यह तस्वीर नज़र आती है, कहीं क्रम से एक से अधिक छवियाँ नज़र आती है। श्रृद्धालु यहाँ झूला देते है और इन नज़ारों का आनन्द लेते है -

03310002

और पीछे चढकर जाने पर एक हाल में राम सीता लक्ष्मण की पारम्परिक छवि की मूर्तियाँ है। विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति है, कृष्ण वेणुगोपाल रूप में विराजमान है।

सभी देवी-देवताओं के दर्शन कर हम वापस मुख्य मन्दिर के द्वार पर लौट आए। यहाँ से सामने नज़र आई ऊँची हनुमानजी की मूर्ति जो नीचे रास्ते में दूर से ही नज़र आ रही थी। यह मूर्ति पहाड़ पर इस तरह से स्थापित है कि हनुमानजी का मुख मुख्य शिवमन्दिर की ओर है -

03310018

विशाल मूर्ति तक जाने के लिए कुछ सीढियाँ चढना पड़ता है। मूर्ति के चारों ओर नीचे थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कई शिवलिंग है -

03310017

यहीं पर पंचमुखी हनुमानजी का मन्दिर है।

यहाँ से पीछे की ओर पहाड़ से ढलान शुरू होती है। इस पहाड़ के दामन में है एक सरोवर जहाँ बहुत से कमल खिले है। सरोवर हल्का सा नीचे तस्वीर में नज़र आ रहा है। यहीं है बगीचा जहाँ सावन का आनन्द लिया जाता है। लेकिन पहाड़ी से उतर कर यहाँ नहीं जा सकते, नीचे काँटों की बाड़ लगा दी गई है -

03310013

बाहर से जिस रास्ते से मन्दिर आए थे वहीं से लौटते हुए बगीचे में जाने के लिए रास्ता है।

इस बगीचे की जानकारी अगले चिट्ठे में…

Comments (3)

बौद्ध मन्दिर

अमरावती में अंतिम छोर पर स्थित अमरेश्वर मन्दिर के दाहिनी ओर है कृष्णा नदी का तट और बाई ओर से थोड़ा आगे बढने पर है बौद्ध मन्दिर जो निर्माणाधीन है -

04170017

अमरेश्वर मन्दिर से निकल कर हम पैदल चल कर पहुँचे बौद्ध मन्दिर जो अभी बना नहीं है। निर्माण कार्य चल रहा है। यह भी अमरेश्वर मन्दिर की तरह कृष्णा नदी के तट पर है जैसा कि इस तस्वीर में देखा जा सकता है दाहिनी ओर मन्दिर की बनती इमारत और बाईं ओर नदी -

04170020

केवल गौतम बुद्ध की मूर्ति पूरी तरह से तैयार है जो भवन में सामने ऊँचाई पर स्थापित है -

Lal128

विभिन्न कक्ष बनाए जा रहे है। एक कक्ष के द्वार पर बौद्ध काल की पारम्परिक मुद्रा में एक लेटी हुई प्रतिमा है -

04170019

अभी देखकर लग रहा है कि पूरा बनने पर यह बौद्ध मन्दिर बहुत अच्छा लगेगा -

04170016

यहाँ से हम बौद्ध विहार देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में…

Comments (1)

Older Posts »