जम्मू से हम दिल्ली लौट आए. दिल्ली में हमने देखा अक्षरधाम मंदिर.
बहुत बड़ा परिसर हैं -
बड़ा मैदानी भाग पार करने के बाद भीतरी परिसर में जा सकते हैं -
जिसके पहले अपना सामान रखवाना पड़ता हैं, केवल छोटे मनी पर्स और पारदर्शी पानी की बोतले ही भीतर ले जाई जा सकती हैं. इसके बाद सुरक्षा जांच के बाद भीतरी परिसर में जा सकते हैं.
बाहर से दूर दिखाई देता मंदिर का कलश -
बहुत भव्य और कलात्मक ईमारत हैं. लेकिन कैमरे में कैद करने की मनाही हैं. हाँ.. दो-तीन मुख्य बिन्दुओं पर प्रोफेशनल फोटोग्राफरों से तस्वीरे खिंचवा सकते हैं.
पानी के कुण्ड बहुत सुन्दर लगे जिसके एक किनारे थोड़ी-थोड़ी दूरी पर हाथी और एक किनारे हंसों की मूर्तियाँ हैं जिनसे पानी कुण्ड में गिर रहा था.
यह धर्म गुरू स्वामी नारायण का मंदिर हैं. एक बड़े कक्ष में उनकी मूर्ति रखी हैं जिस का श्र्द्धालु अभिषेक भी कर सकते हैं. कुछ पैसे जमा करने हैं जिसके बाद एक छोटे कलश में पानी दिया जाता हैं अभिषेक के लिए.
गर्भ गृह बहुत आकर्षक हैं. बीचो-बीच स्वामी नारायण की विशाल मूर्ति हैं. गुम्बद बेहद कलात्मक और रत्न जटित हैं. चारो ओर पौराणिक युगल चरित्रों की मूर्तियाँ हैं - राम-सीता, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती
एक लॉन बहुत ही सुन्दर हैं जिसे ह्रदय कमल कहा जाता हैं. कमल की बड़ी आकृति हैं. हर पंखडी में सीढियां हैं जो नीचे बीच के भाग में मिलती हैं. इसके आगे अल्पाहार गृह हैं जहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर को बनाए रखने के लिए देशी-विदेशी व्यंजन हैं. एक कक्ष में धार्मिक और आयुर्वेदिक चीजों का बाज़ार भी सजा हैं.
यह देखने के बाद हम दिल्ली से हैदराबाद लौट आए....













