दक्षिण की पौराणिक नगरी मदुरै में माना जाता है कि नायक वंश का दो सौ वर्षों तक शासन रहा।
यह है नायक वंश के नायको का महल यानि नयक्कार महल -

यह महल तिरूप्परंकुन्रम मन्दिर से थोड़ी ही दूर पर है। यह महल देखने के लिए 20 रूपए का टिकट है। बताया गया कि यह राशि महल तैयार करने में लगाई जाएगी।
वास्तव में यह मूल भवन नहीं है। मूल भवन तो शत्रुओं के आक्रमणों से नष्ट हो चुका। यहाँ मूल भवन जैसा ही भवन तैयार किया जा रहा है। भीतर हमने देखा काम चल रहा था। कतार में स्तम्भ ही स्तम्भ थे। स्तम्भ तो अच्छे लग रहे थे पर सीमेंट में और पुरानी शिल्पकारी में महाअंतर होता है।
देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कोई शौकीन धनाढ्य अपना आधुनिक महल तैयार कर रहा है। इससे तो अच्छा होता मूल भवन के अवशेष वैसे ही रखते जिसे देखकर कम से कम मूल भवन का अंदाज़ा तो लगता।
यह महल देखने के बाद हम वापस पहुँचे रामेश्वरम बस यात्रा से पामबन पुल से होकर। एक और दिन रामेश्वरम में रूकने के बाद हम हैदराबाद लौट आए।

