औरंगाबाद का प्रसिद्ध मंदिर हैं - घ्रशणेश्वर मंदिर -
यह शिव मंदिर हैं। मंदिर अन्य मंदिरों जैसा ही हैं पर यहाँ की विधा निराली हैं।
भीतर गर्भ गृह में शिव लिंग हैं जो आकार-प्रकार में सामान्य हैं। यहाँ पूजा के लिए कोई पुजारी नही हैं। श्रद्धालु बाहर सजी दुकानों से अभिषेक की सारी सामग्री खरीद लाते हैं। यह पूजापा श्रृद्धालु स्वयं शिवलिंग पर चढ़ा कर पूजा करते हैं लेकिन यह पूजा महिलाएं नही कर सकती केवल पुरूष ही करते हैं। पुरूषों को अपने ऊपरी वस्त्र निकाल कर गर्भगृह के बाहर ही रखने होते हैं।
पुरूष स्वयं पूजा करते हैं, महिलाएं वहां पूजा में शामिल होती हैं और शिवलिंग को छूकर, वहां के जल का तीर्थ भी ले सकती हैं। इस तरह यहाँ स्वयं पूजा करने का आत्मिक संतोष मिलता हैं।
घ्रशणेश्वर मंदिर देखने के बाद हम हनुमान मंदिर गए -
यहाँ हनुमानजी विश्राम मुद्रा में हैं। हनुमानजी की लेटी हुई मूर्ति हैं। गर्भ गृह भी बड़ा हॉल जैसा हैं जिसके बीच में मूर्ति हैं और चारो ओर रेलिंग हैं। पीपल के पत्तो से बने हारो में सजी मूर्ति मोहक हैं। शनिवार होने से उस दिन भीड़ भी बहुत थी।
हनुमान मंदिर के बाद हम बालाजी मंदिर गए। ऊंचाई पर हैं यह मंदिर। आंध्र प्रदेश में स्थित तिरूपति बालाजी मंदिर की तरह ही हैं -
इसके बाद हम औरंगाबाद से निकले और पहुंचे नासिक जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में...



