पिछले दिनों हम सैर पर निकले और पहुंचे औरंगाबाद। सबसे पहले हम अजन्ता देखने पहुंचे जो औरंगाबाद से 100 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
पूरा रास्ता चढ़ाई का हैं। वहां पहुँच कर टिकट लेने के बाद सामने एक छोटा सा शापिंग केंद्र हैं जहां सजावटी सामान, बैग, टोपियाँ, चूड़ी, हार जैसी वस्तुओ के साथ खाने-पीने की चीजे भी हैं। यही से बस मिलती हैं गुफाओं तक जाने के लिए जिसके लिए प्रति व्यक्ति सात रूपए का टिकट हैं।
10 मिनट में वहां पहुँच गए हम। यह देखिए आरंभिक बिंदु -
यहाँ से शुरू हैं गुफाओं की ओर जाने का रास्ता -
चौथी और छठी शताब्दी की यह गुफाएं बौद्ध धर्म को दर्शाती हैं। कुल 29 गुफाएं हैं जिनमे से कुछ खाली हैं। कुछ गुफाएं हिन्दू देवी देवताओं को समर्पित हैं।
पूरी संरचना गोलाकार हैं, पर अर्ध गोलाकार में गुफाएं हैं। गुफाएं देखने के लिए सीढियां चढ़ना उतरना हैं।
हर गुफा के पास एक बोर्ड हैं जिस पर हिन्दी और अंग्रेजी में गुफा की संख्या और गुफा के बारे में लिखा हैं।
वास्तव में अजन्ता की अब खासियत ही नही बची हैं। यहाँ की खासियत हैं भित्ती चित्र - दीवारों पर की गई चित्रकारी जो किसी भी गुफा में पूरी तरह से नजर नही आ रही। कही-कही कुछ चित्र नजर आ रहे हैं -
कुछ और जानकारी अगले चिट्ठे में.../





