Archive for अजन्ता एलोरा

एलोरा के मंदिर

एलोरा में अंतिम 4 गुफाएं हिन्दू धर्म को समर्पित हैं।

इनमे शिव, पार्वती, गणेश, नंदी और उस दौर की कथाएँ बताती मूर्तियाँ हैं, कई मूर्तियाँ टूट रही हैं -

दीवारों को भी तराश कर मूर्तियाँ जड़ी गई हैं, जो पौराणिक कथाएँ बताती हैं -

एक गुफा रावण की गुफा कहलाती हैं। इस गुफा की मूर्ति कला रावण के समय की कला हैं।

एक दुमंजिला मंदिर हैं -

भीतर मंदिर जैसा ही हैं -

राम कथा बताती मूर्तियाँ हैं -

एलोरा देखने के बाद हम ऐतिहासिक स्थल देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में....

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एलोरा की गुफाएं

औरंगाबाद से 30 किलोमीटर की दूरी पर हैं एलोरा की गुफाएं।

सभी गुफाएं एक ही कतार में हैं।

अजन्ता और एलोरा दोनों ही जगह पत्थर की सीढियां उतरना चढ़ना और उस उबड़-खाबड़ रास्ते पर चलना कठिन हैं इसीलिए अजन्ता में पालकी की व्यवस्था हैं, चार कहार पालकी ढ़ोते हैं जिन्हें तकलीफ हैं वे पैसे दे कर पालकी की सुविधा लेते हैं। एलोरा में ऑटो रिक्शा चलते हैं जिसकी सुविधा ली जा सकती हैं।

गुफाओं के दूसरी ओर सड़क हैं जिससे ऑटो एक गुफा तक ले जाते हैं वहां से 3-4 गुफाए देखी जा सकती हैं। फिर सड़क से एक और गुफा तक ले जाते हैं वहा से भी 3-4 गुफाएं देखी जा सकती हैं। इस तरह आधी गुफाएं देख सकते हैं। लेकिन आरम्भ की गुफाएं आपको पैदल ही देखनी हैं जिनमे से अधिकाँश खाली हैं।

अजन्ता की गुफाएं पुरानी हैं एलोरा की गुफाएं उसके बाद की हैं। अजन्ता की गुफाओं की विशेषता भित्ति चित्र हैं और एलोरा की गुफाओं की विशेषता पत्थरो को तराश कर बनाई गई मूर्तियाँ हैं।

एलोरा में कुल 29 गुफाएं हैं। कुछ बुद्ध जैन धर्म को समर्पित हैं, कुछ गुफाएं खाली हैं। कुछ गुफाओं में कलात्मक स्तम्भ हैं -

एक गुफा की ऊपर की मंजिल को संगीत कक्ष बताया गया पर यहाँ कुछ विशेष नही लगा पर एक गुफा के कलात्मक स्तम्भ संगीतमय थे। स्तंभों पर उंगलियाँ चलाने सुर उभर रहे थे।

गुफाओं मैं बुद्ध, महावीर की मूर्तियाँ हैं। दीवारों को भी तराश कर मूर्तियाँ जड़ी गई हैं।

यहाँ भी हर गुफा के सामने एक बोर्ड पर गुफा की संख्या और विवरण लिखा हैं।

हिन्दू धर्म को समर्पित गुफाएं मंदिर की तरह हैं जिनकी चर्चा अगले चिट्ठे में....

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अजन्ता की गुफाएं

पिछले चिट्ठे में अजन्ता पहुचने और वहां की गुफाओं की कुछ चर्चा की थी जिसे अब आगे बढाते हैं।

कुछ गुफाएं दुमंजिली हैं -

अजन्ता की लगभग हर गुफा में बीच में गौतम बुद्ध की मूर्ति हैं -

एक दो गुफाओं में मूर्ति के स्थान पर स्तूप हैं -

एकाध गुफा में महावीर भगवान की मूर्ति हैं। स्तूप और महावीर की गुफाओं में छत की बनावट भी कलात्मक हैं और गुम्बद जैसी है -

एक गुफा में बुद्ध की मूर्ति शेष शैय्या पर लेटे विष्णु की तरह हैं। पर यह किनारे पर हैं और गलियारे में होने से चित्र लेना कठिन हो गया।

कुछ गुफाओं में दीवारों पर कुछ भी नही हैं। साफ़ सपाट दीवारों में भीतर की ओर छोटी-छोटी कंदराएं बनी हैं जहां ध्यान लगाया ( मेडिटेशन क़िया) जाता था। इस तस्वीर में दो कंदराएं देखी जा सकती हैं -

इनमे भीतर एक जगह हमने देखा कुछ महिलाएं कुछ देर के लिए ध्यान मग्न बैठी रही। एकाध कन्दरा में भीतर पत्थर का चबूतरा सा दिखा।

शुरू की तीन चार गुफाओं के बाद सामने यानि बाई ओर से एक पुल जाता हैं। इस पुल से दूसरी ओर पहुँच कर पैदल बाहर भी निकला जा सकता हैं और ऊपर सीढियां चढ़ते हुए शीर्ष यानि टाप ऑफ द हिल पर पहुंचा जा सकता हैं। यह शीर्ष ऊपर छतरी की तरह हैं। यही शीर्ष से पहाड़ काट कर गुफाएं बनाना और कलाकारी शुरू करते हुए नीचे तक बनाते आए थे। गुफाओं में मूर्तियाँ ही नही हैं बल्कि पत्थर की दीवारों को भी तराश कर मूर्तियाँ जड़ी गई हैं।

सभी गुफाए देखने के बाद हम फिर बस से आरंभिक बिंदु पर लौट आए। यहाँ अजन्ता रेस्तरां में हमने खाना खाया। यह एक ही रेस्तरां हैं। यहाँ का खाना और माहौल दोनों अच्छा लगा। भीतर गुफाएं देखने जाते समय कुछ लोग भेलपुरी बना कर दस रूपए में एक पैकेट बेच रहे थे, यह एक ही चीज भीतर ले जाई जाती हैं और भीतर पुल के पास खीरा बेचने वाले और महिलाओं के लिए माला, बुँदे बेचने वाले एकाध लोग दिखे।

अगले चिट्ठे में एलोरा…

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विश्व धरोहर – अजन्ता एलोरा – देखिए अजन्ता

पिछले दिनों हम सैर पर निकले और पहुंचे औरंगाबाद। सबसे पहले हम अजन्ता देखने पहुंचे जो औरंगाबाद से 100 किलोमीटर की दूरी पर हैं।

पूरा रास्ता चढ़ाई का हैं। वहां पहुँच कर टिकट लेने के बाद सामने एक छोटा सा शापिंग केंद्र हैं जहां सजावटी सामान, बैग, टोपियाँ, चूड़ी, हार जैसी वस्तुओ के साथ खाने-पीने की चीजे भी हैं। यही से बस मिलती हैं गुफाओं तक जाने के लिए जिसके लिए प्रति व्यक्ति सात रूपए का टिकट हैं।

10 मिनट में वहां पहुँच गए हम। यह देखिए आरंभिक बिंदु -

यहाँ से शुरू हैं गुफाओं की ओर जाने का रास्ता -

चौथी और छठी शताब्दी की यह गुफाएं बौद्ध धर्म को दर्शाती हैं। कुल 29 गुफाएं हैं जिनमे से कुछ खाली हैं। कुछ गुफाएं हिन्दू देवी देवताओं को समर्पित हैं।

पूरी संरचना गोलाकार हैं, पर अर्ध गोलाकार में गुफाएं हैं। गुफाएं देखने के लिए सीढियां चढ़ना उतरना हैं।

हर गुफा के पास एक बोर्ड हैं जिस पर हिन्दी और अंग्रेजी में गुफा की संख्या और गुफा के बारे में लिखा हैं।

वास्तव में अजन्ता की अब खासियत ही नही बची हैं। यहाँ की खासियत हैं भित्ती चित्र - दीवारों पर की गई चित्रकारी जो किसी भी गुफा में पूरी तरह से नजर नही आ रही। कही-कही कुछ चित्र नजर आ रहे हैं -

कुछ और जानकारी अगले चिट्ठे में.../

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