भद्राचलम के पेरेंटपल्ली गाँव में पहाडी पर स्थित हैं राम कृष्ण परमहंस मठ द्वारा स्थापित छोटा सा शिव मंदिर.
इस मंदिर को देखने हम नदी के रास्ते बोट से गए. बोट से दो घंटे की यात्रा पूरी करने के बाद हम नदी के तट पर बने इस गाँव में पहुंचे. तट से पचास सीढियां चढ़ कर हम पहाडी पर पहुंचे. रास्ते भर गाँव के लोंग लकड़ी के बने कलात्मक फूल और फूलदान बेचते मिले. गाँव वालों द्वारा की गई बहुत सुन्दर कारीगरी हैं.
ऊपर छोटा सा जल प्रपात देखा -
यहीं हैं छोटा सा शिव मंदिर -
एक गर्भ गृह में शिव लिंग हैं और दूसरे गर्भ गृह में राम कृष्ण परमहंस की मूर्ति.
यहाँ से हमने बोट से और आगे एक घंटे की यात्रा की और पहुंचे कुल्लूर गाँव. हम गाँव तक नही गए. नदी में ही जजीरे पर भोजन किया. यहाँ अच्छा लगा. चारो ओर बहती नदी और बीच के स्थान पर भोजन करना अच्छा लगा. यह स्थान तेलंगाना की सीमा हैं, यहाँ से आंध्रा शुरू होता हैं.
यहाँ से नदी में दूसरी दिशा से लौटते हमने देखा पाप कुण्ड. यहाँ नदी में पानी बहुत गहरा हैं और किनारे पर पहाड़ सीधा हैं. कही-कही हरा-भरा पहाड़ है और कही मूल रूप में पर कही भी ऐसा बिंदु नही हैं जहां ठहराव हैं -
इसीलिए इसे पाप कुण्ड कहा गया. नदी में सावधानी से बोट में से पाप कुण्ड का हमने चक्कर लगाया.
फिर लगभग चार घंटे की बोट से यात्रा कर हम सांझ ढले भद्राचलम लौट आए. इसके बाद हम वापस हैदराबाद लौट आए.



