भद्राचलम में रामालय से लगभग एक घंटे की दूरी पर हैं पर्णशाला जिसे पनशाला या पनसाला भी कहते हैं.
गोदावरी नदी के किनारे बसा पर्णशाला ही यहाँ का मुख्य स्थल हैं. प्रमुख जगह भूमि का यह छोटा सा टुकड़ा -
कुछ लोंग इसी को सीता हरण का मुख्य स्थल मानते हैं. रावण ने हरण कुटिया के बाहर से ही किया था पर वह सीताजी को जमीन पर घसीटते हुए ले आए थे लेकिन इस स्थल से रावण ने सीता को पुष्पक विमान में बिठाया था यानि सीताजी ने धरती यहाँ छोडी थी इसीसे वास्तविक हरण का स्थल यह माना जाता है.
ज़मीन का यह टुकड़ा पूरी तरह से बंजर हैं. हालांकि आस-पास हरे भरे पेड़ हैं पर इस टुकडे में कुछ घास उग आती हैं और तुरंत सूख जाती हैं. इस भूमि को उपजाऊ करने के लिए कोई तरकीब कोई तकनीक काम न आई.
इस टुकडे के पास में बनवाया गया हैं मंदिर जिसमे राम सीता लक्ष्मण की पारंपरिक मुद्रा में मूर्तियाँ हैं -
मंदिर के पीछे शिवमंदिर हैं
मंदिर के पिछवाड़े परिसर में एक कुटिया बनाई गई हैं. यहाँ सीता हरण के प्रसंगों को मूर्तियों से दर्शाया गया हैं, स्वर्ण मृग की ओर इंगित करना, लक्ष्मण रेखा खीचना, भिक्षा देती सीता, रावण का असली रूप देख कर बेहोश हो गिर पड़ी सीता आदि -
यहाँ काम जारी हैं शायद कुछ समय बाद यह परिसर और अच्छा बन जाए.
यहाँ से हम सीता स्थल देखने गए जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में...



"जाट देवता" संदीप पवाँर said
जानकारी मिली।
sunil kumar said
ज्ञान बढ़ाती हुई सार्थक पोस्ट आभार